Home डेयरी Milk Production: भारत के नंबर वन दूध उत्पादक देश बनने के पीछे क्या है वजह, जानें यहां
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Milk Production: भारत के नंबर वन दूध उत्पादक देश बनने के पीछे क्या है वजह, जानें यहां

कार्यक्रम में लोगों को संबोधित करते NDDB चेयरमैन डॉ. मीनेश सी.

नई दिल्ली. भारत दुनिया में नंबर वन दूध उत्पादक देश है. हर साल देश की स्थिति में और ज्यादा सुधार भी हो रहा है. ये सेक्टर लाखों लोगों को रोजगार भी दे रहा है. राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) चेयरमैन डॉ. मीनेश सी. शाह ने शिव नादर यूनिवर्सिटी द्वारा इंडिया हैबिटेट सेंटर, नई दिल्ली में आयोजित ‘को-ऑपरेटिव्स, डेवलपमेंट और हायर एजुकेशन’ पर कॉन्फ्रेंस के क्लोजिंग सेरेमनी में कहा कि कैसे डेयरी सेक्टर में कोऑपरेशन और कोऑपरेटिव मूवमेंट ने, दूरदर्शी नेताओं और कुशल प्रोफेशनल्स के नेतृत्व में, भारत को दूध की कमी वाले देश से दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक बना दिया है.

उन्होंने कहा कि इस चल रहे सफर ने न केवल ग्रामीण परिवारों को रोजी-रोटी और उपभोक्ताओं को न्यूट्रिशन दिया है, बल्कि सोशल और महिला सशक्तिकरण भी सुनिश्चित किया है, जिससे राष्ट्र निर्माण हो रहा है. इससे बहुत से लोगों को फायदा हो रहा है और भविष्य में भी होगा.

डॉ. शाह ने कोऑपरेटिव्स मंत्रालय के ‘सहकार से समृद्धि’ विजन के तहत डेयरी सेक्टर में हाल के डेवलपमेंट और इनोवेशन का भी जिक्र किया.

डेयरी कोऑपरेटिव्स को बढ़ाना, ऑर्गेनिक्स, बीज और एक्सपोर्ट के लिए नई मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव्स बनाना और खाद मैनेजमेंट, इनपुट सर्विसेज वगैरह के लिए दूसरी मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव्स बनाना.

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि डेयरी कोऑपरेटिव्स की सफलता कई सबक देती है जिन्हें दूसरी एग्रीकल्चरल चीजों में भी लागू किया जा सकता है. एक जैसे विजन, डेडिकेटेड काम और कोऑपरेशन से, इस सफलता को दोहराया जा सकता है.

उन्होंने जानकार और भविष्य के लिए तैयार ग्रामीण समुदायों को बनाने के लिए कोऑपरेटिव और हायर एजुकेशन के बीच मजबूत संबंधों की जरूरत पर ज़ोर दिया.

डॉ. शाह ने फिर से कहा कि भारत का कोऑपरेटिव ढांचा ग्रामीण विकास के लिए एक मज़बूत कैटलिस्ट बना हुआ है.

NDDB किसानों के लिए बेहतर आजीविका और ज्यादा टिकाऊ भविष्य पक्का करने के लिए इसे और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है.

क्लोजिंग सेरेमनी के दौरान उनके साथ NCUI के चीफ एग्जीक्यूटिव डॉ. सुधीर महाजन और शिव नादर यूनिवर्सिटी के जाने-माने प्रोफेसर प्रोफेसर डैरिल रीड भी शामिल हुए.

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