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Buffalo: किस समय गाभिन भैंस को सबसे ज्यादा होती है पोषक तत्व की जरूरत, न मिले तो क्या होता है नुकसान

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प्रतीकात्मक फोटो:

नई दिल्ली. गर्भधारण से भैंस के ब्याने तक के समय को गर्भकाल कहा जाता है. भैंस में गर्भकाल 310 से 315 दिन तक होता है. गर्भधारण की पहली पहचान भैंस में मदचक्र का बंद हो जाना है. वहीं गर्भाधान के 21वें दिन के आसपास भैंस को दोबारा मद में ना आना गर्भधारण का दूसरा संकेत माना जाता है. जैसे ही भैंस गर्भधारण कर ले, किसान भाइयों को चाहिए कि वह गर्भाधान के 2 महीने बाद डॉक्टर से गर्भ की जांच जरूर करवा लें. क्योंकि गाभिन भैंस की देखभाल करना बेहद अहम है. इसके देखभाल में तीन पॉइंट्स पर जरूर ध्यान देना चाहिए पोषक प्रबंधन, आवास प्रबंधन और सामान्य प्रबंधन.

एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि अगर गाभिन भैंस में इन तीनों प्रमुख बातों पर ध्यान दे दिया गया तो गर्भधारण के दौरान भैंस को किसी भी तरह की कोई दिक्कत नहीं होगी. जो बच्चा पैदा होगा, वह भी स्वस्थ होगा. अगर भैंस बछड़ी को जन्म देती है तो आगे चलकर इस बछड़ी को दूध उत्पादन करने में किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं आएगी. इससे पशुपालक का फायदा और ज्यादा बढ़ जाएगा. इसलिए जरूरी है कि गर्भधारण के दौरान खास निगरानी की जाए.

इस वक्त होती है ज्यादा पोषक तत्व की जरूरत
एनिमल एक्सपर्ट डॉक्टर इब्ने अली का कहना है कि गाभिन भैंस की देखभाल का प्रमुख तथ्य यह है कि भैंस को अपने जीवन यापन को दूध देने के लिए, बच्चों के विकास के लिए अतिरिक्त जरूरी पोषक तत्वों की जरूरत होती है. उसे ऊर्जा की भी जरूरत होती है. गर्भावस्था के आखिरी 3 महीने में बच्चों की सबसे ज्यादा बढ़वाड़ होती है. किसी भी भैंस को आठवें, नवें और दसवें महीने में ज्यादा पोषक तत्व आहार की जरूरत होती है. इस समय भैंस अगले ब्यात में ज्यादा दूध देने के लिए अपना वजन बढ़ाती है. जबकि पिछले ब्यात में हुई पोषक तत्वों की कमी को पूरा करती है. यदि इस समय खानपान में कोई कमी रह जाती है तो कई तरह की परेशानियां भैंस को हो सकती हैं.

क्या खिलाना चाहिए, पढ़ें यहां
डॉ. इब्ने अली का कहना है कि अगर भैंस के खानपान में कमी रह जाती है तो भैंस बच्चा कमजोर पैदा करती है. वहीं भैंस का बच्चा कई बार अंधा भी रह सकता है. भैंस फूल दिखा सकती है. प्रसव के बाद दुग्ध ज्वर की भी समस्या हो सकती है. वहीं भैंस की जेर भी रुक सकती है. बच्चेदानी में मवाद पड़ सकता है और ब्यात का दूध उत्पादन भी काफी कम हो सकता है. गर्भावस्था के समय भैंस को संतुलित और सुपाच्य खाना खिलाना चाहिए. दाने में 40 से 50 ग्राम खनिज लवण मिश्रण अवश्य मिलना चाहिए.

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