नई दिल्ली. सरकार पशुपालन मुर्गी पालन और मछली पालन जैसे कामों को बढ़ावा दे रही है. सरकार का मानना है कि इन कामों को करने की वजह से कृषि पर आश्रित रहने वाले किसानों के पास एक और काम हो सकता है. जिससे उनकी इनकम को दोगुना किया जा सकता है. वहीं सरकार हर हाल में किसानों की इनकम को दोगुना करना चाहती है. ताकि किसान मजबूत बन सकें और ग्रामीण अर्थव्यवस्था और ज्यादा मजबूत हो सके. इससे न सिर्फ किसानों को फायदा होगा बल्कि देश की तरक्की में भी किसान अपना सहयोग दे सकेंगे.
आपको बता दें कि मुर्गी पालन भी एक अच्छा काम है और इसे करके बहुत से लोग अच्छी कमाई कर रहे हैं. क्योंकि अंडों और चिकन की डिमांड हमेशा रहती है. जिस वजह से सरकार इसे भी बढ़ावा देने का काम कर रही है.
योजना के जरिए क्या मिलेगा फायदा
राजस्थान की सरकार भी पोल्ट्री फार्मिंग के जरिए किसनों की इनकम को बढ़ाना चाहती है. इसलिए बैकयार्ड पोल्ट्री फार्मिंग को बढ़ावा देने के मकसद से 40 चूजे पोल्ट्री फार्मर्स को दिए जा रहे हैं.
योजना के तहत 28 दिन के चूजे के अलावा इनपुट टेक्नोलॉजी, फीड, दवा, वैक्सीन और परिवहन के खर्च पर भी सरकार सब्सिडी दे रही है.
सरकार की तरफ से बताया गया है कि 40 चूजे 18 सौ रुपए के होंगे. जबकि दवा पर 200 रुपए, परिवहन पर 225 रुपए और कुल मिलाकर 2225 रुपए खर्च आएगा.
सरकार की तरफ से सभी वर्ग के पोल्ट्री फार्मर को 75 फीसद तक की सब्सिडी इन खर्चों पर दी जाएगी. 25 फीसद खुद लगाकर पोल्ट्री फार्मिंग की जा सकती है.
इस योजना का फायदा लेने के लिए नजदीकी पशु चिकित्सा अधिकारी, पशु औषधालय के प्रभारी और उपसंचालक पशु चिकित्सा से अधिक जानकारी ली जा सकती है.
निष्कर्ष
मुर्गी पालन शेड बनाकर भी किया जा सकता है और बैकयार्ड पोल्ट्री फार्मिंग को घर में खाली जगह पर भी किया जा सकता है. शेड बनाने में खर्च ज्यादा आता है. यदि किसी के पास बजट की कमी है तो वो इस काम को घर में खाली जगह पर बैकयार्ड पोल्ट्री फार्मिंग के जरिए कर सकता है. आमतौर पर ग्रामीण इलाकों में किसान 10—20 मुर्गियों से इस काम को करते हैं. कुछ किसान अपनी जरूरत को देखते हुए मुर्गियों को पालते हैं तो कुछ अंडों और मीट का उत्पादन कर इससे कमाई करते हैं. जबकि इसमें उन्हें अच्छी कमाई भी होती है.












