नई दिल्ली. पशुपालक गोवंश का पालन करें, इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार उनको लगातार प्रोत्साहन दे रही है. 25 प्रजाति की देशी नस्ल की गायों के संरक्षण, संवर्धन और दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार ने पहल की है. इसके लिए शुरू की जाने वाली “नंदनी कृषक समृद्धि योजना” के तहत बैंकों के लोन पर सरकार पशुपालकों को 50 फीसदी सब्सिडी देगी. इसी क्रम में सरकार ने अमृत धारा योजना भी लागू की है. इसके तहत दो से 10 गाय पालने पर सरकार बैंकों के जरिये 10 लाख रुपये तक अनुदानित लोन आसान शर्तों पर मुहैया कराएगी. योजना के तहत तीन लाख रुपये तक अनुदान के लिए किसी गारंटर की भी जरूरत नहीं होगी.
हाल ही प्रस्तुत बजट में सरकार ने छुट्टा गोवंश के संरक्षण के लिए 2000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया. इसके पहले अनुपूरक बजट में भी इस बाबत 1001 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था. यही नहीं बड़े गोआश्रय केंद्र के निर्माण की लागत को बढ़ाकर 1.60 करोड़ रुपये कर दिया है. ऐसे 543 गोआश्रय केंद्रों के निर्माण की भी मंजूरी योगी सरकार ने दी है. मनरेगा के तहत भी पशुपालकों को सस्ते में कैटल शेड और गोबर गैस लगाने की सहूलियत दी जा रही.
प्राकृतिक खेती के सपोर्ट करेंगे गोआश्रय केंद्र
सरकार की मंशा है कि सभी गोआश्रय केंद्र अपने सह उत्पाद (गोबर, गोमूत्र) के जरिये स्वावलंबी बनें. साथ ही जन, जमीनकी सेहत के अनुकूल इकोफ्रेंडली प्राकृतिक खेती का आधार भी. दरअसल जन, जमीन और जल की सेहत योगी सरकार के लिए प्राथमिकता है. इसका प्रभावी हल है प्राकृतिक खेती है. ऐसी खेती जो रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों से मुक्त हो. गोवंश इस खेती का आधार बन सकते हैं. उनके गोबर और मूत्र को प्रोसेसिंग कर खाद और कीटनाशक के रूप में प्रयोग से ही ऐसा संभव है. इससे पशुपालकों को दोहरा लाभ होगा. खुद और परिवार की सेहत के लिए दूध तो मिलेगा ही जमीन की सेहत के लिए खाद और कीटनाशक भी मिलेगा। इनके उत्पादन से गोआश्रय भी क्रमशः स्वावलंबी हो जाएंगे. इस तरह ये गोआश्रय प्राकृतिक खेती के आधार बन जाएंगे. इकोफ्रेंडली इस खेती पर सरकार का खासा जोर भी है.
बुदेलखंड में हैं सबसे ज्यादा बेसहारा पशु
यही वजह है कि जिस बुंदेलखंड में सर्वाधिक बेसहारा गोवंश हैं, उसके सभी सात जिलों को इस खेती के लिए सबसे पहले प्राथमिकता दी गई. मालूम हो कि वैश्विक महामारी कोरोना के बाद पूरी दुनिया स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हुई है. हर जगह स्थानीय और प्राकृतिक खेती से पैदा ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग बढ़ी है. ऐसे उत्पादों का निर्यात बढ़ने से अन्नदाता किसान खुशहाल होंगे. खास बात यह है कि प्राकृतिक खेती से जो भी सुधार होगा वह टिकाऊ (सस्टेनेबल), ठोस और स्थायी होगा. इन्हीं वजहों के नाते योगी सरकार छुट्टा गोवंश के संरक्षण का हर संभव प्रयास कर रही है. हाल ही में महाकुंभ के दौरान इस विषय पर पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्रालय ने भी गहन चर्चा की है. साथ ही इस बाबत रणनीति भी बनाईं.












