नई दिल्ली. पोल्ट्री फार्मिंग का काम शुरू करने के लिए चूजों को पाला जाता है और चूजों की ब्रूडिंग भी की जाती है. क्योंकि शुरुआती हफ्तों में चूजे अपने शरीर के तापमान को खुद से नियंत्रित नहीं कर पाते हैं. जबकि इनमें बीमारियां लगने का खतरा भी बेहद ज्यादा रहता है. ऐसे में ब्रूडिंग करके उन्हें बीमारियों से बचाया जा सकता है साथ ही उनके तापमान को भी नियंत्रित किया जा सकता है. ब्रूडिंग में आमतौर पर उन्हें बाहरी गर्मी, सुरक्षा और नियंत्रित वातावरण दिया जाता है. साथ ही सही तापमान, साफ-सफाई, फीड और पानी आदि देने में ख्याल रखा जाता है.
एक्सपर्ट कहते हैं कि इससे उनकी ग्रोथ तेजी से होती है. जबकि उनके अंदर बीमारियों से लड़ने की इम्युनिटी भी बढ़ जाती है. नतीजे में पोल्ट्री फार्मिंग में फायदा मिलता है.
केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान (CARI) के एक्सपर्ट ने लाइव स्टॉक एनिमल न्यूज (Livestock Animal News) को बताया कि जब चूजों की ब्रूडिंग की जाती है तो कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए. आइए जानते हैं ब्रूडिंग के दौरान किन बातों का ध्यान देना जरूरी है.
ये गलती कभी भी न करें
खास तौर पर चूजों को कभी भी एक जगह इकट्ठा नहीं होने देना चाहिए. क्योंकि इससे बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है.
जब आप लोग मुर्गियों के चूजों की ब्रूडिंग करते हैं तो इस दौरान इस बात का ख्याल रखना है कि चूजे एक जगह इकट्ठा न हों.
आमतौर पर ब्रूडिंग के दौरान यह होता है कि चूजे इकट्ठा हो जाते हैं और इसकी वजह से एक के ऊपर एक चूजे आने लगते हैं.
जिसके चलते ऐसा होता है कि मजबूत चूजा कमजोर चूजे पर चढ़ जाता है. इससे कमजोर चूजे की मौत हो जाती है.
कहने का मतलब ये है कि चूजों में मोर्टिलिटी देखी जा सकती है. इस वजह से पोल्ट्री फार्मिंग के काम में आपको नुकसान हो सकता है.
ब्रूडिंग के दौरान 2 से 3 दिन तक चूजों पर नजर रखना है. ताकि वह इकट्ठा ना हो सकें. अगर वे इकट्ठा होंगे तो मृत्युदर दिखाई देगी.
एक्सपर्ट का कहना है कि आमतौर पर रात के समय में जब टेंपरेचर डाउन होता है तब चूजे एक जगह पर इकट्ठा होने की कोशिश करते हैं.
इस दौरान वह एक दूसरे के संपर्क में आ जाते हैं और एक दूसरे चूजे पर चढ़ने की कोशिश करते हैं.
निष्कर्ष
रात के समय में चूजों पर खास ध्यान देने की जरूरत है. ताकि चूजों में मोर्टिलिटी न दिखाई दे और ब्रूडिंग की प्रक्रिया भी सही से पूरी हो जाए.










