Home पोल्ट्री Poultry: कृषि मंत्री से मिला PFI का प्रतिनिधिमंडल, मक्का की कमी पूरी करने को दिया ये सुझाव
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Poultry: कृषि मंत्री से मिला PFI का प्रतिनिधिमंडल, मक्का की कमी पूरी करने को दिया ये सुझाव

कृषि मंत्री को सौंपा ज्ञापन.

नई दिल्ली. पोल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया (PFI) की 36वीं वार्षिक आम बैठक (एजीएम) की शानदार सफलता के बाद पोल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया की टीम पोल्ट्री सेक्टर की भलाई के लिए लगातार काम कर रही है. इस कड़ी में सेक्टर की तमाम समस्याओं को भारत सरकार के संबंधित मंत्रालय तक पहुंचाने का काम किया जा रहा है. वहीं पीएफआई के अध्यक्ष रणपाल ढांडा ने सचिव रविंदर संधू और प्रबंधक जगदीश के साथ लुधियाना (पंजाब) में आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज चौहान से मुलाकात की और तमाम समस्याओं से एक बार फिर अवगत कराया.

बता दें कि सम्मेलन स्थल पर किसानों को पोल्ट्री के बारे में जानकारी देने के लिए पीएफआई का एक स्टॉल भी लगाया गया था, जहां पोल्ट्री फार्मिंग के फायदे के बारे में अहम जानकारी दी गई. साथ ही इस काम में कैसे सफल हो सकते हैं, इस बारे में किसानों को बताया गया.

पीएफआई ने दिया क्या सुझाव
वहीं दूसरी ओर कृषि मंत्री से मुलाकात के दौरान रणपाल ढांडा ने कहा कि पीएफआई पोल्ट्री प्रजनकों, किसानों, फीड मिल मालिकों, उपकरण निर्माताओं, दवा और फीड एडिटिव्स निर्माताओं का एक संगठन है और पीएफआई पूरे पोल्ट्री क्षेत्र के लिए काम करता है.

उन्होंने आगे कहा कि पोल्ट्री उद्योग हर साल 8-10 फीसद की दर से बढ़ रहा है और मौजूदा वक्त में पोल्ट्री उद्योग के लिए मक्के की कमी है. क्योंकि इथेनॉल उद्योग को भी मक्के की जरूरत होती है.

रणपाल ढांडा ने कृषि मंत्री को सुझाव दिया कि किसानों को उचित मूल्य पर संकर बीज उपलब्ध कराकर मक्के की फसल का उत्पादन बढ़ाया जाए.

ताकि प्रति एकड़ फसल की पैदावार बढ़ सके और पोल्ट्री किसानों को आसानी से मक्का मिल सके. क्योंकि इस समय अच्छी गुणवत्ता वाले मक्के की कमी है और यह एमएसपी से ऊपर बिक रहा है.

ढांडा ने ये भी सुझाव दिया कि मंडी में मक्का सुखाने की मशीन होनी चाहिए. ताकि मक्के में नमी का स्तर बहुत अधिक न हो, क्योंकि मक्के में नमी ज्यादा होने पर एफ्लाटॉक्सिन का स्तर बढ़ सकता है.

रणपाल ढांडा ने इस बात पर भी रोशनी डाली कि पोल्ट्री सेक्टर लोगों को बहुत अधिक रोजगार दे रहा है और 60 लाख से अधिक लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पोल्ट्री से जुड़े हैं.

यदि हम संकर बीजों का उपयोग करके मक्के की फसल बढ़ाते हैं, तो पोल्ट्री फीड की लागत कम हो सकती है और हम मध्य पूर्व और अन्य देशों को अंडे और फ्रोजन चिकन का निर्यात करके अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भी प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं.

निष्कर्ष
कृषि मंत्री को अपनी मांगों का एक ज्ञापन भी सौंपा. वहीं मंत्री ने पोल्ट्री उद्योग पोल्ट्री फार्मिंग के विकास के लिए पोल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया टीम के समर्पण और कार्य की सराहना की. साथ ही भरोसा दिलाया कि उनकी मांग पर गौर किया जाएगा. पोल्ट्री सेक्टरमें मक्का की कमी को दूर करने के प्रयास किए जाएंगे.

Written by
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