नई दिल्ली. बरसात का मौसम अब लगभग खत्म हो गया है और ठंड ने दस्तक दे दी है. सुबह और शाम के वक्त अब ठंड पड़ने लगी है और साथ में ओंस भी गिरने लगी है. ऐसे में जहां इंसान खुद की हिफाजत करने के लिए इंतजाम करते हैं तो वहीं पशुपालकों को भी चाहिए कि पशुओं की देखभाल के लिए इंतजाम करें. ताकि उन्हें ठंड से बचाया जा सके. ठंड से बचाने का मतलब ये है कि पशुओं को बीमार होने से बचाया जाए. जिससे उनके उत्पादन पर इसका असर न पड़े. क्योंकि ठंड में उत्पादन तेजी से घट जाता है.
मध्य प्रदेश सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग (Animal Husbandry and Dairying Department) के एक्सपर्ट ने लाइव स्टॉक एनिमल न्यूज (Livestock Animal News) को बताया कि ठंड से पहले पशुपालकों को पशुशालाओं को ढककर और गर्म रखना चाहिए. पशुओं को सूखा चारा देना चाहिए. गुनगुना पानी और पौष्टिक आहार भी देना चाहिए. इस मौसम में नवजात और बीमार पशुओं का खास ख्याल रखने की जरूरत होती है. मौसम के अनुसार उन्हें गर्म कपड़े पहनाना चाहिए ताकि उन्हें ठंड का असर ना हो सके. ठंड के मौसम में पशुओं की कई और तरह विशेष देखभाल की जरूरत होती है.
पशुपालकों को क्या करना चाहिए
मध्य प्रदेश सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग मुताबिक पशुओं को खुरपका-मुंहपका (FMD) का टीका लगवाएं. क्यों ये बीमारी बहुत परेशान करती है.
पशुओं से बेहतर उत्पादन लेने के लिए बरसीम, ल्यूसर्न, मक्का, ज्वार, बाजारा सहित हरा चारा खिलाएं.
ठंडी हवाओं से बचाने के लिए पुराने कपड़ों या भी बोरों का पर्दा दरवाजे और खिड़की पर लगाना चाहिए.
वहीं अधिक ठंड होने पर पशुओं को पुराने बोरों से ढकना चाहिए. ताकि उन्हें ठंडी हवा न लगे.
इस मौसम में पशुओं के गर्मी (हीट) पर आने पर कृत्रिम गर्भाधान का विशेष ध्यान रखें.
अभी हरा चारा बड़ी मात्रा में उपलब्ध है. ऐसे में पशुपालकों को चाहिए हरे चारे का साइलेज बनाएं.
बाड़े में कीटाणुनाशक दवा का छिड़काव करें, ताकि मच्छर-मक्खी न पनपे.
निष्कर्ष
पशुपालन एवं डेयरी विभाग का कहना है कि यदि इन कामों को कर लिया जाए तो पशुओं को शुरुआती ठंड से बचाया जा सकता है. वहीं चारे की भी कमी नहीं होगी. जिससे डेयरी फार्मिंग में फायदा होगा.












