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Milk Production: मध्य प्रदेश में बनेगा ब्रीडिंग एसोसिएशन, दुधारू पशुओं की नस्ल में होगा सुधार

मिशन का उद्देश्य किसानों की इनकम दोगुनी करना, कृषि को जलवायु के अनुकूल बनाना, धारणीय और जैविक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना है.
प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली. मध्य प्रदेश की सरकार राज्य में उत्पादित हो रहे 9 फीसद दूध को 20 फीसद तक ले जाना चाहती है. सरकार इसके लिए कई काम कर रही है. पशुपालन को बढ़ावा देने का काम किया जा रहा है. साथ ही ऐसे काम किए जा रहे हैं, जिससे प्र​ति पशु दूध उत्पादन क्षमता बेहतर हो सके. इसी कड़ी में सरकार की तरफ से राज्य में पशुओं की नस्ल सुधारने का भी काम किया जाएगा. क्योंकि न सिर्फ देश में बल्कि मध्य प्रदेश में भी जो दुधारू पशु हैं, उनकी दूध देने की क्षमता कम है. जबकि इसको बढ़ाना बेहद ही जरूरी है.

यही वजह है कि मध्य प्रदेश सरकार ने पशुपालन विभाग ने पशुओं की नस्ल सुधारने की दिशा में एक और कदम उठाते हुए मप्र ब्रीडिंग एसोसिएशन गठित करने का फैसला किया है. खास बात ये है कि ब्रीडिंग एसोसिएशन के सदस्य पशुपालक किसान और सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारी ही रहेंगे. ये सदस्य आपस में मिलकर एसोसिएशन की कार्यकारिणी तय करेंगे. हालांकि एसोसिएशन के लिए दायित्व शासन स्तर से तय किए जाएंगे. यह एसोसिएशन स्वशासी संस्था की तरह काम करेगी.

46 साल से चल रहा कृत्रिम गर्भाधान
गौरतलब है कि मप्र में पशु नस्ल सुधारने के लिए 1978 से कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम चल रहा है.

करीब 46 साल बाद भी दुधारू पशुओं की नस्ल सुधार में कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखा है.

जिसकी प्रमुख वजह कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम की खानापूर्ति मात्र होना बताई गई. इससे कोई खास फायदा नहीं हुआ है.

बताते चलें कि हाल ही में मप्र सरकार ने वर्ष 2026 को कृषि वर्ष के रूप में मनाने का फैसला किया है. जिसमें 17 विभाग मिलकर किसानों के हित में काम करेंगे.

वहीं किसानों से सीधे जुड़ने वाले 5 विभाग पशुपालन, राजस्व, कृषि, सहकारिता और ग्रामीण विकास की भूमिका ज्यादा रहेगी.

पशुपालन विभाग का लक्ष्य दुध का उत्पादन बढ़ाना है. साथ ही किसानों को बाजार उपलब्ध कराना है. विभाग अपने स्तर पर इसके प्रयास कर रहा है.

इस बीच विभाग ने मप्र ब्रीडिंग एसोसिएशन गठन करने का भी फैसला किया है. दुधारू पशुओं की नस्ल सुधारना और दूध एसोसिएशन का प्रमुख काम दुधारू पशुओं की नस्ल सुधार में सहयोग करना है.

साथ ही किसानों को दूध के लिए बाजार, आपूर्ति और ग्राहक मुहैया कराना है. साथ ही पशु आहार की उपलब्धता भी सुनिश्चित करना है. इसमें विभाग भी सहयोग करेगा.

निष्कर्ष
सरकार के इस प्रयास से जहां पशु की नस्ल में सुधार होगा तो वहीं दूध उत्पादन में भी बढ़ोत्तरी होगी. इसका फायदा पशुओं को पालने वाले पशुपालकों को भी होगा. उनकी इनकम भी इससे बढ़ेगी.

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