Home मछली पालन Fish: यहां मछलियों की अच्छी प्रजातियां होंगी विकसित, पढ़ें इसके फायदे
मछली पालनसरकारी स्की‍म

Fish: यहां मछलियों की अच्छी प्रजातियां होंगी विकसित, पढ़ें इसके फायदे

तालाब में खाद का अच्छे उपयोग के लिए लगभग एक सप्ताह के पहले 250 से 300 ग्राम प्रति हेक्टेयर बिना बुझा चूना डालने की सलाह एक्सपर्ट देते हैं.
तालाब में मछली निकालते मछली पालक

नई दिल्ली. बिहार के बक्सर जिले में मत्स्य उत्पादन को नया आयाम देने और आधुनिक तकनीक आधारित मत्स्य अनुसंधान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बक्सर में इन्लैंड फिशर रिसर्च एवं एडवांस बूड स्टॉक सीड सेंटर की स्थापना की प्रक्रिया शुरू हो गई है. बुधवार को इसी क्रम में केंद्र की तकनीकी टीम एवं बिहार मत्स्य निदेशक अभिषेक रंजन ने ब्रह्मपुर प्रखंड स्थित गोकुल जलाशय का निरीक्षण किया. इस परियोजना को लेकर स्थानीय स्तर पर उत्साह है, क्योंकि इसकी स्थापना से बक्सर जिले को मत्स्य पालन के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी.

बताया जाता है कि इस महत्वाकांक्षी योजना की पहल बक्सर सांसद सुधाकर सिंह द्वारा की गई, जिन्होंने मत्स्य विभाग को पत्र भेजकर गोकुल जलाशय को इस सेंटर की स्थापना के लिए उपयुक्त और संभावनाओं से भरपूर स्थान बताया था. सांसद के आग्रह पर केंद्र की विशेषज्ञ टीम ने स्थल निरीक्षण किया और तकनीकी मूल्यांकन किया.

क्यों है ये परियोजना महत्वपूर्ण
मत्स्य विभाग डायरेक्टर अभिषेक रंजन ने निरीक्षण के दौरान कहा कि गोकुल जलाशय प्राकृतिक संरचना, क्षेत्रफल, जल की गुणवत्ता और भौगोलिक स्थिति के आधार पर इस परियोजना के लिए अत्यंत उपयुक्त है.

इन्लैंड फिशर रिसर्च एवं एडवांस बूड स्टॉक सीड सेंटर एक वैज्ञानिक और तकनीकी संस्थान होता है.

जिसका मुख्य उद्देश्य मछली उत्पादन, मछलियों की बेहतर नस्लें विकसित करना और मत्स्य पालन को आधुनिक तकनीक से जोड़ना होता है.

इसे ऐसे समझें कि यह मछलियों के लिए बीज उत्पादन और अनुसंधान केंद्र की तरह काम करता है.

इस सेंटर की स्थापना से जिले में न केवल मत्स्य उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि स्थानीय मत्स्यपालकों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज एवं उन्नत प्रशिक्षण की भी सुविधा मिलेगी.

यहां आधुनिक तरीके से बूड स्टॉक तैयार किया जाएगा, जिससे वैज्ञानिक पद्धतियों पर आधारित उच्च उत्पादक मछली प्रजातियों का संवर्धन संभव हो सकेगा.

मत्स्य निदेशक ने बताया कि सेंटर बनने के बाद बक्सर और उसके आसपास के जिलों में मत्स्यपालन उद्योग को नई दिशा और गति मिलेगी.

इस परियोजना से ग्रामीण स्तर पर रोजगार के नए अवसर खुलेंगे. फिश फार्मिंग, बीज उत्पादन, मत्स्य प्रशिक्षण सहित अन्य संबंधित क्षेत्रों में युवा और किसानों को फायदा होगा.

स्थानीय किसानों, बेरोजगार युवाओं और महिला स्व-सहायता समूहों को भी इससे नए अवसर मिलेंगे.

विशेषज्ञों का मानना है कि इस केंद्र की स्थापना से जिले की अर्थव्यवस्था में सुधार होगा और बक्सर मत्स्य उत्पादन के लिए एक मॉडल जिला बन सकता है.

गोकुल जलाशय के वैज्ञानिक विकास से न केवल मत्स्य उद्योग को लाभ मिलेगा, बल्कि जलाशय पर्यटन और पारिस्थितिकी संरक्षण के नए रास्ते भी खुलेंगे.

अधिकारी दल ने जलाशय पर जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण से संबंधित संभावनाओं पर भी चर्चा की.

निष्कर्ष
यह सेंटर बक्सर में स्थापित होता है तो इससे यहां के किसान आत्मनिर्भर बनेंगे और जिले को राष्ट्रीय मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी.

Written by
Livestock Animal News Team

Livestock Animal News is India’s premier livestock awareness portal dedicated to reliable and timely information.Every news article is thoroughly verified and curated by highly experienced authors and industry experts.

Related Articles

यहां मानसून जून से सितम्बर तक चलता है. औसत वर्षा करीब 57 सेमी. होती है.
मछली पालन

Fish Farming Scheme: मछली पालन के लिए बिना गारंटी मिलेगा दो लाख रुपये तक का लोन

नई दिल्ली. पूंजी के अभाव में मछली पालन का कारोबार बढ़ाने में...

fish farming in tank
मछली पालन

Fish Farming: घर पर मछली पालन करके कमाई करें तगड़ी, इसका तरीका भी है बिल्कुल आसान

नई दिल्ली. क्या आप जानते हैं कि सिर्फ 50 स्क्वायर फीट में...

पशुपालनमछली पालन

Kisan Mela: किसान मेले में पशुपालन और मछली पालन के फायदे गिनाए

नई दिल्ली. गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी, लुधियाना के...