नई दिल्ली. बैकयार्ड पोल्ट्री फार्मिंग कामर्शिलय पोल्ट्री फार्मिंग से काफी आसान है. इसे करके अच्छा मुनाफा भी कमाया जा सकता है. अच्छी बात ये है कि इस काम के लिए किसी खास तरह के फार्म की जरुरत नहीं होती. बस मुर्गियों को शिकारियों से बचाने के लिए आमतौर पर रात में बांस की टोकरियों या कार्डबोर्ड के बक्सों में रखा जाता है. जबकि कोई भी व्यक्ति कम लागत और कम व्यवस्थाओं के साथ आसानी से अपने घर के पिछवाड़े में बैकयार्ड मुर्गी पालन कर सकता है. जबकि इस काम को घर की महिलाएं घर के कामकाज के साथ-साथ कर सकती हैं.
यदि आप भी इस काम को शुरू करना चाहते हैं जान लें कि आमतौर पर 10 से 20 देसी मुर्गियों से इस व्यवसाय को शुरु किया जा सकता है. बिहार सरकार के डेयरी मत्स्य एवं पशु संसधान विभाग (Dairy Fisheries and Animal Resources Department) के एक्सपर्ट की ओर से लाइव स्टॉक एनिमल न्यूज (Livestock Animal News) को बताया गया कि काम को शुरू करने के लिए चूजों को खरीदना होगा और इन मुर्गियों के 1 दिन के चूजों की कीमत लगभग 30 से 60 रुपये तक हो सकती है.
बैकयार्ड पोल्ट्री फार्मिंग के कई फायदे हैं
एक्सपर्ट का कहना है कि देसी मुर्गियों में अंडे सेने का गुण होता है, जिसका फायदा ये होता है कि किसानों को बार-बार चूजे खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ती है.
देसी मुर्गी साल में 160 से 180 अंडे देती हैं, जिनका बाजार में मूल्य अधिक होता है. आमतौर पर एक अंडा 15 रुपए से लेकर 20 रुपए तक बिकता है.
बैकयार्ड मुर्गीपालन के फायदे की बात की जाए तो इस तरीके से मुर्गीपालन करने में कम जगह और कम पैसों की जरूरत होती है.
बैकयार्ड मुर्गी पालन घर के खराब अनाजों को बर्बाद होने से बचाता है. क्योंकि इन्हें मुर्गियों को दिया जा सकता है और वो उन्हें खाकर बेहतर उत्पादन करती हैं.
इससे हासिल होने वाला अंडा और मीट बच्चों और महिलाओं को प्रोटीन कुपोषण से मुक्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
ये रसोई के कचरे, कीड़ों जैसे अपशिष्ट पदार्थों को उच्च प्रोटीन वाले अंडे और मांस में परिवर्तित करके खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
बैकयार्ड में पाली गयी मुर्गियों की बीट से जमीन उपजाऊ बनती है. यह ग्रामीण क्षेत्रों में पिछड़े लोगों को स्वरोजगार प्रदान करता है.
सामान्य मुर्गी पालन में अधिक जगह, पैसा और तमाम तरह की व्यवस्थाओं की जरूरत होती है.
निष्कर्ष
सामान्य मुर्गी पालन में मुनाफे का खास ख्याल रखा जाता है, लेकिन बैकयार्ड पोल्ट्री फार्मिंग में ऐसी कोई समस्या नहीं है. जबकि मुनाफा इस काम में भी होता है.









