नई दिल्ली. अक्सर पशुपालक भाई पशुओं के दूध उत्पादन के दौरान पतले दूध से परेशान रहते हैं. क्योंकि पतले दूध का रेट उन्हें सही नहीं मिलता है. वहीं पतले दूध का नुकसान ये भी है कि उसमें मौजूद पोषक तत्व प्रोटीन, फैट, विटामिन और खनिज कम हो जाते हैं. इस वजह से ना तो आम ग्राहक वहीं बड़ी डेयरी कंपनियां भी ऐसे दूध का दाम कम लगती हैं इसके चलते पशुपालकों को नुकसान का सामना करना पड़ जाता है. एक्सपर्ट कहते हैं कि पशु यदि दूध का उत्पादन पतला कर रहा है तो इसके पीछे भी वजह है आमतौर पर चार मुख्य कारण पशु का दूध पतला होने के पीछे गिनाए जाते हैं.
बिहार सरकार के डेयरी मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग (Dairy Fisheries and Animal Resources Department) के एक्सपर्ट कहते हैं कि पशु का दूध अगर पतला है तो डेयरी फार्मिंग के बिजनेस में उन्हें नुकसान होने लगता है. इसलिए ये जानना बेहद ही जरूरी है इसके पीछे क्या वजह है. तभी पशुपालक भाई दूध पतला होने से और इससे होने वाले नुकसान से खुद को बचा पाएंगे.
ज्यादा पानी पीने से
एक्सपर्ट कहते हैं कि कई बार पशु ज्यादा मात्रा में पानी पी लेते हैं. असल में किसान भाई सोचते हैं कि उन्हें पशुओं को पानी की कमी नहीं होने देना चाहिए. इस वजह से उन्हें ज्यादा पानी पिला देते हैं. जब पशु अचानक ज्यादा पानी पी लेता है तो दूध पतला हो जाता है.
मिनरल की कमी
एक्सपर्ट ये भी बताते हैं कि पोषण की कमी की वजह से भी पशु का दूध पतला हो जाता है. इसलिए उन्हें सही दाना, हरी घास, मिनरल वगैरह देना चाहिए. यदि यह चीज उन्हें नहीं मिलती है तो दूध का फैट बेहद ही घट जाता है.
बुखार आने से
वहीं पशु को जब बुखार होता है तो इस वजह से भी दूध का उत्पादन पतला होता है. बुखार संक्रमण या कमजोरी के दौरान दूध पानी जैसा दिखने लगता है. जिसका पशुपालकों को नुकसान होता है.
थन की सूजन से
कई बार थन की सूजन जिसे मासटाइटिस भी कहा जाता है. इसकी वजह से भी दूध का उत्पादन पतला होता है. अगर थन में सूजन या हल्का संक्रमण हो तो दूध पतला और इतना ही नहीं फीका भी हो जाता है.
निष्कर्ष
पशुओं के दूध पतला होने की वजहों को पढ़कर अपने अंदाजा लगा लिया होगा कि इसे पतला होने से रोकने के लिए क्या उपाय करना है. यदि आप इसे करने में सफल रहते हैं तो दूध पतला होने से रोक पाएंगे और खुद को नुकसान से भी.












