नई दिल्ली. मछली पालन एक बेहतरीन काम है और इसको करने से अच्छी कमाई होती है. यदि आप भी मछली पालन करते हैं तो सालान चार लाख रुपए तक आसानी से कमा सकते हैं. यही वजह है कि सरकारें मछली पालन को बढ़ावा देने का काम कर रही हैं ताकि मछली पालन से किसानों की इनकम को दोगुना किया जा सके. बिहार जैसे राज्य में सरकार की तरफ से कई सरकारी योजनाओं की शुरुआत की गई है. जिसका फायदा भी बिहार के लोगों ने उठाया है और मछली पालन करके अपनी इनकम बढ़ाई है.
वहीं सरकार की पहल के चलते राज्य में मछली उत्पादन में भी जबरदस्त उछाल आया है. दस साल पहले वाले बिहार के आंकड़े और अब के बिहार के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो मछली पालन में 100 फीसद का उत्पादन बढ़ा है. डेयरी मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के अफसरों का कहना है कि ये बिहार में फिशरीज सेक्टर के लिए अच्छे संकेत हैं. इससे सभी को फायदा होगा.
जानें कितना हुआ मछली उत्पादन
अब आंकड़ों की बात की जाए तो बिहार ने मछली उत्पादन में लगातार इजाफा किया है. वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य में 9.59 लाख टन मछलियों का उत्पादन हुआ है.
बिहार में डेयरी मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग की ओर से की गयी तमाम पहल की वजह से ही ये उपलब्धि हासिल हुई है.
विभाग की ओर से बताया गया है कि वर्ष 2014-15 से 2024-25 तक 10 वर्षों में 100 फीसदी मछली का उत्पादन बढ़ा है.
वर्ष 2013-14 में बिहार मछली उत्पादन में देश में नौवें स्थान पर था. वर्ष 2023-24 में अब बिहार मछली उत्पादन में चौथे स्थान पर आ गया है.
भौगोलिक विविधताओं वाले प्रदेश में वैज्ञानिक, आरएएस और बायोफ्लॉक तकनीक से मछली पालन की गयी.
राज्य में 7575.12 हेक्टेयर क्षेत्र में वैज्ञानिक पद्धति से तालाब निर्माण कर तकनीकी आधारित मत्स्य उत्पादन किया गया.
बायोफ्लॉक तकनीक का भी मिला फायदा
बिहार में मछली पालन की नई तकनीक का भी फायदा मिला है. बायोफ्लॉक तकनीक से कम स्थान में अधिक मछली का उत्पादन हो रहा है.
बता दें कि राज्य में कुल 764 बायोफ्लॉक प्रणाली की संरचना स्थापित की गयी. इस तकनीक से कम लागत के साथ ही कम स्थान में अत्यधिक मत्स्यपालन किया जा सकता है.
वहीं, आरएएस जैसी आधुनिक तकनीक के प्रयोग से 90 प्रतिशत तक पानी की बचत तथा उच्च सघन मत्स्य पालन किया जा रहा है.












