Home मछली पालन Fish Farming Tips: जनवरी में तालाब के पानी का स्तर 5-6 फीट रखें, हर दिन 10 से 20 फीसद पानी बदलें
मछली पालन

Fish Farming Tips: जनवरी में तालाब के पानी का स्तर 5-6 फीट रखें, हर दिन 10 से 20 फीसद पानी बदलें

तालाब में खाद का अच्छे उपयोग के लिए लगभग एक सप्ताह के पहले 250 से 300 ग्राम प्रति हेक्टेयर बिना बुझा चूना डालने की सलाह एक्सपर्ट देते हैं.
तालाब में मछली निकालते मछली पालक

नई दिल्ली. ठंड का महीना मछली के लिए बेहद ही खतरनाक होता है. जनवरी का महीना चल रहा है और इस दौरान कड़ाके की ठंड पड़ती है. ऐसे में इस ठंड से मछलियों को बचाना बेहद ही जरूरी होता है. जिससे मछली की ग्रोथ बढ़ती है और मछली पालन में मुनाफा बढ़ जाता है. अगर आप मछली पालन में लापरवाही करते हैं तो ठंड के दौरान मछलियों में मृत्युदर भी दिखाई दे सकती है और मछलियों की मौत होने से फिशरीज के इस बिजनेस में बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. इसलिए जरूरी है कि मछली पालन में कुछ अहम बातों का ध्यान रखें.

बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संधान विभाग की तरफ से जनवरी के महीने में मछली पालकों को किन बातों पर ध्यान देना चाहिए. इसकी बारे में अहम जानकारी दी गई. ताकि मछली पालकों को बड़ा और आर्थिक नुकसान न झेलना पड़े. लाइव स्टॉक एनिमल न्यूज आपको इसी के बारे में यहां जानकारी देगा.

क्या करना है जानें यहां
ठंड के मौसम में कार्प मछली वाले तालाब में न्यूनतम पानी का स्तर 5-6 फीट और पंगेशियस मछली वाले तालाब के न्यूनतम पानी का स्तर 8-10 फीट बनाये रखें.

पंगेशियस मछली के तालाबों में प्रतिदिन 10 से 20 प्रतिशत तक पानी का बदलाव ट्यूबवेल के पानी से करें.

ठंड के मौसम में मछलियों को पॉरासाईटिक संक्रमण एवं फफूँद से होने वाली संक्रमण से बचाव के लिए 40-50 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से नमक का घोल बनाकर छिड़काव करें. या वीकेसी, 80 फीसद 1 लीटर प्रति एकड़ की दर से घोलकर छिड़काव करें.

प्रजनक मछली (ब्रूड) को आरगुलस के संक्रमण से बचाने के लिए जरूरत के मुताबिक 80-100 एमएल प्रति एकड़ की दर से बुटौक्स या क्लिनर या टिनिक्स का छिड़काव करें.

मछली बीज उत्पादक कॉमन कार्प का ब्रीडिंग जनवरी के आखिरी सप्ताह या फरवरी माह से शुरू कराने के लिए 15-20 दिन पहले नर और मादा कॉमन कार्प के प्रजनक मछली (ब्रूड) को दो अलग-अलग तालाबों में संचयन कर लें.

ठंड के मौसम में प्राकृतिक आहार की उपलब्धता तालाब में बनाने के लिए प्रति एकड़ की दर से प्रत्येक 10 से 15 दिनों के अंतराल पर 15 किलो ग्राम चूना छिड़के.

वहीं 15 किलोग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट, 5 किलोग्राम मिनरल मिक्चर एवं 50 किलोग्राम सरसों या राई की खल्ली (पानी में फुला कर) घोल कर तालाब में छिड़काव करना चाहिए.

निष्कर्ष
औसत तापमान 15 डिग्री सेल्सियस से कम होने पर यदि मछली पूरक आहार ग्रहण नहीं करती हो तो पूरक आहार का प्रयोग बंद कर दें. यदि इन बातों का ध्यान रखेंगे तो फिर मछली पालन में फायदा होगा.

Written by
Livestock Animal News Team

Livestock Animal News is India’s premier livestock awareness portal dedicated to reliable and timely information.Every news article is thoroughly verified and curated by highly experienced authors and industry experts.

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

Fisheries,Fish Farming, Fish Farming Centre, CMFRI
मछली पालन

Fisheries: हैल्दी मछलियों की आंखे और स्किन होती हैं चमकदार

नई दिल्ली. मछली पालन के काम में अगर मछली बीमार पड़ गई...

तालाब में खाद का अच्छे उपयोग के लिए लगभग एक सप्ताह के पहले 250 से 300 ग्राम प्रति हेक्टेयर बिना बुझा चूना डालने की सलाह एक्सपर्ट देते हैं.
मछली पालन

Fish Farming Tips: जनवरी में तालाब की गहराई 6 से 8 फीट रखें, मछलियों को खिलाएं कम फीड

नई दिल्ली. ठंड के मौसम में मछलियों के लिए तालाब का जल...

During the fishing ban period, financial assistance is provided by the Government towards livelihood and nutritional support for socio-economically backward, active traditional fishers.
मछली पालन

Fish Farming: भागलपुर में फिशिंग का शौक रखने वालों के लिए फिशरीज पार्क की हुई शुरुआत

नई दिल्ली. बिहार के भागलपुर जिले में अब फिशिंग का शौक रखने...