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Milk Production: एमपी बनेगा मिल्क कैपिटल, इस साल 2 हजार करोड़ रुपए खर्च करेगी सरकार

सामान्य तौर पर गाय ढाई से 3 वर्ष में और भैंस तीन से चार वर्ष की आयु में प्रजनन योग्य हो जाती हैं. प्रजनन काल में पशु 21 दिनों के अंतराल के बाद गाभिन करा देना चाहिए.
प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. मध्य प्रदेश देश में दूध उत्पादन करने के मामले में उत्तर प्रदेश और राजस्थान के बाद तीसरे स्थान पर है. जबकि यहां सरकार लगातार दूध उत्पादन को बढ़ावा देने का काम कर रही है. सरकार ने कई योजनाएं भी शुरू की हैं, जिसकी मदद से 9 फीसद हो रही दूध उत्पादन को 20 फीसद तक ले जाने की योजना सरकार की है. हालिया बजट में इसके लिए प्रावधान किए गए हैं. पशुपालन एवं डेयरी विभाग के राज्य मंत्री लखन पटेल ने कहा है कि वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा विधानसभा में वर्ष 2026-27 का प्रस्तुत बजट मध्यप्रदेश को विकास की नई दिशा देने वाला है.

उन्होंने कहा कि बजट में पशुपालन और डेयरी विभाग पर विशेष ध्यान दिया गया है. जिसका फायदा आने वाले समय में राज्य के पशुपालकों और डेयरी फार्मिंग से जुड़े लोगों को मिलेगा. उन्होंने कहा कि यह बजट प्रदेश के सर्वहारा वर्ग के कल्याण के साथ मध्यप्रदेश को देश की मिल्क कैपिटल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.

सरकार दूध उत्पादन बढ़ाने के कर रही है काम
उन्होंने क00हा कि मध्य प्रदेश देश का तीसरा सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादन करने वाला प्रदेश है. जबकि सरकार दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए लगातार कार्य कर रही है.

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए मुख्यमंत्री वृंदावन योजना लागू की गई है और पशुपालन को व्यावसायिक गतिविधियों से जोड़कर प्रोत्साहित किया जा रहा है.

डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के अंतर्गत डेयरी स्थापना के लिए हितग्राहियों को अनुदान दिया जा रहा है. जिसका फायदा भी मिलने लगा है.

मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना के तहत मध्य प्रदेश स्टेट कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन का राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के साथ अनुबंध किया जा चुका है.

उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्रति व्यक्ति दुग्ध उपलब्धता 707 ग्राम है जो राष्ट्रीय औसत 485 ग्राम से लगभग 46 प्रतिशत अधिक है.

प्रदेश में संचालित लगभग 3 हजार गो-शालाओं में 4 लाख 75 हजार गौवंश का संरक्षण एवं पालन किया जा रहा है.

स्वावलंबी गौशालाओं की स्थापना के लिए नई नीति तैयार की गई है, जिसके तहत आधुनिक पद्धति से गो-शालाओं का संचालन किया जाएगा.

साथ ही तथा जैविक खाद, पंचगव्य एवं बायोगैस का उत्पादन बढ़ाया जाएगा.

पशुपालन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए रूपये 2 हजार 365 करोड़ का प्रावधान बजट में प्रस्तावित है.

इसमें गो संवर्धन एवं पशुओं का संवर्धन योजना के लिए 620 करोड़ 50 लाख रुपये एवं मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना के लिए 250 करोड़ रुपये का प्रावधान शामिल है.

निष्कर्ष
सरकार की कोशिश है कि राज्य में पशुपालन बढ़े ताकि किसानों की इनकम बढ़ाई जा सके. साथ ही दूध उत्पादन बढ़े ताकि राज्य के लोगों को इसका फायदा मिले.

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