नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश सरकार राज्य में झींगा पालन को भी बढ़ावा देने का काम करेगी और ऐसे किसानों के सहयोग से करेगी. अब सरकार ने झींगा पालन को बढ़ावा देने की योजना बनाई है. मत्स्य विभाग किसानों को प्रशिक्षण देकर झींगा पालन के लिए तैयार करेगा. उनको आर्थिक और तकनीकी मदद भी करने की भी योजना तैयार की जा रही है. मत्स्य विभाग ऐसे किसानों की लिस्ट तैयार कर रहा है जो अपने स्तर से पहले से झींगा पालन कर रहे हैं. वहीं, ऐसी जमीनें भी चिह्नित की जा रही हैं जो खारी हैं और ऊसर पड़ी हुई हैं. ऐसी जमीन झींगा पालन के लिए उपयोगी हो सकती है.
एक्सपर्ट का कहना है कि सामान्य पारंपरिक खेती से ज्यादा मुनाफा झींगा पालन में है. साथ ही ऐसी जमीनें जहां खेती नहीं हो पाती, उसका भी उपयोग करना जरूरी है. सरकार वन ट्रिलियन इकॉनमी की बात कर रही है. वह सिर्फ उद्योगों से संभव नहीं है. हर क्षेत्र में नये प्रयोग करने होंगे.
500 रुपए किलो तक बिकता है झींगा
अफसरों ने बताया कि कई किसान बहुत अच्छे तरीके से झींगा पालन कर रहे हैं. काफी मुनाफा भी कमा रहे हैं.
ऐसे किसानों की लिस्ट तैयार की जा रही है. उसके बाद ऐसे किसानों को प्रेरित किया जाएगा जो नए प्रयोग करना चाहते हैं. हम उनका प्रशिक्षण करवाएंगे.
विभाग की विभिन्न योजनाओं को जोड़ने का काम सरकार की ओर से किया जा रहा है. ताकि इसका फायदा उन्हें मिल सके.
गौरतलब है कि रायबरेली के सुजीत कुमार अमेरिका में सॉफ्टवेयर कंपनी में असोसिएट डायरेक्टर टेक्नॉलजी के पद पर काम कर रहे थे.
उन्होंने 2021 में नौकरी छोड़कर खेती के साथ मछली पालन शुरू कर दिया. इसी के साथ उन्होने रायबरेली में 2021 में झींगा पालन शुरू किया. यहां जमीन खारी थी.
अब वह 10 एकड़ में झीगा पालन कर रहे है, जिसमें करीब 30 टन झीगा एक बार में तैयार हो जाती है जो थोक मार्केट में 450-500 रुपये/किलो तक बिक जाता है.
मथुरा के किसान सतीश चंद्र तोमर एसी मैकेनिक का काम छोड़ कर कई किसानों के साथ मिलकर कृषक उत्पादक संगठन (FPO) भी बनाया है.
उनके साथ कुछ और किसान भी झीगा पालन कर रहे हैं. सतीश बताते है कि 100 दिन में झीगा की फसल तैयार हो जाती है.
प्रति एकड़ तीन टन के हिसाब से पाच एकड़ में 15 टन झींगा का उत्पादन हो जाता है. दिल्ली की गाजीपुर मंडी में अच्छी कीमत पर झींगा बिक जाता है.
ऐसे किसानों की लिस्ट तैयार की जा रही है। उसके बाद ऐसे किसानों को प्रेरित किया जाएगा ने नए प्रयोग करना चाहते हैं. हम उनका प्रशिक्षण करवाएंगे.
विभाग की विभिन्न योजनाओं को जोड़ने के साथ ही यह भी प्रयास किया जा रहा है कि आने वाले बजट में झींगा पालन के लिए अलग से कुछ व्यवस्था हो जाए.
गौरतलब है कि रायबरेली के सुजीत कुमार अमेरिका में सॉफ्टवेयर कंपनी में असोसिएट डायरेक्टर टेक्नॉलजी के पद पर काम कर रहे थे.
उन्होंने 2021 में नौकरी छोड़कर खेती के साथ मछली पालन शुरू कर दिया. इसी के साथ उन्होने रायबरेली में 2021 में झींगा पालन शुरू किया. यहां जमीन खारी थी.
अब वह 10 एकड़ में झीगा पालन कर रहे है, जिसमें करीब 30 टन झीगा एक बार में तैयार हो जाती है जो थोक मार्केट में 450-500 रुपये/किलो तक बिक जाती है.
मथुरा के किसान सतीश चंद्र तोमर एसी मैकेनिक का काम छोड़ कर कई किसानों के साथ मिलकर कृषक उत्पादक संगठन (FPO) भी बनाया है.
उनके साथ कुछ और किसान भी झीगा पालन कर रहे हैं. सतीश बताते है कि 100 दिन में झीगा तैयार हो जाती है.
प्रति एकड़ तीन टन के हिसाब से पाच एकड़ में 15 टन झीगा का उत्पादन हो जाता है। दिल्ली की गाजीपुर मंडी में 400-500 रुपये/क्विंटल के हिसाब से झींगा बिक जाती है.










