नई दिल्ली. पोल्ट्री बाजार में लगातार हो रहे बेतहाशा एंटीबायोटिक दवाइयों के प्रयोग पर रोक लगाने के लिए सरकार काम कर रही है. ब्रॉयलर मुर्गे का वजन कम दिनों में ज्यादा बढ़ाने और ज्यादा से ज्यादा अंडे देने के लिए मुर्गियों को एंटीबायोटिक की खुराक दी जाती है. जबकि मछलियों में कोई बीमारी न फैले इसलिए इन एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल करते हैं. इन दवाओं कम इस्तेमाल करने के लिए नवंबर में वर्ल्ड एएमआर अवेयरनेस वीक मनाया जाता है. इतना ही नहीं भारत सरकार के केंद्रीय पशुपालन मंत्रालय भी समय-समय पर दिश-निर्देश जारी करता है. सरकार ने आदेश दिया है कि भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी FSSAI की केंद्रीय सलाकाहर समिति (CAC) और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन यानी एफडीए ने मिलकर प्लान तैयार किया है, जो मुर्गी पालक और मछली पालकों को एंटीबायोटिक दवाइयों के इस्तेमाल के खिलाफ जागरूक करेंगे.
पोल्ट्री बाजार में बेतहाशा हो रहीं एंटीबायोटिक दवाइयों के प्रयोग पर रोक लगाने के लिए सरकार ने सख्ती बरतना शुरू कर दिया है. भारत सरकार के केंद्रीय पशुपालन मंत्रालय भी समय-समय पर दिश-निर्देश जारी करता है. सरकार ने आदेश दिया है कि भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी FSSAI की केंद्रीय सलाकाहर समिति (CAC) और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन यानी एफडीए ने मिलकर प्लान तैयार किया है, जो मुर्गी पालक और मछली पालकों को एंटीबायोटिक दवाइयों के इस्तेमाल के खिलाफ जागरूक करेंगे. ये तीनों टीमें मुर्गी फार्म और मछली फार्म पर जाएंगी. मुर्गी पालक और मछली पालकों को एंटीबायोटिक दवाइयों के इस्तेमाल के खिलाफ जागरूक करेंगे. साथ ही स्कूलों में भी जागरूकता कार्यक्रम भी चलाया जाएगा.
कितना खतरनाक है एंटीबायोटिक का इस्तेमाल
ब्रॉयलर मुर्गे का वजन कम दिनों में ज्यादा बढ़ाने और ज्यादा से ज्यादा अंडे देने के लिए मुर्गियों को एंटीबायोटिक की खुराक दी जाती है. जबकि मछलियों में कोई बीमारी न फैले इसलिए इन एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल करते हैं. ये बेहद खतरनाक प्रयोग है, जो मानव सभ्यता के लिए बेहद खतरनाक है. ये पर्यावरण के लिए भी खतरनाक प्रयोग है. जानवरों को एंटीबायोटिक दवा देने से उनमें एंटीमाइक्रोबायल रेजिस्टेंट यानी एएमआर पैछा हो जाता है. एएमआर एक ऐसी स्टेजहै जिसमें किसी बीमारी को ठीक करने के लिए जो दवा या एंटीबायोटिक दी जाती है वो काम करना बंद कर देती है. कुछ बैक्टीरिया कई दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेते हैं, जिससे वो दवाएंकाम करना बंद कर देती हैं. ऐसी स्थिति को सुपी बग कहा जाताहै. सुपर बग कंडिशन से हर साल 10 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो रही है.
एंटीबायोटिक का प्रयोग कम करने के लिए ये तरीके जरूर अपनाएं
–एंटीबायोटिक दवाओं का प्रयोग सिर्फ बीमार मुर्गी का इलाज करने औश्र उनके संपर्क में आई मुर्गियों पर ही करें. कभी भी बीमारी को रोकने के लिए पहले से इस दवा का प्रयोग न करें.
–बीमारी को रोकने और उसे फैलने से रोकने के लिए फार्म में धूप अच्छे से आए और मुर्गी पालकों को इसका विशेष ध्यान रखना चाहिए. फार्म पर इसका इंतजाम भी करना चाहिए. हवा के लिए बेहतर वेंटीलेशन होना चाहिए.
–प्रीबायोटिक, प्रोबायोटिक, आर्गेनिक एसिड, एसेंशियल आयल्य और इनसूलेबल फाइबर जरूर दें. साथ ही मुर्गी को जरूरत का खाना और मौसम के हिसाब से बचाने के लिए इंतजाम भी करना चाहिए.
–मुर्गी फार्म पर क्षमता से ज्यादा मुर्गी नहीं पालनी चाहिए.
–बायो सिक्योरिटी का पालन बहुत अच्छे से करें.












