नई दिल्ली. मध्यप्रदेश सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल ने मंगलवार को मंत्रालय स्थित अपने कार्यालय में मध्य प्रदेश राज्य पशुकल्याण सलाहकार मंडल के सदस्यों के साथ बैठक की. इस दौरान राज्य मंत्री पटेल ने मंडल द्वारा किए जा रहे कार्यों की समीक्षा की. साथ ही सभी जिलों में जिला स्तर पर समितियों का गठन कर सक्रिय रूप से कार्य करने के निर्देश दिए. उन्होंने विभाग द्वारा संचालित डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना एवं स्वावलंबी गोशाला निवास नीति-2025 के क्रियान्वयन पर भी विस्तार से चर्चा की.
राज्यमंत्री लखन पटेल ने कहा कि योजनाओं के प्रभावी संचालन को तय किया जाए. गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने तथा पशुपालकों को अधिकाधिक लाभ पहुंचाने के संबंध में अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिया. कहा कि जो भी संभव हो, वो काम किए जाएं. बैठक में पशुपालन एवं डेयरी विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव, संचालक पशुपालन एवं डेयरी विभाग डॉ. पीएस पटेल सहित मध्य प्रदेश राज्य पशु कल्याण सलाहकार मंडल के सदस्य उपस्थित रहे.
प्रदेश का कुल दुग्ध उत्पादन 22.60 मिलियन मीट्रिक टन
प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने जानकारी दी कि 20वीं पशु संगणना के अनुसार प्रदेश में कुल 187.52 लाख गौवंशीय पशु हैं, जो देश में तीसरे स्थान पर है.
प्रदेश में देश के कुल गौवंश का 9.73 प्रतिशत हिस्सा है. इसी प्रकार प्रदेश में 103.07 लाख भैंसवंशीय पशु हैं, जो देश में चौथे स्थान पर है तथा देश के कुल भैंसवंश का 9.38 प्रतिशत मध्यप्रदेश में है.
प्रदेश का कुल दुग्ध उत्पादन 22.60 मिलियन मीट्रिक टन है, जिसमें प्रदेश का देश में तीसरा स्थान है.
प्रदेश में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन दुग्ध उपलब्धता 707 ग्राम है, जो कि राष्ट्रीय औसत 485 ग्राम से अधिक है.
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम अंतर्गत प्रदेश के गौ-भैंसवंशीय पशुओं में एफएमडी (खुरपका-मुंहपका) टीकाकरण किया गया है.
प्रदेश में 3 लाख 83 हजार पशुपालकों को किसान क्रेडिट कार्ड प्रदान किए गए हैं. जिसका फायदा उन्हें पशुपालन के काम में मिल रहा है.
क्या है डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना
मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना में नवीन घटक के रूप में राज्य सरकार ने 25 अप्रैल 2025 को डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना को मंजूरी दी थी.
योजना के तहत 25 दुधारु पशु की प्रति इकाई राशि 36 लाख से 42 लाख रुपये तक की इकाई लागत है.
योजना में अधिकतम 8 इकाइयों की स्थापना एक पशुपालक द्वारा की जा सकती है. एक इकाई में एक ही नस्ल के गौ-वंश एवं भैसवंशीय पशु रहेंगे.
पशुपालक के पास प्रत्येक इकाई के लिये न्यूनतम 3.50 एकड़ कृषि भूमि होना जरूरी है. भूमि के लिये परिवार के सामूहिक खाते भी सम्मिलित हैं. इनके लिये अन्य सदस्यों की सहमति भी जरूरी होगी.
निष्कर्ष
राज्य सरकार पशुपालन के जरिए राज्य में दूध उत्पादन को बढ़ावा देने का काम कर रही है. ताकि राज्य दूध उत्पादन के मामले में देश में नंबर वन हो जाए. अभी राज्य में कुल 9 फीसद ही देश का दूध उत्पादन होता है. इसे 20 फीसद करने की योजना है.










