नई दिल्ली. जानवरों को कई ऐसी बीमारियां होती हैं, जिनकी वजह से उनका उत्पादन तो घटता ही है. साथ ही वह गंभीर रूप से बीमार पड़ने की वजह से मर भी जाते हैं. जानवरों में बेबेसियोसिस बीमारी बेबेसिया नाम के कीड़े की वजह से होती है. यह उनके खून की लाल कोशिकाओं पर हमला करते हैं और उन्हें नष्ट कर देते हैं. इससे पशुओं में एनीमिया और गंभीर लक्षण हो सकते हैं. जबकि इससे पशुओं की से मौत भी हो जाती है. आपको बता दें कि चल रहे मार्च के महीने में देश के कई राज्यों के शहरों में इस बीमारी के फैलने का खतरा बताया जा रहा है.
एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि अगर पशुपालक जानवरों को बीमारियों से बचा लें तो उनका मुनाफा बढ़ जाता है. अगर बीमारियों से नहीं बचाया जा सका तो इससे डेयरी फार्मिंग के काम में नुकसान उठाना पड़ जाता है. इसलिए जानवरों को बीमारियों से बचाना बेहद ही जरूरी होता है. आइए इस आर्टिकल में जानते हैं कि बेबेसियोसिस बीमारी के लक्षण क्या हैं और उसकी कैसे रोकथाम की जा सकती है.
क्या हैं इस बीमारी के लक्षण और खतरे
पहले बात कर ली जाए बेबेसियोसिस बीमारी के लक्षण की तो इसमें जानवर सुस्ती और कमजोरी महसूस करते हैं, और उनमें बुखार भी हो जाता है. कई बार भूख नहीं लगती है, इससे जानवर और ज्यादा कमजोर हो जाते हैं. एनीमिया, पीलिया और वजन कम होना भी इसी संक्रमण के लक्षण हैं. एक्सपर्ट कहते हैं कि इस बीमारी का इलाज संभव है लेकिन इसके लिए जल्दी से पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए. अगर इसमें देर हो गई तो फिर मामला गंभीर हो जाता है. हो सकता है कि पशु का इलाज न हो पाए. वहीं जानवरों को टिक से दूर रखना चाहिए और टिक से होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए जरूरी दवा देनी चाहिए. बता दें कि सांड में इस बीमारी की वजह से बुखार होता है और फिर उनकी प्रजनन क्षमता भी इस प्रभावित होती है.
सबसे ज्यादा खतरा यूपी में
इस महीने यह बीमारी बिहार के खगड़िया और मधुबनी में अपने पैर जमा सकती है. इसलिए पशुओं को बचाना बेहद जरूरी है. वहीं हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर शहर में भी इस बीमारी के फैलने की आशंका जाहिर की गई है और इस जिले को हाई रिस्क जोन पर रखा गया है. जबकि जम्मू कश्मीर के कुलगाम में भी पशुओं में यह बीमारी हो सकती है. उत्तर प्रदेश में इस बीमारी का ज्यादा खतरा है. यहां आगरा, बागपत, बहराइच, बलिया, बरेली, बिजनौर, चित्रकूट, देवरिया, एटा, फतेहपुर, गोरखपुर, हरदोई, जालौन, कौशांबी, कुशीनगर, मैनपुरी, मथुरा, मेरठ, मिर्जापुर, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, सोनभद्र, हापुड़ और शामली जिले को हाई रिस्क जोन पर रखा गया है. वहीं राजस्थान में हनुमानगढ़ जैसलमेर माधोपुर में भी यह बीमारी फैल सकती है.












