नई दिल्ली. बकरी पालन एक बेहतरीन काम है और इससे अच्छी कमाई भी होती है. अगर आप बकरी पालन शुरू करना चाहते हैं तो जान लें कि बकरी पालन का काम चार तरीकों से किया जाता है. एक तरह के पालन में बकरियों को चारागाह में चराकर पाला जाता है. जबकि दूसरे तरीके चारागाह का कम इस्तेमाल किया जाता है और उन्हें घर पर भी खाने के लिए चारा दिया जाता है. वहीं फार्म में बकरी को पालकर कमाई की जाती है.
अगर आप बकरी पालन करने की सोच रहे हैं तो इसमें से किसी भी एक तरीके को अपना सकते हैं. आप बकरी को चराकर, घर पर बांधकर खिलाकर भी बकरी पालन कर सकते हैं. आइए इनकी डिटेल जानते हैं.
कैसे बकरी पालें, जानें यहां
- पहले तरीके की बात की जाए तो यह तरीका उन क्षेत्रों के लिये उपयुक्त है जहां बकरियों के चराने के लिये पर्याप्त चरागाह उपलब्ध नहीं है. इस तरीके में बकरियों को फार्म अथवा घर पर रखकर ही उनकी चारे-दाने की सभी आवश्यकताओं को पूरा किया जाता है. इसे जीरो ग्रेजिंग मेथड भी कहते हैं. अन्य पद्धतियों की तुलना में इस विधि के अनुसार बकरी पालन करने पर बकरियों से उनकी आनुवंशिक क्षमता के अनुरूप उत्पादन लिया जाना सम्भव होता है.
- दूसरे तरीका उन परिस्थितियों के लिये अनुकूल है, जब चरागाह की सुविधा केवल सीमित क्षेत्रों में उपलब्ध हो. साथ ही उनमें चारे की उपलब्धता भी आवश्यकता से कम हो. ऐसी दशा में चरागाह का उपयोग बकरियों को सीमित समय के लिये चराने के लिये किया जाता है. जिससे पूरे वर्ष चरने की सुविधा बनी रहे. इस तरह बकरियों के आहार की पूर्ति सीमित चराई के साथ-साथ उनको फार्म, घर पर पूरक आहार के रूप में जरूरत के मुताबिक दाना तथा सूखा चारा उपलब्ध कराकर पूरी की जाती है. इस तरीके में बकरियों के उत्पादन का स्तर चरागाह में उपलब्ध चारे तथा पूरक आहार की मात्रा एवं गुणवत्ता पर निर्भर करती है.
- तीसरे तरीके में बकरियों को केवल चराकर ही पाला जा सकता है. यदि चरागाहा अच्छी गुणवत्ता वाले हैं तो बकरियों को आवास पर अलग से चारा व दाने की आवश्यकता नहीं होती है. उनकी जरूरतें चरागाहों से ही पूरी हो जाती हैं. इसमें प्रबन्धन तो आसान होता है लेकिन यह देखा गया है कि बकरियों का उत्पादन उस अनुरूप में नहीं हो पाता है जितनी बकरियों की क्षमता होती है.












