नई दिल्ली. पोल्ट्री सेक्टर के भविष्य को आकार देने में टेक्नोलॉजी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. कुक्कुट विज्ञान विभाग, पशु चिकित्सा विज्ञान एवं पशुपालन महाविद्यालय, मथुरा (Department of Poultry Science, College of Veterinary Science and Animal Husbandry, Mathura) के एक्सपर्ट के मुताबिक IoT-सक्षम फार्म प्रबंधन से लेकर ब्लॉकचेन-आधारित आपूर्ति श्रृंखला ट्रैकिंग तक, इनावेशन चिकन के उत्पादन और बिक्री के तरीके को बदल रहे हैं. फिर भी, चुनौती यह सुनिश्चित करने में है कि ये प्रगति आपूर्ति श्रृंखला के हर कोने तक पहुंचे, इंटीग्रेटर की हैचरी से लेकर रिटेलर के स्टॉल तक.
ब्रॉयलर इंटीग्रेटर मॉडल, व्यापारियों और खुदरा विक्रेताओं के साथ, भारत के पोल्ट्री उद्योग की रीढ़ है. फिर भी, उद्योग एक चौराहे पर खड़ा है, जो दामों की अस्थिरता, बीमारी के प्रकोप और उपभोक्ता वरीयताओं में बदलाव से चुनौतियों का सामना कर रहा है. इस गतिशीलता देने के लिए हितधारकों को सहयोग, इनोवेशन और स्थिरता को अपनाना चाहिए.
क्या कदम उठाए जा सकते हैं
एक्सपर्ट का कहना है कि भारत के गीले बाजार जहां चिकन को कट करके बेचा जाता है. वहां पर आधुनिक मानकों को पूरा करने के लिए विकसित करने की जरूरत है.
पोल्ट्री आपूर्ति श्रृंखला में परंपरा और आधुनिकता के बीच की खाई को टेक्नोलॉजी के जरिए पाटने की भी जरूरत है.
अधिक समावेशी और ईको सिस्टम बनाने में नीति निर्माता की ओर से अहम भूमिका निभाने की जरूरत है.
एक्सपर्ट का कहना है कि ये ऐसी चीजें हैं जो भारत के पोल्ट्री उद्योग के भविष्य को आकार देंगे. इससे पोल्ट्री सेक्टर को मजबूती मिलेगी.
उपभोक्ताओं, नीति निर्माताओं और उद्योग के खिलाड़ियों के रूप में, हमें एक ऐसी प्रणाली बनाने के लिए मिलकर काम करना चाहिए जो कुशल, समावेशी और टिकाऊ हो.
निष्कर्ष
एक्सपर्ट का कहना है कि अगर हम ऐसा करने में कामयाब रहते हैं तो फिर पोल्ट्री सेक्टर और ज्यादा मजबूत होगा. इस सेक्टर में रोजगार के नए अवसर खुलेंगे. सेक्टर से जुड़े लोगों को फायदा होगा.












