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Poultry: ऐसे जानें अपनी पोल्ट्री की मुर्गियों की सेहत

अपने आकार के अनुसार एक मुर्गी 10-15 चूजे पाल सकती है.
प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली. पोल्ट्री को ऐसा व्यवसाय माना जाता है, जिसमें कम पूंजी, कम समय और कम मेहनत में शुरू किया जा सकता है. अगर मुर्गी पालन व्यवसाय सही ढंग से कर लिया जाए तो इससे काफी अच्छी इनकम हासिल की जा सकती है.मगर, ये भी अगर आपने थोड़ी सी गलती कर दी तो नुकसान भी उठाना पड़ सकता है. इसलिए बेहतर है कि मुर्गी पालन करने की सोच रहे हैं तो उससे जुड़ी कुछ बातों की जानकारी जरूर कर लेनी चाहिए. अगर आपने सिस्टम के साथ मुर्गी पालन किया तो ये मुर्गी पालन बेहद फायदेमंद सौदा है. अगर लापरवाही कर दी तो ये आपको नुकसान भी पहुंचा सकती है.

पोल्ट्री फार्मिंग के जरिए अच्छी आमदनी कमाई जा सकती है. हालांकि ज्यादा मुनाफे के लिए कई बातों का ध्यान रखा जाता है. पोल्ट्री फार्म में सेहतमंद मुर्गियां एक पोल्ट्री फार्मर के लिए फायदे का सौदा होती हैं. पोल्ट्री में सफाई बेहद ही जरूरी है. वहीं मुर्गियों की सेहत के बारे में जागरूक रहना बेहद जरूरी है. अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो पोल्ट्री में बीमारी फैल सकती है और इससे पोल्ट्री कारोबारी को नुकसान हो सकता है. आइये जानते हैं कुछ टिप्स, जिनसे आप आसानी से मुर्गियों की सेहत जान सकते हैं.

स्वस्थ मुर्गियों में ये होते हैं लक्षण:

  • एक स्वस्थ मुर्गी का वजन उम्र के अनुरूप हो, उसके स्वाभाव में फुर्तीलापन और हाथ से पकड़ने पर वह संघर्ष करती है.
    · उसका चेहरा भरा हुआ, नासिका साफ व म्यूकस रहित होता है.
  • उसके पंख साफ-सुथरे और व्यवस्थित, चमड़ी चमकदार होती है.
    · मुर्गियां बराबर दाना खाती और पानी पीती है

ऐसे रोकें बीमारी: ब्रॉड्स्पैक्ट्रम एंटीबायोटिक औषधि एवं एंटीसेप्टिक लोशन चेचक के दानों (घाव) पर लगाने से सेकेंड्री इंफेक्शन को नियंत्रित किया जा सकता है. अगर चेचक का प्रकोप होता है और 30 प्रतिशत से कम मुर्गियां चेचक रोग से प्रभावित हैं तो स्वस्थ मुर्गी को जल्दी से रोग ग्रसित मुर्गियों से अलग करना चाहिए. ताकि बची हुई स्वस्थ मुर्गियों का तुरंत टीकाकरण कराया जा सके. दो प्रकार के चेचक के टीके बाजार में उप्लब्ध हैं. (पीजन पॉक्स एवं फाऊल पॉक्स). पीजन पॉक्स टीका, फाऊल पॉक्स टीका के तुलना में कम हानिकारक होता है लेकिन इसमें मात्र 6 महीने तक ही चेचक रोग रोधक क्षमता होती है.

लगवा सकते हैं वैक्सीन: इसलिए 6 माह बाद पुनः टीकाकरण कराने की ज़रूरत होती है. फाऊल पॉक्स एक लम्बे अवधि तक चेचक के खिलाफ रोग रोधक क्षमता देता है. अगर टीकाकरण सही तरीके से नहीं किया गया तो समूह में बीमारी फैल सकती है. सामान्य तौर पर चेचक टीकाकरण 6 से 8 सप्ताह के आयु वर्ग के मुर्गियों में अंतः क्रिया या विंग वेब विधि द्वारा किया जाता है. वहीं मुर्गी फार्म की सफाई सोडियम हाइड्रॉक्साईड (1:500), क्रेसोल (1:400) और फिनायल (3 प्रतिशत) से की जाए तो बीमारी फैलने से रोका जा सकता है.

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