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Mid-day-Meal में अंडा शामिल करने से क्या होगा फायदा, क्यों हो रही है इसकी मांग

उच्च तापमान के दौरान, पक्षी तापमान को नियंत्रित करने के लिए अपने व्यवहार और शारीरिक कार्यों में बदलाव करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप भोजन का सेवन कम हो जाता है और पानी की खपत बढ़ जाती है. इससे मल पतला हो सकता है और मूत्र की मात्रा बढ़ सकती है, जिससे कोक्सीडियन बीजाणुओं के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हो सकता है. तेजी से हांफने से ऑक्सीडेटिव तनाव होता है, जिससे पक्षी माइकोप्लाज्मोसिस जैसे संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं.
प्रतीकात्मक फोटो: Livestock animal news

नई दिल्ली. देश में कुछ राज्य सरकारों ने अपने यहां अंडे को मिड-डे-मील (एमडीएम) में शामिल कर दिया है. यानि अब दोपहर के भोजन में छात्रों को अंडा भी दिया जा रहा है. यही वजह है कि अन्य राज्यों जहां पर अंडा एमडीएम में शामिल नहीं है वहां करने के लिए पोल्ट्री फार्मर्स मांग कर रहे हैं. इस संबंध में राज्यों की पोल्ट्री एसोसिएशन इस कारोबार को बचाने के लिए इसे बेहहतर कदम मान रही है. एसोसिएशन का कहना है कि अगर ऐसा होता है तो इससे अंडे की डिमांड कभी कम नहीं होगी. जबकि गर्मी में अंडे की डिमांड हर जगह ही कम हो जाती है. इससे अंडे का दाम भी अच्छे मिलेंगे. पोल्ट्री एसोसिएशन लगातार अपने-अपने राज्यों की सरकारों से मांग कर रही है कि एमडीएम में अंडे को भी शामिल किया जाए.

गौरतलब है कि देश में औसतन रोजाना करीब 10 करोड़ स्कूली बच्चे मिड-डे-मील (एमडीएम) के जरिए परोसे जाने वाले भोजन को खाते हैं. जबकि नई शिक्षा नीति के तहत अब उन्हें स्कूल में गर्मा-गरम नाश्ता देने की भी बात कही जा रही है. जानकार कहते हैं कि रोजाना का नाश्ता कैसा होगा यह सुझाव एम्स, दिल्ली की कमेटी ने सरकार को दिया है. वहीं नई शिक्षा नीति की सिफारिशों पर गौर किया जाए तो सरकारी स्कूलों के कक्षा एक से आठवी तक में पढ़ने वाले बच्चों को नाश्ता दिया जा सकता है.

इस नाश्ते में किसी दिन मूंगफली, चना और गुड़ रखा गया है तो किसी एक दिन बच्चों को अंडा-दूध भी देने का प्रस्ताव है. वहीं स्कूल के किचन में हलवा बनाने का भी सुझाव दिया गया है. एक आंकड़े पर गौर किया जाए तो देशभर में एमडीएम खाने वाले बच्चों की संख्या 13 करोड़ से ज्यादा है. जबकि हर रोजाना एमडीएम खाने वाले बच्चों की संख्या 10 करोड़ बताई जा रही है.

दरअसल, सरकारी स्कूलों के बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखने के मकसद के तहत एमडीएम की शुरुआत की गई थी. अब इसमें नाश्ता भी शामिल करने की बात कही जा रही है. यही वजह है कि केन्द्र सरकार 2016 से इस दिशा में काम कर रही थी. एक सर्वे रिपोर्ट में ये बात सामने आई है कि 30 से 40 फीसदी से अधिक बच्चे दोपहर का भोजन के लिए ही स्कूल जाते हैं. इसी के चलते नाश्ता शामिल करने की योजना भी है ताकि और बच्चों को स्कूल लाया जा सके और उन्हें पौष्टिक आहार भी दिया जा सके, जिससे उन्हें कुपोषण का शिकार होने से भी बचाया जा सके. इसी कारण नाश्ते में पौष्टिक आहार को शामिल करने की बात कही गई है.

वहीं एम्स की कमेटी ने अपनी सिफारिश में कहा है कि नाश्ते के मैन्यू को कुछ इस तरह से तैयार किया है कि बच्चों को ज़्यादा से ज़्यादा पौष्टिक भोजन मुहैया हो सके. इसी के चलते अंडे को नाश्ते में शामिल कर दिया गया है. वहीं इलाकाई खान-पान के आधार पर बच्चों को अंडा दिया जा सकता है. जानकार कहते हैं कि नॉर्थ-ईस्ट के स्कूलों में एमडीएम में अंडा शामिल है. नाश्ते के इस मैन्यू में राज्य सरकार चाहें तो बदलाव कर सकती हैं. इस बदलाव में ओर अधिक आइटम जुड़ सकते हैं.

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