Home मछली पालन Fish : अनोखा फार्म जिसमें मुर्गी के साथ करें मछली पालन, कम जगह में कैसे कमाएं ज्यादा मुनाफा, जानें ट्रिक
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Fish : अनोखा फार्म जिसमें मुर्गी के साथ करें मछली पालन, कम जगह में कैसे कमाएं ज्यादा मुनाफा, जानें ट्रिक

जीरा डालने से पहले और चूना डालने के बाद खाद का प्रयोग करें.
प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली. इंटीग्रेटेड फार्मिंग में एक ऐसी तकनीक जिसमें एक ही जगह पर मछली पालन और मुर्गी पालन दोनों कैसे कर सकते हैं, ऐसे जी हां एक ही जगह पर मुर्गी पालन के साथ-साथ मछली पालन और बतख पालन भी किया जा रहा है. इंटीग्रेटेड फार्मिंग की तकनीक को समझते हैं और कम जमीन में ज्यादा मुनाफा कैसे कमा सकते हैं, आइये यहां जानते हैं इस आर्टिकल के द्वारा. एक ही फॉर्म में मछली, डक और पोल्ट्री पालन की तकनीक.

यह है इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम जो करीब एक हजार स्क्वायर मीटर में हो सकता है. एक तालाब में मछली पालन और डक के लिए बहुत ही अच्छा है. इस तालाब में चार प्रकार की मछलियां आप पाल सकते हैं. इन तालाब में रोहू, कतला, नैनी और मिरिगल जैसी मछलियां पाल सकते हैं. इस तालाब में आप 5 से 6 फुट की गहराई रख सकते हैं. 5 से 6 फुट की गहराई मछलियों के ऑक्सीजन और उनके आराम के लिए बहुत अच्छी होती है. क्योंकि मछलियों की प्रजाति तालाब में अलग-अलग सतह पर रहती हैं. जैसे रोहू सतह के ऊपर रहती है. कतला और नैनी बीच में और सबसे आखिर में मिरिगल रहती है. इन सभी मछलियों को जो दाना डाला जाता है वो चोकर और दाना मिक्सर करके एक गोला बनाकर डाल देते हैं, जब गोला नीचे पहुंचता है तो नीचे से ऊपर सभी मछलियों को दाना मिलता है.

इस तरीके से कर सकते हैं पॉल्ट्री अब बात आती है पोल्ट्री की, पोल्ट्री के लिए नीचे की तरफ जालीदार बनाएं. जाल होने से पोल्ट्री का जो बीट है वह पानी में नीचे सतह पर गिरता है, जिससे मछली को कैल्शियम मिलता है. पोल्ट्री की बीट से मछली का ग्रोथ बढ़ता है. मान लीजिए जो मछली 6 महीने में हो रही है इस बीट से 5 महीने में ही ग्रोथ कर जाती है. इस तरकीब से मछली को कैल्शियम मिलता है, जिससे मछली बीमार नहीं पड़ती है. मछली लूज नहीं होती है, कैल्शियम एक मछली के लिए बहुत जरूरी होता है. अगर आपके पास बीट नहीं है तो चूना भी डाल सकते हैं.

बटख को पालने के पीछे का कारण अब बात करते हैं बटख की, जिस तरीके से तालाब है तो बटख पालन और भी आसान हो जाता है. बटख से भी दो फायदे है. बटख पूरे तालाब में घूमती है, जिससे पानी साफ होता है और मछली को ऑक्सीजन मिलती है. बटख की बीट भी मछली के लिए फायदेमंद होती है. डक के घूमने से पूरे तालाब में फ्रेश ऑक्सीजन मिलता रहता है. कुछ-कुछ बटक रोज अंडे देती हैं, तो मान लीजिए आपके पास 20 से 25 अंडों की व्यवस्था है तो वह थोड़ा-थोड़ा पैसा आपको रोजाना मिलेगा. ऐसे ही मुर्गी डेली अंडे देती है तो आप उससे भी रोजाना की कमाई निकाल सकते हैं. पांच सौ रुपये से आठ सौ रुपये रोजाना की कमाई आपको मिलती रहेगी. वहीं मछली करीब 6 महीने में तैयार होती है और एक तालाब से चार बार मछली को निकालकर बाजार में बेचा जा सकता है. तो ये आपके लिए कमाई में डबल डोज वाला बिजनेस है.

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