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Fisheries Sector: मछुआरों की इनकम बढ़ाने के लिए जरूरी सामान उपलब्ध करवा रही है सरकार

‘Need national guideline on eco-labeling of marine fishery resources’
Symbolic photo. livestock animal news

नई दिल्ली. मत्स्यपालन, पशुपालन और दुग्ध उत्पादन मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ​​ललन सिंह ने लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में बताया था कि भारत सरकार के मत्स्य विभाग ने अपनी योजनाओं, नीतियों और कार्यक्रमों के माध्यम से फिशरीज सेक्टर के विकास के लिए कई पहलें की हैं, जिनमें पारंपरिक मछुआरों की आजीविका को मजबूत करना भी शामिल है. विभाग द्वारा चलाई जा रही प्रमुख योजना प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत, पिछले पांच वर्षों और चालू वर्ष में केरल के लिए 1,418.51 करोड़ रुपये की मत्स्य विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है.

स्वीकृत गतिविधियों में अन्य बातों के अलावा, आजीविका को मजबूत करने वाली विभिन्न गतिविधियां जैसे कि गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाले जहाजों के लिए सहायता (20 नग), पारंपरिक मछुआरों को प्रतिस्थापन नौकाएं और जाल (200 नग), स्टॉक पुनर्जीवन के लिए तट के किनारे कृत्रिम चट्टानों की स्थापना (42 नग), द्विकपाटी खेती (1,140 नग), बायोफ्लॉक इकाइयां (780 नग) और रिसर्कुलेटरी मत्स्य पालन प्रणाली (आरएएस) इकाइयां (708 नग), सजावटी मछली पालन और प्रजनन इकाइयां (822 नग), जलाशयों में पिंजरे (493 नग) के साथ-साथ मछली पकड़ने पर प्रतिबंध की अवधि के दौरान मछुआरों को आजीविका सहायता (1,71,033 नग) शामिल हैं.

मछुआरों को शिक्षा के लिए भी लोन की सुविधा
केरल में तटीय मत्स्य पालन और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए एकीकृत आधुनिक तटीय मत्स्य पालन गांवों (9), जलवायु परिवर्तन के अनुकूल तटीय गांवों (6) की स्थापना और मत्स्य सेवा केंद्रों (10) और सागर मित्रों (222) सहित विस्तार सहायता सेवाओं को भी मंजूरी दी गई है.

मछलियों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने और अधिक मूल्य प्राप्त करने के लिए परिवहन वाहनों (468), मछली कियोस्क (90), जीवित मछली बिक्री केंद्रों (77) और मूल्यवर्धित उद्यम इकाइयों (10) को भी मंजूरी दी गई है.

केरल मछुआरा कल्याण कोष बोर्ड और मत्स्यफेड जैसी संस्थाओं के माध्यम से मछली पकड़ने के लिए आवश्यक सामग्री पर ब्याज मुक्त और रियायती लोन उपलब्ध कराया जा रहा है.

मछुआरा स्वयं सहायता समूहों को सूक्ष्म वित्त सहायता प्रदान करना, मछुआरों के बच्चों के लिए शिक्षा ऋण भी दिया जा रहा है.

मछली बेचने वाली महिला मछुआरों को वित्तीय सहायता और मछली पकड़ने वाली नौकाओं, इंजनों और उपकरणों की खरीद में सहायता जैसी कई पहलें की जा रही हैं.

इन पहलों का उद्देश्य आय सुरक्षा को मजबूत करना, अनौपचारिक ऋण स्रोतों पर निर्भरता को कम करना और मछुआरा समुदायों में स्वरोजगार को बढ़ावा देना है.

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (एमओपीएनजी) इस विषय पर नोडल मंत्रालय होने के नाते सूचित किया है कि चूंकि केरोसिन एक प्रदूषणकारी ईंधन है और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है.

इसलिए केरल सहित राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को पीडीएस केरोसिन आवंटन को 2010-11 से युक्तिसंगत बनाया गया है और आज तक 21 राज्य/केंद्र शासित प्रदेश पहले ही पीडीएस केरोसिन मुक्त हो चुके हैं.

Written by
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