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Dairy Animal: FMD समेत इन बीमारियों की रोकथाम के लिए सरकार ने उठाए कई कदम, यहां पढ़ें डिटेल

गर्मियों में पशु बहुत जल्द बीमार होते हैं. अगर ठीक से इनकी देखरेख कर ली जाए तो हम पशुओं को बीमार होने से बचा सकते हैं.
प्रतीकात्मक फोटो.

नई दिल्ली. केंद्रीय मंत्री केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने बताया कि सरकार ने अब तक खुरपका और मुंहपका रोग (एफएमडी), ब्रुसेलोसिस, पीपीआर और क्लासिकल स्वाइन ज्वर (सीएसएफ) के लिए टीकाकरण कार्यक्रम लागू किया है और अब तक एफ़एमडी के लिए 85 करोड़ टीकाकरण किया गया है. जिससे देश भर में 7.09 करोड़ किसानों को फायदा हुआ है. ब्रुसेलोसिस नियंत्रण कार्यक्रम के तहत लगभग 3.92 करोड़ बछड़ों और बछड़ियों को ब्रुसेलोसिस के लिए टीका लगाया गया है. अब तक 14.66 करोड़ पशुओं को पीपीआर और 55 लाख से अधिक पशुओं को क्लासिकल स्वाइन बुखार के लिए टीका लगाया जा चुका है.

उन्होंने बताया कि पहली बार भारत सरकार पूरे देश में मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों (एमवीयू) की स्थापना कर रही है. पशुपालन कार्यक्रम में लगे 10 करोड़ किसानों को उनके घर पर पशुधन हेल्थ सेवाएं उपलब्ध होंगी. 27 राज्यों में 3165 एमवीयू चलाई जाएगी.

क्षेत्र में क्रेडिट प्रवाह को बढ़ाना
केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन ने बताया कि वर्ष 2019 में, पहली बार सरकार ने पशुपालन किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) की सुविधाओं का विस्तार किया है. ताकि उन्हें उनकी कार्यशील पूंजीगत आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिल सके. आत्मनिर्भर भारत अभियान प्रोत्साहन पैकेज के हिस्से के रूप में, वर्ष 2020 में 15,000 करोड़ रुपये का पशुपालन बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए अवसंरचना विकास निधि (एएचआईडीएफ) लॉन्च किया गया था. एएचआईडीएफ डेयरी, प्रजनन, मांस प्रोसेसिंग, पशु चारा संयंत्रों की स्थापना के लिए अवसंरचना की स्थापना में निवेश की सुविधा देता है.

420 परियोजनाओं को दी मंजूरी
एएचआईडीएफ की सफलता को ध्यान में रखते हुए, पहले डेयरी प्रोसेसिंग के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए अवसंरचना विकास निधि को दिनांक 1 फरवरी 2024 को एएचआईडीएफ में मिला दिया गया है. अब निधि का कुल आकार 29110 करोड़ रुपये है. आज की तारीख तक योजना के अंतर्गत 11,500 करोड़ रुपये की परियोजना लागत से कुल 420 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है.

राष्ट्रीय पशुधन मिशन
उन्होंने बताया कि सरकार राष्ट्रीय पशुधन मिशन चला रही है. जिसका लक्ष्य पोल्ट्री, भेड़, बकरी, आहार और चारा विकास के साथ-साथ नस्ल सुधार कर नए संगठनों का विकास करना है. मिशन पशुधन क्षेत्र के सभी तरह के विकास के लिए घोड़े, गधे, खच्चर और ऊंट पर भी ध्यान केंद्रित करता है. किसी भी तरह का खतरा आने पर योजना के तहत पशुधन बीमा के लिए सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है.

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