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Animal Husbandry: इजाद हुई देश की पहली इक्विन सीमेन लैब, पढ़ें फायदे

नई दिल्ली. अगर आप घोड़ा पाल रहे हैं तो आप चाहते भी होंगे कि आपकी घोड़ी अच्छी नस्ल के बच्चे पैदा करे, जो देखने में बहुत खुबसूरत होने के साथ ही फुर्तीले और मजबूत हों. अब समस्या ये है प्रजनन के लिए हर जगह अच्छे नर घोड़े का मिलना बहुत ही मुश्किल है. लगतार आ रही इस समस्या को दूर करने के लिए घोड़ा प्रजनक कृत्रिम गर्भाधान तकनीक का इस्तेमान करने पर जोर दे रहे हैं. इस काम के लिए स्टैलियन स्पर्म का खूब इस्तेमाल किया जा रहा है. ऐसी कंडीशन में घोड़ियों को स्टैलियन (नर घोड़ा जो प्रजनन के लिए प्रयोग किया जाता है) के शुक्राणु से गर्भाधान कराकर अच्छी नस्ल के घोड़े के बच्चे प्राप्त किए जा रहे हैं. हालांकि इसमें एक ये भी समस्या सामने आ रही है कि स्टैलियन शुक्राणु बड़ी आसानी से उपलब्ध भी नहीं होते. घोड़ा प्रजनकों की इस समस्या को दूर करने के लिए पुण में इक्विन ब्रीडर ने देश की पहली इक्विन सीमेन लैब यानी अश्व वीर्य प्रयोगशाला को स्थापित किया है.

देश की पहली अश्व वीर्य प्रयोगशाला की स्थापना
आपकी घोड़ी अच्छी नस्ल के बच्चे पैदा करे जो देखने में बहुत खुबसूरत होने के साथ ही फुर्तीले और मजबूत हो, तो इसके लिए अच्छी नस्ल का घोड़ा होना बेहद जरूरी है. घोड़ा प्रजनकों के सामने अच्छी नस्ल के स्टैलियन शुक्राणु नहीं मिलते. लगातार आ रही इस समस्या को दूर करने के लिए पुणे के रंजीत खेर ने भारत की पहली अश्व वीर्य प्रयोगशाला की स्थापना की. यह लैब पूरे देश में स्टैलियन-फ्रोजन वीर्य की आपूर्ति करती है. ये लैब आईसीएआर-एनआरसीई के सहयोग से स्थापित की है.

आईसीएआर-एनआरसीई से खरीदी तकनीक
अश्व वीर्य प्रयोगशाला को स्थापित करने से रंजीत खरे और उनकी टीम ने इस बारे में तकनीकी का प्रशिक्षण हासिल किया. खेर और उनकी तकनीकी टीम ने स्टैलियन वीर्य संग्रह के साथ-साथ क्रायोप्रिजर्वेशन तकनीकी का भी प्रशिक्षण लिया. इसके बाद उन्होंने 2021 में आईसीएआर-राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र, बीकानेर से दो प्रौद्योगिकियां खरीदीं, इसमें “स्वदेशी घोड़ों में वीर्य संग्रह और क्रायोप्रिजर्वेशन” और “स्टैलियन से वीर्य संग्रह के लिए अनुकूलित एवी”.

इन वैज्ञानिकों ने इजाद की ये तकनीकी
इस तकनीक को आईसीएआर-राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र, बीकानेर के डॉ. टीआर तल्लूरी, डॉ. यशपाल और डॉ. आरए लेघा ने विकसित किया था. आईसीएआर-एनआरसीई से इस तकनीकी को खरीदने के बाद रंजीत खरे ने वहीं के वैज्ञानिकों की मदद से महाराष्ट्र के पुणे में घोड़ों के लिए वीर्य संग्रह और क्रायोप्रिजर्वेशन के लिए आधुनिक सुविधाओं से लैस एक लैब का निर्माण कराया. खरे की टीम ने ने देश भर के व्यक्तिगत घोड़ा प्रजनकों से स्टैलियन का वीर्य एकत्र किया. जमे हुए वीर्य से घोड़ियों का गर्भाधान किया गया और 1000 से अधिक स्टैलियन शुक्राणुओं को सफलतापूर्वक संरक्षित किया गया. फ्रोजन स्पर्म तकनीक की मदद से बच्चे का सफलता पूर्वक जन्म कराया.

कम समय में सफल उद्यमी बने रंजीत खरे
यही वजह है कि बेहद कम वक्त में रंजीत खेर ने खुद को फ्रोजन सीमन डोज बेचने वाले उद्यमी के रूप में स्थापित कर दिया. रंजीत खेर ने भारत की पहली निजी अश्व वीर्य प्रयोगशाला की स्थापना कर देश भर में नर प्रजनक अश्व के जमे हुए वीर्य के एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता बन गए हैं. बहुत कम समय में, रंजीत खरे की कामयाबी युवा उद्यमियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है. आज के उनके पास बहुत से युवा इस तकनीकी का प्रशिक्षण हासिल करने के लिए पहुंच रहे हैं.

क्यों जरूरी है अच्छी नस्ल के घोड़े
घोड़े के वीर्य की आपूर्ति पूरे भारत में की जाती है. पोलो जैसे खेलों में मजबूत और फुर्तीले घोड़ों का उपयोग किया जाता है. कुछ खुद के शौक के लिए भी अच्छे और खूबसूरत घोड़े चाहते हैं. सभी घोड़ा प्रजनक चाहते हैं कि उनके घोड़े और बच्चे मजबूत और आकर्षक पैदा हों.

Written by
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