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Fisheries: तालाब में मरने लगेंं मछलियां तो क्या करना चाहिए जानें यहां

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मछलियों की प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. अगर एक एकड़ के तालाब में मछली पालन किया जाए तो इससे तकरीबन 5 से 6 लाख रुपए की कमाई की जा सकती है, लेकिन अगर तालाब में मछलियां मरने लगे हैं तो इससे नुकसान हो सकता है. इसलिए हमेशा ही इस बात का ध्यान रखें कि तालाब के अंदर मछलियों की मौत न हो. तालाब की और मछलियों की समय-समय पर जांच करते रहें. फिश एक्सपर्ट कहते हैं कि तालाब के अंदर मछलियों के मरने की कई वजह से हो सकती है, जैसे की पानी की क्वालिटी खराब होना. तापमान में बदलाव या प्रदूषण, कई बार ऑक्सीजन की कमी होने और मछलियों के बीमार पड़ने से भी उनकी मौत होती है और जांच के बाद ही इसका पता चलता है.

अगर तालाब में मछली मरी मिले चाहे उसकी संख्या एक, दो या फिर ज्यादा हो, तुरंत इसकी जांच कराएं कि ऐसा क्यों हुआ है. तुरंत मछलियों की मौत रोकने के लिए उपाय करना शुरू कर दें. अगर आप मछली पालन में नए हैं तो पुराने मछली पालकों से इस बारे में जानकारी कर सकते हैं और उससे आपको पता चल जाएगा कि मछलियों की मौत होने पर क्या किया जा सकता है. अगर आप पानी की जांच करेंगे तो उससे पता चल जाएगा कि पानी में ऑक्सीजन की कमी है या नहीं. वहीं पानी में अमोनिया नाइट्राइट, नाइट्रेट, पीएच, जीएच और केएच जैसी चीजों की जांच की जाती है.

इन उपाय को जरूर करें मछली पालक
अगर तालाब में पानी की जांच की जाए और यह पता चले कि ऑक्सीजन की कमी है तो एयरेटर और दूसरी वेंटिलेशन की चीजों का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए. हो सके तो पानी को बदल दें. तालाब में जाल चलाकर ताली में जमीन हानिकारक गैसों को भी काम करने का उपाय करना चाहिए. तालाब में चूने का छिड़काव करें, नमक डालें और तालाब में ज्यादा से ज्यादा धूप आने दें. हमेशा ही तालाब की तैयारी के समय तली पर जमा कीचड़ को निकाल लेना चाहिए. इससे भी बाद में दिक्कतें आती हैं. कभी भी मरी हुई मछली को कचरे में न फेकें, बल्कि से दफन कर दें. अगर मछली बहुत बड़ी है तो उसे दफन कर देना ही सही होता है.

ये काम भी जरूर करें
फिश एक्सपर्ट कहते हैं कि तालाब के पानी में ऑक्सीजन की कमी की वजह से मछलियां मरती हैं. तालाब में बैक्टीरिया और फंगस संक्रमण भी हो जाता है, इससे भी उनकी मौत होती है. तालाब में रासायनिक खाद या जानवरों का मलबा बहकर आता है, इससे भी मछलियों की मौत हो सकती है. तालाब पर कार्बनिक पदार्थ की काली बदबूदार परत जमा हो जाती है. जिससे भी मछलियों में मृत्युदर दिखाई देती है. वहीं तालाब में शैवाल या पौधों की ज्यादा वृद्धि हो जाने पर भी उनमें मृत्युदर दिखती है. इसलिए तालाब के पानी गुणवत्ता को बनाए रखें. नियमित रूप से पानी के परीक्षण करें और जरूरी दावाओं का छिड़काव करें.

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