Home पशुपालन Goat Farming: इन तीन तरीकों से किया जाता है बकरी पालन, जानें कौन सा है इसमें ज्यादा बेहतर
पशुपालन

Goat Farming: इन तीन तरीकों से किया जाता है बकरी पालन, जानें कौन सा है इसमें ज्यादा बेहतर

livestock animal news
चारा खाती बकरियों की तस्वीर.

नई दिल्ली. बकरी पालन एक बेहतरीन काम है और इससे अच्छी कमाई भी होती है. अगर आप बकरी पालन शुरू करना चाहते हैं तो जान लें कि बकरी पालन का काम चार तरीकों से किया जाता है. एक तरह के पालन में बकरियों को चारागाह में चराकर पाला जाता है. जबकि दूसरे तरीके चारागाह का कम इस्तेमाल किया जाता है और उन्हें घर पर भी खाने के लिए चारा दिया जाता है. वहीं फार्म में बकरी को पालकर कमाई की जाती है.

अगर आप बकरी पालन करने की सोच रहे हैं तो इसमें से किसी भी एक तरीके को अपना सकते हैं. आप बकरी को चराकर, घर पर बांधकर खिलाकर भी बकरी पालन कर सकते हैं. आइए इनकी डिटेल जानते हैं.

कैसे बकरी पालें, जानें यहां

  1. पहले तरीके की बात की जाए तो यह तरीका उन क्षेत्रों के लिये उपयुक्त है जहां बकरियों के चराने के लिये पर्याप्त चरागाह उपलब्ध नहीं है. इस तरीके में बकरियों को फार्म अथवा घर पर रखकर ही उनकी चारे-दाने की सभी आवश्यकताओं को पूरा किया जाता है. इसे जीरो ग्रेजिंग मेथड भी कहते हैं. अन्य पद्धतियों की तुलना में इस विधि के अनुसार बकरी पालन करने पर बकरियों से उनकी आनुवंशिक क्षमता के अनुरूप उत्पादन लिया जाना सम्भव होता है.
  2. दूसरे तरीका उन परिस्थितियों के लिये अनुकूल है, जब चरागाह की सुविधा केवल सीमित क्षेत्रों में उपलब्ध हो. साथ ही उनमें चारे की उपलब्धता भी आवश्यकता से कम हो. ऐसी दशा में चरागाह का उपयोग बकरियों को सीमित समय के लिये चराने के लिये किया जाता है. जिससे पूरे वर्ष चरने की सुविधा बनी रहे. इस तरह बकरियों के आहार की पूर्ति सीमित चराई के साथ-साथ उनको फार्म, घर पर पूरक आहार के रूप में जरूरत के मुताबिक दाना तथा सूखा चारा उपलब्ध कराकर पूरी की जाती है. इस तरीके में बकरियों के उत्पादन का स्तर चरागाह में उपलब्ध चारे तथा पूरक आहार की मात्रा एवं गुणवत्ता पर निर्भर करती है.
  3. तीसरे तरीके में बकरियों को केवल चराकर ही पाला जा सकता है. यदि चरागाहा अच्छी गुणवत्ता वाले हैं तो बकरियों को आवास पर अलग से चारा व दाने की आवश्यकता नहीं होती है. उनकी जरूरतें चरागाहों से ही पूरी हो जाती हैं. इसमें प्रबन्धन तो आसान होता है लेकिन यह देखा गया है कि बकरियों का उत्पादन उस अनुरूप में नहीं हो पाता है जितनी बकरियों की क्षमता होती है.
Written by
Livestock Animal News Team

Livestock Animal News is India’s premier livestock awareness portal dedicated to reliable and timely information.Every news article is thoroughly verified and curated by highly experienced authors and industry experts.

Related Articles

पशुपालन

Animal News: पशुओं को सर्दी से बचाने के लिए शेड में करें ये इंतजाम

नई दिल्ली. दिसंबर का महीना जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है. सर्दी और...

CIRB will double the meat production in buffaloes, know what is the research on which work is going on. livestockanimalnews animal Husbandry
पशुपालन

Animal News: राजस्थान में 700 नए पशु चिकित्सा उपकेन्द्र को मिली मंजूरी, दो साल में हुई रिकॉर्ड नियुक्ति

नई दिल्ली. पशुपालन, डेयरी, गोपालन और देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत ने बताया...

Animal husbandry, heat, temperature, severe heat, cow shed, UP government, ponds, dried up ponds,
पशुपालन

Animal Husbandry: पशुओं को शीतलहर से बचाना है तो करें ये काम

नई दिल्ली. ठंड की शुरुआत हो चुकी है. ऐसे में पशुओं की...

गर्मियों में पशु बहुत जल्द बीमार होते हैं. अगर ठीक से इनकी देखरेख कर ली जाए तो हम पशुओं को बीमार होने से बचा सकते हैं.
पशुपालनपोल्ट्री

Fodder: सालभर चाहिए पशु के लिए चारा तो इस फसल की करें बुवाई

नई दिल्ली. पशुओं के लिए हरे चारी की समस्या कोई नई बात...