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Poultry Farming गर्मियों में होने वाली चार बीमारियां पोल्ट्री फार्मिंग में लेकर आती हैं बर्बादी

अंडा और चिकन की बढ़ती मांग को दूर करने के लिए उत्तराखंड सरकार ने प्रयास तेज किए हैं.
प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली. गर्मियों का मौसम मुर्गियों के लिए अच्छी खबर लेकर नहीं आता है. बल्कि गर्मियों के दिनों में मुर्गियों को कई तरह की बीमारियों का खतरा होता है. अगर बीमारियां हो गईं तो इससे मुर्गियों के उत्पादन पर असर पड़ता है. एक्सपर्ट की मानें तो 50 से 70 फीसद तक मुर्गियों की गर्मियों में होने वाली तमाम बीमारियों से मौत होने का भी खतरा रहता है. एक्सपर्ट कहते हैं कि चाहे उत्पादन पर असर पड़े या फिर मुर्गियों की मौत हो जाए, दोनों ही स्थिति में पोल्ट्री फार्मर को नुकसान उठाना ही पड़ता है. अगर मौत होने लगी तो फिर इसे पोल्ट्री फार्मिंग का कारोबार भी बंद हो सकता है.

पोल्ट्री एक्सपर्ट कहते हैं कि मुर्गियों को आमतौर पर गर्मियों के दिनों में हीट स्ट्रोक रानीखेत, ई—कोलाई और फाउल कोलेरा जैसी बीमारियों का खतरा सबसे ज्यादा होता है. अगर ये बीमारियां हो गईं तो नुकसान होना तय है लेकिन पोल्ट्री फार्मर ने वक्त रहते बचाव कर लिया तो फिर पोल्ट्री फार्मिंग के काम में नुकसान नहीं होगा. इस रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि इन बीमारियों के होने से किस तरह की दिक्कतें मुर्गियों को होती हैं. ताकि आपको अंदाजा हो जाए की कैसे बचाव किया जा सकता है.

बीमारियों और नुकसान के बारे में जानें यहां
मुर्गियों को जब हीट स्ट्रोक होता है तो उन्हें गर्मी बहुत ज्यादा लगती है. ऐसे में मुर्गियां हांफने लग जाती हैं. पंख फैला कर बैठी रहती हैं और बहुत ज्यादा पानी पीने लगती हैं.

अगर मुर्गियों को रानीखेत बीमारी हो गई तो ये बेहद ही संक्रामक वायरल बीमारी है. इसमें मुर्गियों में सांस लेने में दिक्कत आती है. उन्हें लकवा हो जाता है, जो बेहद ही जानलेवा बीमारी है.

इसी तरीके से ई—कोलाई बीमारी हो गई तो मुर्गियों के पेट में दर्द रहता है. डायरिया और सुस्ती की दिक्कत आती है. खराब पानी पीने की वजह से ये बीमारी होती है.

वहीं फाउल कोलेरा दो से तीन महीने की मुर्गियों को ज्यादा चपेट में लेती है. इसमें हरी पीली बीट मुर्गियां करने लगती हैं और मुर्गियों को तेज बुखार भी हो जाता है.

निष्कर्ष
बीमारियों से जहां मुर्गियां को नुकसान होता है तो वहीं गर्मी के कारण भी मुर्गियां दाना कम खाती हैं. उनका वजन नहीं बढ़ता है और अंडे देने की क्षमता भी कम हो जाती है. साथ ही अंडों का आकार भी छोटा हो सकता है. इसलिए बीमारियों से बचाव करना जरूरी है ताकि बीमारी में नुकसान ना हो.

Written by
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