नई दिल्ली. मछली पालन और इससे किसानों की इनकम को बढ़ाने के लिए सरकार की तरफ से सबसे अहम काम प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) की शुरुआत करना शामिल है. फिशरीज सेक्टर विकास के तमाम अवसरों की पहचान करते हुए केंद्र सरकार ने 2019-20 में पीएमएमएसवाई की शुरुआत की थी. इससे मछली उत्पादन और उत्पादकता और गुणवत्ता में सुधार भी किया गया. योजना के जरिए नई टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल, बुनियादी ढांचे को मजबूती देने का भी काम किया गया. जिससे सफलता भी मिली है और फिशरीज सेक्टर दिन रात तरक्की कर रहा है.
आपको बता दें कि इस योजना की औपचारिक रूप से शुरुआत मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के मत्स्य पालन विभाग की ओर से 10 सितंबर 2020 को की गई थी. तब से लेकर अब तक लगातार इस योजना से फिशरीज सेक्टर को कई फायदे हुए हैं.
बढ़ा दी गई योजना की मियाद
जब योजना की शुरुआत की गई थी तो 20,050 करोड़ रुपये के कुल निवेश के साथ इसे मंजूरी दी गई थी.
सरकार ने 2020-21 से 2024-25 तक पांच वर्षों की अवधि के लिए 9,407 करोड़ रुपये इसके तहत दिए.
वहीं इस योजना में राज्य सरकारों से 4,880 करोड़ रुपये मिले और लाभार्थियों के योगदान के रूप में 5,763 करोड़ रुपये शामिल हैं.
वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने मौजूदा योजना के डिजाइन और फंडिंग के तौर-तरीके के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 तक पीएमएमएसवाई के विस्तार पर सहमति व्यक्त की है.
22 जुलाई 2025 तक मत्स्य पालन विभाग ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 21,274.16 करोड़ रुपये की मत्स्य विकास परियोजनाओं को भी मंजूरी दी.
यह मंजूरी राज्य सरकारों, केंद्रशासित क्षेत्रों और विभिन्न कार्यान्वयन एजेंसियों से प्राप्त प्रस्तावों पर आधारित हैं. स्वीकृत राशि में से केंद्र का हिस्सा 9,189.79 करोड़ रुपये है.
इन परियोजनाओं के चलाने के लिए अब तक विभिन्न राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और अन्य एजेंसियों को 5,587.57 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं.
गौरतलब है कि इस योजना से मिले फायदों के चलते भारत 2024-25 में 195 लाख टन मछली उत्पादन करके इस क्षेत्र में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक बन गया.
इस योजना की वजह से 2025 तक मछली पालन की उत्पादकता में 3 से 4.7 टन प्रति हेक्टेयर के राष्ट्रीय औसत से वृद्धि दर्ज की गई है.
दिसंबर, 2024 तक 55 लाख के लक्ष्य को पार करते हुए रोजगार के 58 लाख अवसर सृजित किए गए.
2020-21 से 2024-25 तक स्वीकृत 4,061.96 करोड़ रुपये के माध्यम से 99,018 महिलाओं का सशक्तीकरण हुआ.
निष्कर्ष
एक्सपर्ट का कहना है कि इस योजना से फिशरीज सेक्टर को फायदा हुआ है और किसानों की इनकम में भी इजाफा हुआ है.










