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GADVASU: पशुपालन की बारकियां सिखाई, दूध-मांस और अंडे से जुड़े हर एक फायदे के बारे में बताया

ट्रेनिंग प्रोग्राम में हिस्सा लेने वाले युवा व गडवासु के लोग.

नई दिल्ली. गुरु अंगद देव पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय लुधियाना के पशुपालन उत्पाद प्रौद्योगिकी विभाग (एलपीटी) ने पंजाब एग्रीकल्चरल मैनेजमेंट एंड एक्सटेंशन ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (पीएएमईटीआई), लुधियाना के सहयोग से “पशुपालन क्षेत्र में मूल्य संवर्धन यानि वैल्यू एडिशन पर छह दिवसीय ट्रेनिंग प्रोग्राम का आयोजन किया गया. यह कार्यक्रम ग्रामीण युवा कौशल प्रशिक्षण (एसटीआरवाई) पहल के तहत आयोजित किया गया था. जिसका उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को पशुपालन के प्रोडक्ट के मूल्य संवर्धन प्रोसेसिंग से संबंधित तमाम अहम और व्यावहारिक कौशल से लैस करना था. खासतौर पर विशेष रूप से मांस, दूध और अंडे की प्रोसेसिंग की ओर युवाओं का ध्यान खींचा गया.

पंजाब के विभिन्न जिलों से कुल 16 प्रतिभागियों ने इस प्रशिक्षण में भाग लिया. डॉ. नितिन मेहता, एचओडी और कार्यक्रम समन्वयक, ने बताया कि सत्रों को खेत से लेकर टेबल तक की मूल्य श्रृंखला की समग्र समझ प्रदान करने के लिए बारीकी से डिजाइन किया गया था.

बाई प्रोडक्ट के बारे में क्या बताया
ट्रेनिंग प्रोग्राम में दूध, मांस और अंडों की प्रोसेसिंग और मूल्य संवर्धन तकनीकों को कवर करने वाले व्यापक व्यावहारिक सत्र शामिल थे, जिसमें बाई प्रोडक्ट उपयोग और पर्यावरणीय स्थिरता पर विशेष ध्यान दिया गया.

वाइस चांसलर डॉ. जेपीएस गिल ने आयोजकों और सहयोगियों के अडिग समर्पण के लिए सराहना की. उन्होंने किसानों और छोटे पैमाने के प्रोसेसरों को अपनी स्वयं की उद्यम स्थापित करने में सशक्त करने के लिए ऐसे पहलों के महत्व पर जोर दिया.

उन्होंने कहा कि इससे खुद से तय और लगातार जीवनयाप करने को बढ़ावा मिलता है. यह दोहराया कि ये उपाय मौजूदा वक्त की तात्कालिक सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं.

डॉ. रविंदर सिंह ग्रेवाल, विस्तार शिक्षा के निदेशक, ने किसानों की आय बढ़ाने में मूल्य संवर्धन की विशाल क्षमता और महत्व को उजागर करने में विभाग के प्रयासों की सराहना की.

उन्होंने इस प्रभावशाली पहल को सहयोगात्मक रूप से सुगम बनाने के लिए डॉ. के.बी. सिंह, निदेशक, PAMETI, के मूल्यवान सहयोग को भी मान्यता दी.

इस कार्यक्रम का कुशल समन्वय डॉ. रवनीत सिंह (पीएएमईटीआई), डॉ. पवन कुमार, और डॉ. राजेश वी. वाघ द्वारा किया गया, जिन्होंने सभी सत्रों की सुगम और प्रभावी तरीको से आयोजन तय किया.

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