Home मछली पालन Fish Farming: तालाब में नहीं हो रही है मछलियों की ग्रोथ तो इस जांच के बाद खाने में ये सब खिलाएं
मछली पालन

Fish Farming: तालाब में नहीं हो रही है मछलियों की ग्रोथ तो इस जांच के बाद खाने में ये सब खिलाएं

Interim Budget 2024
प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. कई बार ऐसा होता है कि तालाब में मछलियों ग्रोथ उतना नहीं होती है, जितनी होनी चाहिए. एक्सपर्ट कहते हैं कि तालाब में मछली की ग्रोथ अगर प्रभावित हो रही हो तो प्‍लैंकटन जांच से तालाब में मछलियों के लिए उपयुक्त भोजन का पता लगाते हैं. एक अच्छे तालाब में प्‍लैंकटन की मात्रा जांच करने के लिए पूरे तालाब के जगह-जगह से 50 लीटर पानी लेकर प्‍लैंकटन जाल में डालते हैं. प्‍लैंकटन की मात्रा 2 मिली से कम है तो ऊपर से भोजन डालने की जरूरत पड़ती है. अगर खाद के इस्तेमाल से मछलियों को तालाब में प्राकृतिक भोजन मिल रहा है और इनकी फिर भी ग्रोथ नहीं हो रही है तो प्राकृतिक फूड के अलावा कृत्रिम फूड भोजन भी दिया जाना चाहिए. इसे संचय के तीसरे दिन से देना जरूरी होता है.

एक्सपर्ट कहते हैं कि कृत्रिम भोजन के रूप में सरसों, राई या मूंगफली की खल्ली तथा चावल का गुण्डा (राईस ब्रान) या गेहूं का चोकर बराबर-बराबर मात्रा (1:1) में मिलाकर संचित मछलियों के कुल वजन का 2-3 फीसदी की दर से दिया जाता है. जाड़े के दिनों खासकर दिसम्बर एवं जनवरी में 1 फीसदी की दर से देना चाहिए. फरवरी से फिर से 2-3 फीसदी करें. एक हेक्टेयर फसल के लिए लगभग 20 टन भोजन की आवश्यकता होती है. मछलियों को हर दिन में एक बार कृत्रिम भोजन जरूर दें. भोजन देने का समय एवं स्थान प्रतिदिन एक ही रखें. खाना सुबह में देना ज्यादा बेहतर होता है. शाम 4 बजे के बाद कभी भी न दें.

ताकि बर्बाद न हो खाना
एक्सपर्ट के मुताबिक भोजन देने के लिए भोजन का मिश्रण तैयार कर तालाब में बेतरतीब ढंग से न छीटें. बड़ी मछलियों को भोजन देने से पहले आहार को पानी में भिगोकर अच्छी तरह गूँथ कर उनका गोला बनाकर तालाब में लटके में देना चाहिए. बड़े तालाबों में इसे छेद वाली पौलीथिन या जूट के बोरे में डालकर पानी में लटकाया जा सकता है. इससे मछलियां बड़ी पसंद से आकर भोजन करती हैं तथा भोजन बर्बाद नहीं हो पाता है. ग्रास कार्प को जलीय पौधे, जैसे हाईड्रिला, नाजा, सिरेटोफाइलम, नेपियर घास, बरसीम, सब्जियों के पत्ते इत्यादि दिये जाते हैं.

इस कंडीशन में न दें सप्लीमेंट
बताते चलें कि तालाब में भोजन ज्यादा हो जाने के कारण पानी में कभी-कभी शैवालपुंज, एलगल ब्लूमद्ध आदि पनप जाते हैं. इसके चलते तालाब का पानी हरा दिखाई देने लगता है. तालाब के पानी के हरा हो जाने की स्थिति में सप्लीमेंट खाना देना बंद कर देना चाहिए. प्रमोशन के दौरान पानी के पीएच 8.0 के आसपास तापमान 25-32 डिग्री बनाए रखना चाहिए. वहीं घुलने वाली ऑक्सीजन 5 से 8 पीपीएम, कठोरता 150 पीपीएम से कम और 40 पीपीएम से अधिक कैल्शियम के रूप में तथा क्षारीयता 50 से 100 पीपीएम के बीच बनाए रखना चाहिए.

Written by
Livestock Animal News Team

Livestock Animal News is India’s premier livestock awareness portal dedicated to reliable and timely information.Every news article is thoroughly verified and curated by highly experienced authors and industry experts.

Related Articles

मछली में कुछ बीमारियां ऐसी हैं जो पूरे मछली के बिजनेस को नुकसान पहुंचा सकती हैं.
मछली पालन

Fish Farming In Bihar: बिहार में मछली पालन से बढ़ावा देकर पलायन रोकेगी बिहार सरकार

नई दिल्ली. बिहार में मछली पालन और जल कृषि की असीम संभावना...

Fisheries,Fish Farming, Fish Farming Centre, CMFRI
मछली पालन

El Nino: तालाब की मछलियों पर भी मंडरा रहा रहा है अल नीनो का खतरा

नई दिल्ली. देश में अल नीनो का खतरा मंडरा रहा है. समुद्र...

मछली पालन

Fisheries: 31. 21 करोड़ के निवेश से बिहार में बनेगा इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क, सीएम और मंत्री ने रखी आधारशिला

नई दिल्ली. केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री...