Home पशुपालन Scheme: एमपी की गौशालाओं में गोबर से सीएनजी बनाने और जैविक खाद तैयार पर होगा फोकस
पशुपालनसरकारी स्की‍म

Scheme: एमपी की गौशालाओं में गोबर से सीएनजी बनाने और जैविक खाद तैयार पर होगा फोकस

मध्य प्रदेश के एक गौशाला में चारा खाती गायें.

नई दिल्ली. भारतीय संस्कृति में गाय का स्थान सिर्फ एक पशु का नहीं, बल्कि माता का रहा है. यही वजह है कि मध्य प्रदेश में गोवंश के संरक्षण के लिए बजट और नीतियों में बड़े बदलाव किए गए हैं. जिसके तहत अब सरकार गोशालाओं के लिए प्रति गाय प्रतिदिन 40 रुपये की राशि प्रदान कर रही है. स्वावलंबी मॉडल गौशालाओं के तहत सरकार 130 एकड़ जमीन और 5000 गायों के पालन के साथ सीएनजी और जैविक खाद उत्पादन मॉडल पर काम कर रही है. ये बातें पशुपालन और डेयरी राज्‍यमंत्री स्‍वतंत्र प्रभार लखन पटेल ने एक कार्यक्रम के दौरान कही.

कार्यक्रम के इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश में गौ-संवर्धन एवं संरक्षण को लेकर विशेषज्ञों, जन प्रतिनिधियों और युवाओं से संवाद किया. कार्यक्रम के दौरान गौ-संरक्षण, जैविक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करने पर चर्चा की गई. राज्‍यमंत्री ने कहा मध्य प्रदेश सरकार ने अब पशुपालन एवं डेयरी विभाग का नाम बदलकर गौपालन पशुपालन एवं दुग्ध विकास विभाग कर दिया है.

क्या है योजना, डिटेल में जानें
उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार द्वारा निराश्रित गौवंश के संरक्षण और गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से एक योजना तैयार की गई है.

इसके तहत लगभग 130 एकड़ भूमि निवेशकों को उपलब्ध कराई जाएगी. जहां न्यूनतम 5 हजार गौमाताओं के साथ बड़े स्तर पर आधुनिक गौशालाएं विकसित की जाएंगी.

इस योजना का उद्देश्य गौशालाओं को केवल आश्रय स्थल नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से स्वावलंबी इकाइयों के रूप में विकसित करना है.

इसके लिए गौशालाओं में सीएनजी उत्पादन, जैविक खाद निर्माण, दुग्ध उत्पादन, ब्रीडिंग और सोलर ऊर्जा जैसे बहुआयामी कार्य किए जाएंगे.

विशेष रूप से गोबर से सीएनजी बनाने और जैविक खाद तैयार करने पर जोर दिया जाएगा, जिससे आय के स्थायी स्रोत विकसित होंगे.

राज्यमंत्री पटेल ने कहा कि 5 हजार गौमाताओं की क्षमता वाली इन गौशालाओं में भविष्य में 15 से 20 हजार तक गौवंश रखने की व्यवस्था की जाएगी.

इससे उत्पादन और आय में वृद्धि होगी और गौशालाएं पूरी तरह आत्मनिर्भर बन सकेंगी.

प्रदेश के 32 जिलों में इस योजना की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जबकि 7 जिलों में टेंडर जारी किए जा चुके हैं. दमोह जिले में इस मॉडल की पहली गौशाला स्थापित की जा रही है.

यह मॉडल पर्यटन को भी बढ़ावा देगा और प्रदेश में आवारा गौवंश की समस्या के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.

निष्कर्ष
बताया जा रहा है कि इससे आने वाले समय में बेसहारा पशुओं की ​समस्या भी खत्म होगी और इसका फायदा किसानों को भी होगा.

Written by
Livestock Animal News Team

Livestock Animal News is India’s premier livestock awareness portal dedicated to reliable and timely information.Every news article is thoroughly verified and curated by highly experienced authors and industry experts.

Related Articles

सीता नगर के पास 515 एकड़ जमीन में यह बड़ी गौशाला बनाई जा रही है. यहां बीस हजार गायों को रखने की व्यवस्था होगी. निराश्रित गोवंश की समस्या सभी जिलों में है इसको दूर करने के प्रयास किया जा रहे हैं.
पशुपालन

World Veterinary Day: 2030 तक एफएमडी और ब्रूसेलोसिस बीमारी देश से हो जाएगी खत्म !

नई दिल्ली. सरकार पशुपालन को बढ़ावा देना चाहती है और इसमें सबसे...

Animal Husbandry: Farmers will be able to buy vaccines made from the semen of M-29 buffalo clone, buffalo will give 29 liters of milk at one go.
पशुपालन

Animal Husbandry: पशु के लिए सुरक्षा कवच है खनिज मिश्रण, आहार में प्रोटीन भी है अहम

नई दिल्ली. पशुपालन में अगर ज्यादा फायदा कमाना है तो इस बात...

पशुपालन

Animal News: पशु पॉलीथीन खा ले तो भूख न लगना और पेट दर्द जैसी समस्या होती है, जान भी जा सकती है

नई दिल्ली. अक्सर आपने बेसहारा पशुओं को सड़क किनारे पॉलीथीन में घरों...

सदैव स्वस्थ एवं सुडौल शरीर वाले पशु ही खरीदना चाहिए.
सरकारी स्की‍म

Government Scheme: नंदिनी कृषक समृद्धि योजना का फायदा उठाकर बन गए बड़े डेयरी कारोबारी

नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश सरकार भी पशुपालन को बढ़ावा देने का काम...