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Poultry Farming: अप्रैल में शेड और फीड मैनेजमेंट के साथ मुर्गियों की हैल्थ का रखें ख्याल

रोगी पक्षियों के पंख बिखरे-बिखरे व लटके रहते हैं और कॉम्ब पर पीलापन नजर आता है.
प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली. अप्रैल का महीना एक ऐसा महीना है कि, जब गर्मी तेजी के साथ बढ़ती चली जाती है. सुबह और शाम में तो मौसम ठीक रहता है लेकिन दोपहर में तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है. ऐसे में इंसानों क्या जीव—जुंतुओं को दिक्कतें आना स्वाभाविक है. अगर आप मुर्गी पालक हैं तो यह महीना आपके लिए बेहद ही अहम बन जाता है. क्योंकि मुर्गियों को कई तरह की दिक्कतें इस महीने में हो सकती हैं. जिससे मुर्गियों को बचाना जरूरी है. तभी आप मुर्गी पालन के काम में ठीक-ठाक मुनाफा कमा पाएंगे.

पोल्ट्री एक्सपर्ट का कहना है कि अप्रैल के इस महीने में जब गर्मी बढ़ने लगती है तो एक मुर्गी पालक के तौर पर आपको शेड प्रबंधन, दाना पानी की सही व्यवस्था और मुर्गियों की हेल्थ की जांच करते रहना चाहिए. यह तीनों ही चीज मुर्गी पालन के काम में मुनाफा और नुकसान का कारण बन सकती है. ऐसे में आपको क्या-क्या करना है आइए इस रिपोर्ट में डिटेल से जानते हैं.

शेड प्रबंधन कैसे करें
पोल्ट्री फार्मिंग में शेड प्रबंधन की बात की जाए तो मुर्गी पालक को इस महीने शेड के चारों तरफ बोरियां लगानी चाहिए और सुबह शाम उस पर पानी का छिड़काव करना चाहिए.

पोल्ट्री फार्म की छत पर घास की परतें डालने से फायदा मिलता है. सफेदी जरूर से करवा लें. जिससे शेड के अंदर गर्मी कम होती है.

खिड़कियों को खुला रखना चाहिए. सुबह 10:00 से शाम 5:00 बजे तक शेड में सीधी धूप आती है तो इससे नुकसान होता है.

मुर्गियों को गर्म हवा से बचने के लिए कूलर पंखों का इस्तेमाल करना बहुत जरूरी काम हो जाता है.

दाना पानी प्रबंधन
इस महीने दाना पानी की खपत दोगुनी हो जाती है. हर समय ठंडा और साफ पानी उपलब्ध कराना चाहिए.

पानी के बर्तन प्लास्टिक की बजाय मिट्टी के रखें. ताकि पानी ठंडा रहे. मुर्गियों को विटामिन सी, एमिनो पावर और इलेक्ट्रोलाइट्स दें. ताकि उन्हें तनाव ना हो.

दोपहर में कम फीड देना चाहिए. बल्कि सुबह-शाम में फीड खिलाना सही रहता है.

हैल्थ का रखें ख्याल
मुर्गियों को बीमारियों से बचने के लिए उनका बिछावन गीला होते ही बदल दें. ऐसा न करने से अमोनिया गैस फार्म में फैल सकती है और उससे बीमारी हो जाती हैं.

बीमार मुर्गियों को स्वस्थ मुर्गियों से अलग कर दें. ताकि उनकी बीमारी स्वस्थ मुर्गियों को ना लगे.

निष्कर्ष
ये कुछ उपाय हैं. अगर आप इन्हें आजमाते हैं तो फिर मुर्गी पालन के काम में आप अपने आप को काफी हद तक नुकसान से बचा पाएंगे.

Written by
Livestock Animal News Team

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