Home डेयरी Animal Fodder: पोषक तत्वों से भरपूर है ये चारा फसल, हे बनाने के लिए सबसे अच्छी
डेयरी

Animal Fodder: पोषक तत्वों से भरपूर है ये चारा फसल, हे बनाने के लिए सबसे अच्छी

सीता नगर के पास 515 एकड़ जमीन में यह बड़ी गौशाला बनाई जा रही है. यहां बीस हजार गायों को रखने की व्यवस्था होगी. निराश्रित गोवंश की समस्या सभी जिलों में है इसको दूर करने के प्रयास किया जा रहे हैं.
प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. रिजका उत्तर-पश्चिम भारत में उगाई जाने वाली एक महत्वपूर्ण चारा फसल है. आमतौर पर यह ज्वार, मक्का, लोबिया, ग्वार आदि के बाद बोई जाती है. रिजका के हरे चारे में पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व होते हैं. वैज्ञानिकों का मत है कि इस फसल की उत्पत्ति एशिया माइनर और ट्रांसकाकेशिया में हुई. रिजका चारे की फसल का सबसे पहला पौधा है, जो इंसानों द्वारा सबसे पहले पहचाना गया. रिजका के चारे में लगभग 18-19 प्रतिशत प्रोटीन होता है यह फसल ‘हे’ बनाने के लिए उपयुक्त है.

राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के मुताबिक रिजका 5.7 या अधिक पीएच मान वाली उर्वरक भूमि पर अच्छा प्रदर्शन करती है. इसकी जड़े 500 मिमी से अधिक गहरी भूमि में सबसे ज्यादा अच्छी तरह उगती हैं.

बुवाई का क्या है तरीका
एक गहरी जुताई के बाद 2-3 बार हैरो चलाकर खेत को समतल बना लेना चाहिए. अच्छे जल निकास के लिए बोने से पहले, खेत को समतल किया जाना बहुत आवश्यक है.

नवम्बर का पहला और दूसरा हफ्ता रिजका की बुवाई के लिए उपयुक्त समय माना जाता है.

रिजका को कई विधियों द्वारा चोया जा सकता है। यदि जमीन हल्की हो, तो इसे कतारों में सीड ड्रिल (बीज बुवाई की मशीन) से 15-20 सेमी. की दूरी पर बोना चाहिए.

इस विधि में लगभग 15 किग्रा. बीज ही लगता है लेकिन यदि जल-निकास का प्रबंध उचित न हो, तो बीज की बुवाई मेड़े बनाकर करनी चाहिए, जिससे अंकुरण अच्छा हो सके. समतल क्यारियों में इसकी बुवाई छिटकवां विधि से भी की जा सकती है.

अच्छी उपज के लिए 20-25 किग्रा. बीज प्रति हैक्टेयर इस्तेमाल करना चाहि. पहली कटाई में उपज बढ़ाने के लिए 8 से 10 किलो ग्राम जई और 1 किलो ग्राम चारा सरसों का बीज मिलाकर रिजका बीज के साथ बोएं.

रिजका को फोस्फोरस तथा पोटाश की अधिक आवश्यकता होती है. शुरुआती वृद्धि के लिए नाइट्रोजन देना भी आवश्यक है, क्योंकि छोटे पौधों में नत्रजन एकत्रित करने की क्षमता आरम्भ में कम होती है.

रिजका की अच्छी उपज के लिए 25-30 किग्रा. नत्रजन तथा 50-60 किग्रा. फोस्फोरस एवं 60 से 80 किग्रा. पोटाश प्रति हैक्टेयर के हिसाब से देनी चाहिए.

नत्रजन, पोटाश व फोस्फोरस की पूरी मात्रा बुवाई के समय छिड़क कर हैरो द्वारा मिट्टी में मिला देनी चाहिए.

गर्मियों में 10-12 दिनों के अंतर पर सिंबाई करनी चाहिए और सर्दियों में 15-20 दिनों के अंतर पर सिंचाई की जा सकती है.

रिजका की पहली कटाई, बुवाई के 55-60 दिन बाद करनी चाहिए. इसके बाद 25-30 दिनों के अंतर पर इसकी कटाई करनी चाहिए.

बीज के लिए जनवरी के बाद कटाई रोक दें. अंतिम कटाई के 10-15 दिनों बाद सिंचाई देनी चाहिए. अधिक कटाईयां कम बीज उपज देती हैं.

निष्कर्ष
एक वर्षीय किस्मों से लगभग 60-65 टन हरा चारा प्राप्त होता है तथा बहु वर्षीय किस्मों से लगभग 80-90 टन हरा चारा प्राप्त होता है. इसलिए पशुओं के लिए ये चारा फसल अच्छा विकल्प है.

Written by
Livestock Animal News Team

Livestock Animal News is India’s premier livestock awareness portal dedicated to reliable and timely information.Every news article is thoroughly verified and curated by highly experienced authors and industry experts.

Related Articles

amul milk snf
डेयरी

Amul: अमूल ने बढ़ाए दूध के दाम, आम जनता पर बढ़ा महंगाई का बोझ

नई दिल्ली. आम आदमी की जेब पर एक बार फिर से महंगाई...

डेयरी

Dairy: तेलंगाना में दूध की खरीद को बढ़ाने में सहयोग करेगा एनडीडीबी, सरकार से हुआ समझौता

नई दिल्ली. राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) ने तेलंगाना राज्य में सहकारी...

पनीर असली है या नकली इसकी पहचान करने का सबसे पहला तरीका यह है कि पनीर के टुकड़े को हाथों से मसलकर देखें.
डेयरी

Dairy: डिटर्जेंट और यूरिया मिलाकर बना रहे पनीर, जांच करने पर नमूनों में मिली 97 फीसद तक मिलावट

नई दिल्ली. राजस्थान की राजधानी जयपुर में लोगों की जिंदगी से खिलवाड़...

Animal Husbandry: Farmers will be able to buy vaccines made from the semen of M-29 buffalo clone, buffalo will give 29 liters of milk at one go.
डेयरी

Dairy Sector: पूर्वोत्तर राज्यों में सहकारी डेयरी नेटवर्क को विस्तारित करेगी सरकार

नई दिल्ली. अगर कहीं भी सरकार सहकारी डेयरी नेटवर्क का विस्तार करती...