नई दिल्ली. मध्य प्रदेश में दूध उत्पादन बढ़ाने और किसानों की इनकम को बढ़ाने के लिए सरकार की तरफ से कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं. उन्हीं योजनाओं में से एक मुख्यमंत्री दुधारू पशुप्रदाय योजना है, जो गरीब तबके के किसानों को ध्यान में रखकर बनाई गई है. ताकि इसका फायदा उठाकर ऐसे किसानों की भी इनकम बढ़ सके. इस योजना के सही संचालन के लिए राज्यपाल मंगुभाई पटेल की ओर से सरकार को कुछ निर्देश दिए गए. उन्होंने कहा है कि मुख्यमंत्री दुधारू पशुप्रदाय योजना, गरीबों के लिए खुशहाली लाने वाली योजना है. इस योजना में गरीबों की अनदेखी सहन नहीं की जाएगी. इसलिए क्रियान्वयन में गरीब के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए.
राज्यपाल पटेल ने ये निर्देश मंगलवार को लोकभवन में आयोजित पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग की संचालित मुख्यमंत्री दुधारू पशुप्रदाय योजना की समीक्षा बैठक में दिए. इस बैठक का आयोजन जनजातीय प्रकोष्ठ ने किया था. इस अवसर पर राज्यमंत्री लखन पटेल, जनजातीय प्रकोष्ठ अध्यक्ष दीपक खांडेकर, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, प्रमुख सचिव पशुपालन एवं डेयरी विकास उमाकांत उमराव आदि उपस्थित रहे.
इस जनजातीय को दायरे में लाने को कहा
राज्यपाल पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री दुधारू पशुप्रदाय योजना प्रदेश के पीवीटीजी जनजातीय जनसंख्या वाले सभी जिलों को योजना के दायरे में लाए जाए. जिससे उन लोगों को भी इसका फायदा पहुंच सके.
इस बैठक में सरकार की ओर राज्यपाल को बताया गया कि योजना में पशु वितरण कार्य की सामुदायिक निगरानी के लिए विशेष प्रावधान किए हैं.
सभी दुग्ध समितियों तथा संघों को माह में 10-10 दिन के अंतराल पर तीन निश्चित तिथियों पर भुगतान की व्यवस्था करने का निर्देश राज्यपाल ने दिया.
सरकार की ओर से बताया गया कि दूध के मूल्य में भी 2 से साढ़े 8 रुपए की वृद्धि की गई है.
योजना के बारे में जानें यहां
इस योजना में आवश्यक संशोधन किए हैं. मिल्क रूट तथा परिवहन की सुगमता वाले ग्रामों में प्राथमिकता आधार पर हितग्राहियों के चयन के साथ ही अन्य ग्रामों में भी हितग्राहियों को लाभान्वित किया जा सकेगा.
चयनित हितग्राहियों को प्रदाय पूर्व तीन दिवस प्रशिक्षण दी जाए. वितरण के बाद 21 दिवस, तीन माह एवं छ माह पर हितग्राही-वार समीक्षा की जाएगी और हितग्राही को परिचयात्मक दौरा भी कराया जाएगा.
सबसे पहले एक ही पशु की अंशदान राशि जमा कराकर हितग्राही को एक ही पशु वितरित की जाए.
पहले पशु का रखरखाव संतोषजनक पाए जाने पर ही उसे दूसरा पशु 3 माह बाद प्रदाय किये जाने की व्यवस्था की गई है.
निष्कर्ष
गौरतलब है कि सरकार की तमाम योजनाएं पशुपालन को बढ़ावा देकर राज्य में दूध उत्पादन को बढ़ाना है. जिससे राज्य के किसानों की इनकम भी बढ़ रही है.









