Home मछली पालन Fisheries: मानसून में मछली या सी फूड्स खाना सेहत के लिए कितना है खतरनाक, जानिए पांच प्वाइंट में
मछली पालन

Fisheries: मानसून में मछली या सी फूड्स खाना सेहत के लिए कितना है खतरनाक, जानिए पांच प्वाइंट में

fish meat benefits, Fish Farming, Fish Production, Sea Foods, Fish Food in Monsoon, Fish Food in Monsoon,
प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. देश में मछली उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है. जिस तरह से मछली का उत्पादन बढ़ रहा है, वैसे ही मछली खाने वालों की संख्या भी बढ़ रही है. मछली खाने के शौकीन हर मौसम में मछली खाते हैं. मछली से कई तरह की डिश बनाकर उनका जायका लेते हैं, लेकिन उन्हें ये नहीं पता होता कि किस मौसम में मछली खानी चाहिए और किस मौसम में नहीं. साल में कुछ महीने ऐसे भी होते हैं जब मछली का सेवन बंद कर देना आपकी सेहत के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. या फिर बहुत कम देना चाहिए. बंद देंगे तो सेहत के लिए ज्यादा ठीक होगा. आज हम इन्हीं बातों को आपके सामने रखने जा रहे हैं, जिससे आप सचेत हो जाएं. विशेषज्ञों के अनुसार बरसात के मौसम में सी फू्ड्स जैसे कि मछलियां और अन्य समुद्री जीवों को खाने से परहेज करना चाहिए.

अगर आप बरसात के मौसम में मछली या अन्य सी फूड्स को अपने भोजन में शामिल करते हैं तो सावधान हो जाइए. क्योंकि आम दिनों में मछली खाना जितना लाभदायक है, बरसात के मौसम में उतना नुकसानदायक भी. इन दिनों मछली खाना फायदे कम नुकसान ज्यादा पहुंचा सकती है. आपको बता दें कि मानसून जहां लोगों को राहत व ताजगी देता है वहीं वाटर बॉडीज में प्रदूषण के बढ़ने से जो​खिम भी बढ़ा देता है. इसलिए बारिश के मौसम में मछली या सी फूड्स खाने से बचना चाहिए. आइए जानते हैं कि बारिश के मौसम में मछली का उपयोग क्यों खतरनाक है.

मानूसन में मछली से ज्यादा अच्छी हैं सब्जी
आम दिनों की अपेक्षा बरसात के मौसम में लोगों को कई तरह की सब्जियां खाने को मिलती हैं ये सब्जियां नुकसान भी नहीं पहुंचाती. मगर, समुद्री खाद्य पदार्थ लोगों के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं. जल निकायों में संदूषण का खतरा बढ़ जाता है. संदूषण मतलब ऐसे अवांछित पदार्थ मिल जाते हैं जो सामान्यत: जल में नहीं रहते, जैसे सूक्ष्म जीव, रसायन, अपशिष्ट पदार्थ पानी में मिल जाते हैं, जो मानव जाति के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं. इन पदार्थों का खाद्य सुरक्षा पर विपरीत प्रभाव पड़ता है. ये लोगों के स्वास्थ के लिए बेहद जोखिम साबित हो सकता है.

इन पांच बिंदुओं में समझे बारिश में मछली खाने होने वाले नुकसान
वाटर पॉल्यूशन
मानसून की बारिश समुद्र, नदी, तालब का जल प्रदूषण बढ़ा देती है. क्योंकि बारिश का पानी जमीन से बहकर अपने साथ बहुत सी प्रदूषण वाली चीजों को लेकर आता है. ऐसे में मछली या अन्य समुद्री भोजन प्रजातियां इन प्रदूषकों को अपना भोजन बना लेती हैं, जो उनके शरीर में जमा हो जाते हैं. जब आदमी इन मछलियों को खाता है तो वो दूषित चीजें भी मनुष्य के शरीर में प्रवेश कर जाती हैं, ये भारी धातु और रसायनों जैसे नुकसानदायक पदार्थों के संपर्क में आने से लंबे समय तक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं.

मरकरी पॉइजनिंग
बारिश के मौसम में मछली खाने का एक और दुष्प्रभाव मरकरी पाइजनिंग भी है. मरकरी एक विषैली भारी धातुू होती है, जो मछली व अन्य समुद्री भोजन खानकर ट्यूना, स्वोर्डफिश और शार्क जैसी मछलियों के ऊतकों में जमा हो जाती है. जब हम मछली को अपने भोजन में प्रयोग करते हैं तो हमारे शरीर में भी पारा का खतरनाक स्तर जमा हो सकता है. इससे कई तरह की बीमारी हो सकती हैं.

पर्यावरणीय प्रदूषक
मरकरी के अलावा सी फूड्स पर्यावरणीय प्रदूषकों जैसे पालीक्लोराइनेटेड, बाइफिनाइल जिसे पीसीबी भी कहते हैं से दूषित हो सकता है. ये भी मछली के ऊतकों में जमा होकर लोगों की हेल्थ के लिए खतारनाक साबित हो सकता है.

बढ़ जाता है एलर्जी का लेबल
कुछ लोगों को मछली खाने से एलर्जी हो जाती है. जब बारिश के मौसम में इम्नयुनिटी पॉवर कमजोर हो सकती है तो एलर्जी का लेबल भी बढ़ जाता है. ऐसे में बारिश में मछली या सी फूड्स खाने से पित्ती, खुजली, दाने, चेहरे, होंठ, जीभ या गले में सूजन आ जाती है. सांस लेने में कठिनाई या पेट में दर्द और मतली और उल्टी तक आने लगती है.

परजीवी संक्रमरण से हो सकता है नुकसान
बरसात के मौसम में वाटर बॉडीज में परजीवियों के पनपने का सबसे अच्छा मौसम होता है. मछली और समुद्री भोजन में टेपवर्म, राउंडवॉर्म और फ्लूक जैसे परजीवी हो सकते हैं, जो निगलने पर परजीवी संक्रमण का कारण बन सकते हैं. ये इन्फेंक्शन आपके पाचन तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं. इसके बाद दस्त, सूजन या गैस हो सकती है.

Written by
Livestock Animal News Team

Livestock Animal News is India’s premier livestock awareness portal dedicated to reliable and timely information.Every news article is thoroughly verified and curated by highly experienced authors and industry experts.

Related Articles

1.2 million fisher households nationwide bringing in real-time validation.
मछली पालन

Fisheries: देश में अंतर्देशीय मछली पालन से निर्यात बढ़ाने पर दिया जाएगा जोर

नई दिल्ली. मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के मत्स्य पालन विभाग...

गर्मी में भी मछली के तालाबों में पानी का स्तर लगभग 6 फीट रखा जाना चाहिए. इससे निचले हिस्से में पानी का तापमान उपयुक्त रहता है.
मछली पालन

Fisheries News: मछुआरों की इनकम बढ़ाने के लिए जाल पैकेज और नाव बांटी, जरूरी टिप्स भी दिए

नई दिल्ली. फिशरीज सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए सरकार कई काम...

चिलचिलाती गर्मी में मछलियों को सूखा चारा नहीं देना चाहिए.
मछली पालन

Fisheries: मछली के अच्छे बीज के उत्पादन पर फोकस कर रही है सरकार, युवाओं को लगाया जाएगा आगे

नई दिल्ली. मत्स्य पालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने उत्तर...