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Poultry: मणिपुरी और नागी बत्तख आपको बना सकती है मालामाल, साल में मिलते हैं 180 अंडे

मणिपुरी और नागी बत्तख की तस्वीर.

नई दिल्ली. पोल्ट्री फार्मिंग में बत्तख पालन भी किया जाता है और इसके कई फायदे हैं. बत्तख पालन कम खर्चीला होता है. क्योंकि बत्तख खुद ही कीड़े मकोड़े खाकर अपना पेट भर लेती हैं. इस वजह से फीड पर खर्च कम आता है. जिससे बत्तख पालन की लागत कम हो जाती है. बत्तखों की कई नस्ल है जो मुर्गियों के मुकाबले ज्यादा अंडे देती हैं. वहीं बत्तखों से मिलने वाली खाद भी बागवानी के लिए बेहद ही अच्छी मानी जाती है और इसके पालने का यह भी फायदा है कि कम जमीन और ज्यादा पानी वाले क्षेत्र में भी इसको पाला जा सकता है. अगर इसे मछली पालन के साथ किया जाए तो फायदा दोगुना हो सकता है.

बत्तख पालन के लिए बहुत सी नस्ल हैं, जिनको पालकर फायदा कमाया जा सकता है. हाल ही में पशु—पक्षियों की नई नस्ल को मान्यता देने वाली संस्था नेशनल ब्यूरो ऑफ एनिमल जेनेटिक रिसोर्सेज (NBAGR) की तरफ से बत्तखों की कई नस्लों को मान्यता दी गई है. जिनमें से दो के बारे में हम यहां आपको आज जानकारी देने जा रहे हैं. यहां बताएंगे कि उनकी क्या खासियत है, उन्हें किस लिए पालना चाहिए.

मणिपुरी बत्तख की खासियत पढ़ें
मणिपुरी बत्तख इम्फाल घाटी के इम्फाल पश्चिम, इम्फाल पूर्व, थौबल, काकचिंग, बिष्णुपुर, जिरीबाम जिलों और मणिपुर के अन्य पहाड़ी जिलों में पाई जाती है.

मणिपुरी बत्तख के पंख हल्के से गहरे भूरे रंग के धब्बेदार होते हैं, जबकि, नर बत्तखों का सिर चमकदार हरा होता है और शरीर और पंख हल्के से गहरे भूरे रंग के होते हैं.

चोंच मुख्य रूप से पीले से गहरे हरे रंग की होती है, जिसके सिरे पर काला निशान होता है. अंडे और मांस के लिए पाला जाता है.

अच्छे अंडे देने वाली बत्तख 6-7 महीने के अंडे देने की अवधि में औसतन लगभग 130 अंडे देती है.

वयस्क नर में शरीर का वजन 1.8 से 2.4 किलोग्राम के बीच होता है. इस बत्तख की अनुमानित आबादी लगभग 17.8 लाख है.

नागी बत्तख के बारे में जानें यहां
नागी बत्तख का मूल स्थान असम के कछार, करीमगंज और हैलाकांडी है. ‘नागी’ बत्तखें मध्यम आकार की होती हैं, जिनका शरीर बेलनाकार होता है.

पंखों का रंग विशेष रूप से काला होता है. पक्षियों के सीने पर सफेद धब्बा भी होता है. दोहरे उद्देश्य के लिए पाला जाता है. अंडे और मांस दोनों के पाल सकते हैं.

टांगें हल्के भूरे रंग की होती हैं, जिसमें नारंगी रंग का भी आभास होता है. नागी बत्तखें अच्छी अंडे देने वाली होती हैं, जो प्रति वर्ष 150-180 अंडे देती हैं.

ये हरे-नीले रंग के छिलके वाले अंडे देती हैं (सफेद के बजाय), और माना जाता है कि इनमें उच्च पोषक तत्व होते हैं.

नर में वयस्क शरीर का वजन 1.5 से 1.7 किलोग्राम तक होता है. नागी बत्तख की अनुमानित आबादी लगभग 68 हजार है.

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