Home मछली पालन Fisheries: ठंडे पानी की मछली का उत्पादन बढ़ाने को एक मंच पर आए एक्सपर्ट, कई कंपनियां भी हुईं शामिल
मछली पालन

Fisheries: ठंडे पानी की मछली का उत्पादन बढ़ाने को एक मंच पर आए एक्सपर्ट, कई कंपनियां भी हुईं शामिल

Further, necessary provisions are made by the State Government in their respective Marine Fishing Regulation Acts Rules (Amendments) for the installation of Turtle Excluder Devices (TED) for the protection of sea turtles.
प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली. मछली पालन विभाग ने श्रीनगर स्थित एसकेआईसीसी में ठंड पानी की मछली पालन पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया. ये सम्‍मेलन भारत के शीत जल मत्स्यपालन की क्षमता के सतत रूप से विकास और समृद्धि के लिए दोहन करने पर अपनी तरह का पहला राष्ट्रीय संवाद था. सम्मेलन के दौरान ठंडे जल की मछली में अत्याधुनिक नवाचारों को प्रदर्शित करने वाली एक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया. इस प्रदर्शनी में विभिन्न संस्थानों, सरकारी एजेंसियों, उद्योग जगत के प्रमुखों और प्रगतिशील उद्यमों के 17 प्रदर्शकों ने भाग लिया. इन लोगों ने नई प्रौद्योगिकियों, गुणवत्तापूर्ण सामग्रियों और सर्वोत्तम प्रणालियों का प्रदर्शन किया.

इस दौरान राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड, मत्स्यपालन विभाग, जम्मू एवं कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश, एसकेयूएएसटी-जम्मू, नाबार्ड, कश्मीर ट्राउट के 2 एक्वाकल्चर प्राइवेट लिमिटेड, आईसीएआर-केंद्रीय शीतजल मत्स्यपालन अनुसंधान संस्थान, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम, गरवारे टेक्निकल फाइबर्स लिमिटेड, सिंध, ट्राउट लाइव फिश वेंडिंग सेंटर, गांदरबल, एमकेसी फूड्स, कुपवाड़ा से मत्स्य सेवा केंद्र, साथ ही ग्रोवेल ट्राउट फीड एबीआईएस ट्राउट फीड, बारामूला से अफ्फरवत ट्राउट और जेके ट्राउट फीड जैसी ट्राउट फीड कंपनियां शामिल थीं.

तकनीकि पहलुओं पर हुई चर्चा
सम्मेलन के दौरान, भारत सरकार के मत्स्यपालन विभाग द्वारा विभिन्न हितधारकों के साथ अनुसंधान और नवाचार, प्रौद्योगिकी अपनाने, अवसंरचना विस्तार, संस्थागत समन्वय और उद्यमिता विकास सहित प्रमुख विषयगत क्षेत्रों पर विचार-विमर्श करने के लिए तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया.

सत्र के दौरान भारत सरकार के मत्स्यपालन विभाग के केंद्रीय सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने उद्यमियों और हितधारकों के साथ बातचीत की.

उन्होंने जम्मू एवं कश्मीर तथा अन्य हिमालयी क्षेत्रों में ठंडे पानी की मछली पालन की संभावनाओं और चुनौतियों के बारे में जानकारी प्राप्त की. यह चर्चा क्षेत्र में विकास के तकनीकी पहलुओं पर केंद्रित रही.

मछली पालकों ने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए, जिनमें रोग परीक्षण प्रयोगशालाओं की आवश्यकता, नियमित रूप से प्रजनन की उपलब्धता, क्षमता विकास की आवश्यकताएं, जलवायु-अनुकूल प्रजनन केंद्रों की उपलब्धता और जल संकट शामिल हैं.

उत्तराखंड की उपलगज्ञ समिति के सचिव श्री प्रवेश बिष्ट ने जल प्रदूषण, बेहतर प्रयोगशाला सहायता और वर्षा के दौरान जलमार्गों में ऑक्सीजन की कमी सहित जमीनी स्तर की चुनौतियों को साझा किया.

खैबर एक्वाकल्चर के कैसर कौनानैन ने उद्यमिता विकास पर चर्चा करते हुए ऊर्ध्वाधर एकीकरण के माध्यम से उद्यमिता को मजबूत करने और उद्यम विस्तार के लिए एफआईडीएफ जैसी योजनाओं तक बेहतर पहुंच के महत्व के बारे में बताया.

उन्होंने कहा कि शीत जल में मत्स्यपालन का विकास कुशल मानव संसाधन की उपलब्धता और पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र के अनुरूप कुशल उत्पादन और व्यावसायिक मॉडल अपनाने पर निर्भर करता है.

हैदराबाद स्थित स्मार्ट ग्रीन एक्वाकल्चर के संस्थापक आदित्य रित्विक नर्रा ने बताया कि व्‍यावसायिक पैमाने पर अपनाने और तकनीकी नवाचार की कमी के कारण शीत जल मत्‍स्‍य उत्पादन सीमित है.

चारों सत्रों में विभिन्न हितधारकों ने शीतजल राज्यों में रेनबो ट्राउट के लिए एक बहु-राज्य सहकारी समिति की स्थापना, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने, बीज और प्रजनन सामग्री की उपलब्धता में सुधार करने और रोग जांच एवं जैव सुरक्षा प्रणालियों को मजबूत करने की आवश्यकता की आवश्‍यकता बताई.

Written by
Livestock Animal News Team

Livestock Animal News is India’s premier livestock awareness portal dedicated to reliable and timely information.Every news article is thoroughly verified and curated by highly experienced authors and industry experts.

Related Articles

तालाब में खाद का अच्छे उपयोग के लिए लगभग एक सप्ताह के पहले 250 से 300 ग्राम प्रति हेक्टेयर बिना बुझा चूना डालने की सलाह एक्सपर्ट देते हैं.
मछली पालन

Fish Farming Tips: चूना, पोटैशियम परमैगनेट, फिटकरी और नमक तालाब में डालें, इसके हैं कई फायदे

नई दिल्ली. मछलि यों के तालाब में चूना, पोटैशियम परमैगनेट, फिटकरी और...

तालाब में खाद का अच्छे उपयोग के लिए लगभग एक सप्ताह के पहले 250 से 300 ग्राम प्रति हेक्टेयर बिना बुझा चूना डालने की सलाह एक्सपर्ट देते हैं.
मछली पालन

Fish Farming: फिशरीज से जुड़े लोगों में सात थ्री-व्हीलर, आइस बॉक्स और नावों का किया वितरण

नई दिल्ली. बिहार के औरंगाबाद शहर में डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन...

फिश एक्वेरियम की मछलियां बेहद ही संवेदनशील होती हैं.
मछली पालन

Ornamental Fish: महाराष्ट्र के एक सजावटी फिश ब्रूड बैंक से अमेरिका समेत 12 देशों में हो रहा एक्सपोर्ट

बनई दिल्ली. भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के...