नई दिल्ली. राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान, करनाल में नई कृषि टेक्नोलॉजी कार्यक्रम के मौके पर निदेशक एवं कुलपति डॉ. धीर सिंह ने कहा कि संस्थान डेयरी के लगातार विकास और पशुधन उत्पादन के लिए नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहा है लेकिन अभी और प्रयास करने की जरूरत है. जिसके लिए नई दिल्ली के भारत मंडपम में 3 से 5 नवंबर को तक उभरते विज्ञान, टेक्नोलॉजी और इनावेशन कॉन्कलेव-2025 का आयोजन किया जाएगा. जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे. उन्होंने कहा एस्टिक 2025 में विकसित भारत 2047 के तहत इमैजिन, इनोवेट, इनस्पायर को ध्यान में रखते हुए काम किया जाएगा.
आईसीएआर के महानिदेशक, डॉ. मांगी लाल जाट ने कहा कि उभरते विज्ञान, उभरती टेक्नोलॉजी तथा इनावेशन कान्लेव-2025 में 13 मंत्रालयों तथा विभागों के द्वारा 11 थीमेटिक सत्रों का आयोजन किया जाएगा. इसके तहत स्वास्थ्य शिक्षा, कृषि, ऊर्जा, इलेक्ट्रानिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी, पर्यावरण तथा अन्य मंत्रालयों एवं विभागों की वैज्ञानिक उत्कृष्टता, निरन्तरता तथा इनावेशन आधारित विकास के प्रति वचनबद्धता को दोहराया जाएगा.
बताया आगे बढ़ने का रास्ता
उन्होंने कहा कि पर्यावरण में हो रहे बदलाव और खाद्य सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का सामना करने के लिए विज्ञान आधारित टेक्नोलॉजी की जरूरत है.
उन्होंने आगे कहा कि कृषि प्रौद्योगिकियों किसानों को सशक्त करें, उत्पानदकता में वृद्धि लाएं तथा हमारे इको सिस्टम को सुरक्षित रखें. एस्टिक 2025 राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के साथ इनावेशन को जोड़ें.
कहा कि अभी तक हम लोग जिस पंरपरागत तकनीकों के आधार पर कार्य कर रहे थे उसमें दोहरेपन की संभावना है और पुरानी परांपरागत तकनीकों के माध्य्म से भारत समुचित विकास नहीं कर सकता.
इसलिए एक जागरूकता लाने की आवश्यकता है और इसी के लिए आज इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसके तहत इनावेशन से उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाई जा सके, जिससे खाद्य सुरक्षा को हम प्राप्त कर सकते हैं.
जलवायु परिवर्तन पर बोलते हुए डेयरी सचिव ने बताया कि जलवायु एक वैश्विक समस्या है जो रातोंरात नहीं आई है. समस्या जटिल होने के कारण इसका समाधान नई तकनीकियों के जरिए किया जा सकता है.
उप महानिदेशक (पशु विज्ञान), डॉ. राघवेन्द्र भट्टा ने बताया कि पशु विज्ञान क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए परंपरागत तकनीकों के साथ-साथ नई तकनीकियों और टेक्नोलॉजी की जरूरत है.
डॉ. एसएन झा, उप महानिदेशक, आईसीएआर तथा एस्टिक-ईट ने भी कार्यक्रम के विषय में बताते हुए कहा कि भारतीय कृषि के क्षेत्र में जो चुनौतियां हैं. वैज्ञानिक प्रतिभा और इनावेशन के इस्तेमाल करने की जरूरत है.












