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Animal News: मोबाइल वेटरनरी यूनिट कर रही घर-घर पशुओं का इलाज, पशुपालकों को मिल रहा फायदा

यह योजना देश के पशुपालकों के घर पहुंचकर गुणवत्तापूर्ण पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करा रही है.
प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली. पशुओं की सेहत और उनके उत्पादन पर सबसे ज्यादा असर उनकी बीमारियों की वजह से होता है. जबकि दूर-दराज इलाकों में पशुपालन करने वाले पशुपालक पशुओं का सही से इलाज भी नहीं करा पाते हैं. इससे उन्हे्ं नुकसान होता है. यही वजह है कि सरकार ऐसी जगहों पर मोबाइल वेटनरी यूनिट वाहन भेजती है, ताकि पशु का सही से इलाज किया जा सके. इसी कड़ी में बिहार के बक्सर जिले के डुमराव प्रखंड के पशुपालकों के पशुओं का इलाज कराने के लिए सरकार द्वारा इसके लिए पशु चिकित्सक व दवा से सुसज्जित मोबाइल वेटनरी यूनिट वाहन पशुपालन विभाग को मुहैया कराया गया है.

जानकारी के लिए बता दें कि इसके लिए टोल फ्री नंबर 1962 भी जारी किया गया है. इस चलंत वाहन में पशु चिकित्सक और सह कर्मी की भी तैनाती की गई है. साथ अन्य अब पंचायतों के किसी भी गांव में पशुओं के स्वास्थ्य बिगड़ने पर चलंत वाहन पहुंचेगी और पशुपालकों के पशुओं को मुफ्त चिकित्सकीय सुविधा प्रदान करेगी.

घर के दरवाजे पर इलाज
बताया जाता है कि पशुधन संजीवनी हेल्पलाइन टोल फ्री नंबर यह राज्यस्तरीय टोल फ्री नंबर है.

यहां पशुपालक फोन कर अपना पता सहित अन्य जानकारी देंगे और यहां से चलंत पशु यूनिट टीम को भेजा जाएगा.

इस यूनिट की खास बात है कि ये पशुपालक के दरवाजे पर पहुंच कर मवेशी का इलाज करेगी. जिससे पशुपालकों को फायदा होगा.

पशुपालकों को पशुओं को इलाज के लिए गाड़ी आदि पर लोड करके अस्तपाल नहीं आना होगा. इससे उनका किराया भी बचेगा.

चिकित्सकों ने बताया कि मवेशी को अगर गंभीर बीमारी है तो अधिकारियों से बात कर उसका इलाज अस्पताल में किया जाएगा.

इस वाहन में सभी तरह की दवाएं, इंजेक्शन, सिरिंज और सर्जिकल सामान भी उपलब्ध है. हर दिन दो गांवों में जाकर टीम इलाज कर रही है.

मोबाइल पर कॉल नहीं आने की स्थिति में भी चलंत पशु चिकित्सालय टीम को मवेशियों का इलाज करना है.

डुमरांव के पशु चिकित्सक डॉ. रवि प्रकाश ने बताया कि कुछ दिनों पूर्व फागुटोला गांव निवासी किसान उपेंद्र सिंह की गाय ने एक स्वस्थ दिखने वाले बछड़े को जन्म दिया.

बछड़ा अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो पा रहा था. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पशुपालक ने तुरंत पशु चिकित्सालय यूनिट 1962 कॉल सेंटर से संपर्क किया.

सूचना मिलते ही चिकित्सकीय टीम मौके पर पहुंची और बछड़े की जांच की. लक्षणों के आधार पर बीमारी की पहचान कर आवश्यक उपचार शुरू किया.

सही इलाज मिलने से बछड़े की हालत में तेजी से सुधार होने लगा. इलाज के महज एक दिन बाद ही बछड़ा अपने पैरों पर स्वयं खड़ा होने लगा और सामान्य गतिविधियां करने लगा.

निष्कर्ष
उन्होंने पशुपालकों से अपील किया कि पशुओं में किसी भी असामान्य लक्षण के दिखने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें, ताकि समय रहते उपचार संभव हो सके. सरकार ने ये सुविधा दी है, जिसका फायदा उठाना चाहिए.

Written by
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