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NDDB: जानें गो-ग्रीन खाद मैनेजमेंट प्रोग्राम के लिए किसे मिला ईनाम, क्या हैं इसके फायदे

कार्यक्रम में मौजूद लोग.

नई दिल्ली. राष्ट्रीय ​डेयरी विकास बोर्ड NDDB द्वारा स्थापित NDDB फाउंडेशन फॉर न्यूट्रिशन (NFN) ने 15 दिसंबर 2025 को अपने गो-ग्रीन खाद मैनेजमेंट प्रोग्राम के लिए फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) के 5वें सस्टेनेबल एग्रीकल्चर अवार्ड्स 2025 में ‘एग्री-बेस्ड डीकार्बोनाइजेशन पर पहल’ कैटेगरी में पहला पुरस्कार मिला है. ये खास पुरस्कार डॉ. प्रवीण के सिंह, एग्रीकल्चर कमिश्नर, एग्रीकल्चर एंड फार्मर्स वेलफेयर मिनिस्ट्री, भारत सरकार ने दिया है. बता दें कि एनडीडीबी न सिर्फ देश में डेयरी सेक्टर को आगे ले जा रहा है बल्कि क्लीन एनर्जी को भी बढ़ावा देने का काम कर रहा है.

पुरस्कार देने के दौरान नवीन कुमार पटले, एडिशनल कमिश्नर (हॉर्टिकल्चर – फ्रूट), मिनिस्ट्री ऑफ एग्रीकल्चर एंड फार्मर्स वेलफेयर, सिराज चौधरी, सीनियर मेंबर, FICCI कमिटी ऑन एग्रीकल्चर और संजय वुप्पुलुरी, नेशनल हेड–फूड एंड एग्रीबिजनेस स्ट्रेटेजिक एडवाइजरी एंड रिसर्च, यस बैंक की गरिमामयी मौजूदगी रही.

बन जाती है क्लीन एनर्जी
इस प्रोग्राम को गोबर से बने बायोगैस सॉल्यूशन को बढ़ावा देने के लिए पहचान मिली, जो मवेशियों के गोबर को क्लीन एनर्जी और पोषक तत्वों से भरपूर स्लरी में बदलते हैं.

सर्कुलर इकॉनमी मॉडल को मजबूत करते हैं, खाद मैनेजमेंट में सुधार करते हैं और ग्रामीण डीकार्बनाइजेशन में मदद करते हैं.

एनडीडीबी एनएफएन के जरिए गोबर से बने बायोगैस इनिशिएटिव को सस्टेनेबल डेयरी और ग्रामीण डीकार्बनाइजेशन के एक जरूरी हिस्से के तौर पर बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा रहा है.

डेयरी कोऑपरेटिव और किसानों के साथ अपने गहरे जुड़ाव का फायदा उठाकर, NDDB ने घरेलू लेवल पर बायोगैस सॉल्यूशन को अपनाने को आगे बढ़ाया है.

जो मवेशियों के गोबर को क्लीन एनर्जी और पोषक तत्वों से भरपूर स्लरी में बदलते हैं. ये इनिशिएटिव न सिर्फ़ फॉसिल फ़्यूल पर निर्भरता कम करते हैं.

वहीं खेत-लेवल पर रिसोर्स एफिशिएंसी को भी बढ़ाते हैं, खाद मैनेजमेंट में सुधार करते हैं और डेयरी किसानों के लिए एक्स्ट्रा वैल्यू स्ट्रीम बनाते हैं.

Written by
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