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Vermicompost: कैसे बनती हैं केंचुआ खाद और क्या है इसके लाभ, छात्रों ने सीखी वर्मीकम्पोस्ट की विधि

डॉक्टर रंजीत सिंह ने जैविक खेती के लाभों को बताते हुए कहा, कि कैसे जैविक विधियों से उगाई गई सब्जियों और फलों का स्वाद और पोषण स्तर बेहतर होता है.
अभ्यर्थियों को दी केंचुआ खाद की जानकारी।

नई दिल्ली। केंचुआ खाद पोषण पदार्थों से भरपूर एक उत्तम जैव उर्वरक है. केंचुआ आदि कीड़ों के द्वारा वनस्पतियों और भोजन के कचरे आदि को अलग करके बनाई जाती है. वर्मी कम्पोस्ट यानि केंचुआ खाद ऐसी होती है, कि इसमें से किसी भी तरह की कोई महक या बदबू नहीं आती है. इसके प्रयोग से मक्खी और मच्छर नहीं बढ़ते है और कोई प्रदूषित भी नहीं होता है. बाजार में केंचुआ खाद सौ से दो सौ रुपये किलो प्रति मिलती है. लेकिन आप इसे अपने घर पर भी बना सकते हैं.

केंचुआ खाद कैसे बनाएं. किन तरीकों से बनाएं और इसके क्या फायदे हैं, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के तहत कृषि विज्ञान केंद्र, भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) ने जैविक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वर्मीकम्पोस्ट उत्पादन पर एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया. इस प्रशिक्षण में कुल 28 अभ्यर्थियों ने भाग लिया.

प्रशिक्षण की प्रमुख बातें यह कार्यक्रम संयुक्त निदेशक प्रसार शिक्षा डॉक्टर रूपसी तिवारी के निर्देशन में किया गया. इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष डॉक्टर एचआर. मीणा ने केंचुआ खाद बनाने की तकनीक और इससे जुड़े संभावित व्यावसायिक अवसरों की विस्तार से जानकारी दी. प्रधान वैज्ञानिक डॉक्टर सीएस. राघव ने जैविक खेती में मृदा पोषण प्रबंधन में वर्मीकम्पोस्ट की जानकारी दी, जबकि फार्म प्रबंधक डॉक्टर अमित पिप्पल ने एकीकृत कृषि प्रणाली में अपशिष्ट प्रबंधन के महत्व को समझाया. उन्होंने प्रशिक्षुओं को खेतों में उत्पन्न होने वाले कचरे से जैविक खाद बनाने की विधियों से अवगत कराया और उन्हें कृषि विज्ञान केंद्र के फार्म का भ्रमण कराया.

प्रयोगात्मक प्रशिक्षण और व्यावहारिक अनुभव तकनीकी अधिकारी वाणी यादव ने वर्मीकम्पोस्ट निर्माण के लिए आवश्यक कच्चे माल, विभिन्न विधियों और प्रभावी जैव-अजैविक कारकों पर विस्तृत जानकारी दी. प्रशिक्षुओं को बेड निर्माण, खाद पलटने, छानने, पैकिंग और भंडारण की समस्त प्रक्रियाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया साथ ही, वर्मीवाश की गुणवत्ता और उसके उपयोग पर भी विशेष सत्र आयोजित किया गया.

जैविक विधियों से उगाए सब्जियां बागवानी विशेषज्ञ डॉक्टर रंजीत सिंह ने जैविक खेती के लाभों को बताते हुए कहा, कि कैसे जैविक विधियों से उगाई गई सब्जियों और फलों का स्वाद और पोषण स्तर बेहतर होता है. उन्होंने रासायनिक खेती की तुलना में जैविक खेती के स्वास्थ्य और पर्यावरणीय लाभों पर जोर दिया.

28 छात्रों ने लिया भाग इस प्रशिक्षण में भाग लेने वाले सभी 28 अभ्यर्थियों ने सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा किया और जैविक खेती में एक नया कदम बढ़ाने के लिए तैयार हुए. इस कार्यक्रम से न केवल जैविक कृषि को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि किसानों और युवाओं को वर्मीकम्पोस्ट उत्पादन के व्यावसायिक अवसरों से भी जोड़ा जा सकेगा.

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