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Fisheries: हैल्दी मछलियों की आंखे और स्किन होती हैं चमकदार

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मछलियों की प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. मछली पालन के काम में अगर मछली बीमार पड़ गई तो इससे फिश फार्मिंग का पूरा काम खराब हो सकता है. यानी इसमें बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है. इसलिए मछलियों को बीमार होने से बचाना चाहिए. ताकि वह स्वस्थ रहें और बेहतर उत्पादन देती रहें. यदि आप मछली पालक हैं तो आपको इस बारे में जरूर पता होना चाहिए कि स्वस्थ और अवस्थ मछलियों की क्या पहचान है. अगर आप उनकी पहचान के बारे में जानते होंगे तो फिर मछली पालन के काम में आपको नुकसान नहीं होगा. क्योंकि जैसे ही मछलियों में कोई दिक्कत आएगी तो इस बारे में आपको पहले से ही अंदाजा हो जाएगा और आप उसका उपाय कर लेंगे.

भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग Department of Fisheries, Government of India) के एक्सपर्ट का कहना है कि स्वस्थ मछलियों की पहचान और अस्वस्थ मछलियों की पहचान यदि हो गई तो फिर मछली पालन के काम में नुकसान से आप खुद को बचा पाएंगे. यदि आप भी ये जानना चाहते हैं तो इस रिपोर्ट में लाइव स्टॉक एनिमल न्यूज (Livestock Animal News) आपको इसी के बारे में अहम जानकारी देने जा रहा है.

हैल्दी मछलियों की पहचान
अगर मछलियां स्वस्थ हैं तो उनकी आंखें चमकदार और थोड़ी उभरी हुई होंगी.

स्वस्थ मछलियों के गलफड़े चमकीले लाल या गुलाबी रंग के होते हैं. वहीं मछलियों से तेज बदबू नहीं आती है.

जबकि मछलियों की स्किन चमकदार और चिकनी होती है. मछलियां प्राकृतिक रंग की होती हैं और उनका रंग फीका नहीं पड़ता है.

मछलियों को दबाने पर मांस तुरंत अपनी जगह वापस आ जाता है. गड्ढे नहीं बनते हैं.

फटे या चिपके हुए पंख नहीं होते हैं. उनकी गति सक्रिय रहती है और सामान्य रूप से मछलियां तैरती नजर आती हैं.

अवस्थ मछलियों की पहचान
वहीं मछलियां अगर अस्वस्थ हैं तो धीरे-धीरे तैरती हैं और एक जगह लटकती रहती हैं.

मछलियां खाना नहीं खाती हैं. अगर मछलियां टैंक में पली हैं तो टैंक की दीवारों में सजावट से खुद को रगड़ती हैं. ऊपरी सतह या नीचे तली में ज्यादा देर रहती हैं.

शरीर पंखों या गलफड़े में सफेद तरह के धब्बे और घाव दिखाई देते हैं. रंग फीका पड़ जाता है. अजीब सा रंग दिखता है.

वहीं मछलियों के शरीर से चिपके हुए फटे हुए पंख नजर आते हैं.

निष्कर्ष
मछली पालन के दौरान मछलियों की हर एक हरकत पर नजर रखना चाहिए. जिसका सीधा नाता मछली पालन के फायदे और नुकसान से होता है.

Written by
Livestock Animal News Team

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