नई दिल्ली. लुधियाना स्थित गुरु अंगद देव वेटनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी ने हाल ही में जारी इंडियन इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (IIRF) रैंकिंग 2026 में भारत की स्टेट वेटनरी यूनिवर्सिटीज़ में लगातार दूसरे साल दूसरी रैंक हासिल करके एक अहम उपलब्धि हासिल की है. यूनिवर्सिटी को वेटनरी और फिशरीज के क्षेत्र में सभी संस्थानों के बीच राष्ट्रीय स्तर पर पांचवां स्थान भी मिला है, जिससे वेटनरी और एनिमल साइंसेज की शिक्षा, रिसर्च और विस्तार (एक्सटेंशन) के क्षेत्र में भारत के प्रमुख संस्थानों में से एक के रूप में इसकी स्थिति और मजबूत हुई है.
यह उपलब्धि वेटनरी शिक्षा, पशु स्वास्थ्य, पशुधन उत्पादन, डेयरी, फिशरीज और संबंधित विज्ञानों को आगे बढ़ाने में उत्कृष्टता के केंद्र के रूप में वेट यूनिवर्सिटी की बढ़ती पहचान को दर्शाती है. यूनिवर्सिटी ने बेहतरीन शिक्षण, अत्याधुनिक रिसर्च, तकनीक के प्रसार और किसानों पर केंद्रित विस्तार कार्यक्रमों के माध्यम से पशुधन क्षेत्र को मजबूत करने में लगातार योगदान दिया है.
पशुधन क्षेत्र को आगे ले जा रही है वैट यूनिवर्सिटी
इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए, वाइस-चांसलर डॉ. जे.पी.एस. गिल ने फैकल्टी, वैज्ञानिकों, छात्रों, कर्मचारियों, पूर्व छात्रों और सभी हितधारकों को इस कामयाबी में उनके योगदान के लिए बधाई दी.
उन्होंने कहा कि यह रैंकिंग यूनिवर्सिटी की शैक्षणिक उत्कृष्टता की निरंतर खोज और पशुधन क्षेत्र को आगे बढ़ाने की उसकी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है.
इस पहचान को सामूहिक जीत बताते हुए डॉ. गिल ने कहा कि पूरे समुदाय के समर्पण और कड़ी मेहनत ने यूनिवर्सिटी की शैक्षणिक, रिसर्च और विस्तार क्षमताओं को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है.
डॉ. गिल ने इस बात पर जोर दिया कि वेट यूनिवर्सिटी इनोवेटिव रिसर्च, शैक्षणिक और प्रयोगशाला बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण और उद्योग के लिए उपयोगी शैक्षिक कार्यक्रमों के विकास के माध्यम से वेटनरी और एनिमल साइंसेज को आगे बढ़ाने में सबसे आगे रही है.
उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक इनोवेशन को किसानों और पशुधन उद्यमियों के लिए व्यावहारिक समाधानों में बदलने पर यूनिवर्सिटी के फोकस ने इसे राष्ट्रीय पहचान दिलाई है.
उन्होंने आगे कहा कि यह रैंकिंग शिक्षण, रिसर्च और आउटरीच (जन-संपर्क) के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छूने के लिए प्रेरणा का काम करती है.
उन्होंने इनोवेशन को बढ़ावा देने, कुशल पेशेवर तैयार करने और ऐसी तकनीकें विकसित करने के लिए यूनिवर्सिटी की प्रतिबद्धता को दोहराया जो टिकाऊ पशुधन उत्पादन, पशु स्वास्थ्य और ग्रामीण समृद्धि में योगदान देती हैं.
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत में उच्च शिक्षा संस्थानों (जैसे विश्वविद्यालयों, इंजीनियरिंग कॉलेजों और मैनेजमेंट स्कूलों) की गुणवत्ता, प्लेसमेंट और बुनियादी ढांचे के आधार पर उन्हें रैंक प्रदान की जाती है और ये इंडियन इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (IIRF) द्वारा किया जाता है.











