Home मछली पालन Fish Farming: क्या मछली फीड और फार्मिग से जुड़ी ये बाते जानते हैं आप, प्रोडक्शन पर पड़ता है इसका असर
मछली पालन

Fish Farming: क्या मछली फीड और फार्मिग से जुड़ी ये बाते जानते हैं आप, प्रोडक्शन पर पड़ता है इसका असर

तालाब में खाद का अच्छे उपयोग के लिए लगभग एक सप्ताह के पहले 250 से 300 ग्राम प्रति हेक्टेयर बिना बुझा चूना डालने की सलाह एक्सपर्ट देते हैं.
तालाब में मछली निकालते मछली पालक

नई दिल्ली. मछली पालन में फीड, पानी और खाद का भी ध्यान रखना होता है. तभी मछलियों की ग्रोथ तेजी के साथ होती है और इसका रिजल्ट भी अच्छा आता है. जल्दी ग्रोथ होने से मछलियों का बाजार में दाम भी अच्छा मिलता है. एक्सपर्ट कहते हैं कि मछली के फीड, फार्मिंग से जुड़ी कुछ चीजें हैं, जिनका ध्यान रखना जरूरी होता है. क्योंकि इसका सीधा संबंध मछलियों के प्रोडक्शन से होता है. अगर जरूरत के मुताबिक इसपर ध्यान दिया जाए तो फिर ​मछलियों की ग्रोथ बढ़ती है और मुनाफा ज्यादा होता है. आइए इसके बारे में जानते हैं.

फीड मैनेजमेंट की बात करें तो रियरिंग तालाब में फीड के रूप में स्थानीय उपलब्ध खाद सामग्री जैसे धान का कुंडा, गेहूं का कुंडा, सरसों की खल्ली, फिश मील, सोयाबिन, विटामिन आदि का उपयोग किया जा सकता है.

पहले महीने कितना देते हैं फीड
फीड की मात्रा पल रही मछली के नमूना के टेस्ट के बाद औसत वजन, अनुमानित सरवाइवल प्रतिशत एवं कुल भार के वजन के अनुसार बढ़ाते हैं. पहले महीने में भोजन की शुरुआत के वजन का 8-10 प्रतिशत देते हैं और अगले दो महीने में मछली के वजन का 6-8 प्रतिशत देते हैं. हर दिन के कुल भोजन को 2 बराबर भाग में बांटते हैं और सुबह एवं शाम को एक वक्त में भोजन देते हैं. फीड के एक भाग को पाउडर के रूप में तालाब के सतह पर छिड़कते हैं ताकि ऊपरी सतह पर रहने वाली मछलियों को पर्याप्त भोजन मिल सके. अगर तालाब में ग्रास कार्प का संचयन है तो उसके लिए डकविड या डुमरी घास को खिलाते हैं.

हेल्थ और वॉटर मैनेजमेंट
हेल्थ और पानी के बेहतर मैनेजमेंट के लिए नियमित रूप से खाद तथा चूने का प्रयोग करते रहना चाहिए. तालाब की गहराई 1.2 से 1.5 मीटर भी संतुलित रखना चाहिए. जिन तालाबों में संचयन ज्यादा है उसमें पानी बदलते रहना चाहिए जिससे कि तालाब में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा बनी रहे.

फिश प्रोडक्शन
2-5 से.मी. की मछली 2-3 माह में बढ़कर 8-10 से.मी. को हो जाती है. वहीं फिंगर्स को तालाब से निकालने के लिए बेहतर है कि, बड़ी जाल का उपयोग करना चाहिए. इसका इस्तेमाल फसल निकालने के लिए सुबह में किया जाता है. आमतौर पर सरवाइवल 60-70 प्रतिशत होती है. जिसे बेहतर प्रबंधन से बढ़ाया जा सकता है. फिंगर्स को निकालना है तो एक दिन पहले खाना नहीं देना चाहिए.

इयरलिंग
फिंगरलिंग को हम एक साल के लिए बहुत अधिक संचयन दर 75,000-1,00,000 प्रति हेक्टेयर पर कम भोजन के साथ रखते हैं. जिस कारण उन मछलियों की ग्रोथ कम होती है. इस मेथड से हम सालों भर इयरलिंग की उपलब्धता बनाये रख सकते हैं. ऐसे इयरलिंग को 3-4 माह के लिए ग्री आउट तालाब में रखकर 1-1.5 किलोग्राम वजन की मछली का प्रोडक्शन हासिल किया जा सकता है.

Written by
Livestock Animal News Team

Livestock Animal News is India’s premier livestock awareness portal dedicated to reliable and timely information.Every news article is thoroughly verified and curated by highly experienced authors and industry experts.

Related Articles

मछली पालन

Fish Farming: इस मौसम में तालाब में होती है ऑक्सीजन की कमी, पहचान कर तुरंत करें उपाय

नई दिल्ली. मछलियों के लिए बनाए गए तालाब में अगर ऑक्सीजन की...

तालाब में खाद का अच्छे उपयोग के लिए लगभग एक सप्ताह के पहले 250 से 300 ग्राम प्रति हेक्टेयर बिना बुझा चूना डालने की सलाह एक्सपर्ट देते हैं.
मछली पालन

Fish Farming: मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए गर्मियों में सही देखभाल का तरीका है बेहद आसान

नई दिल्ली. उत्तरी भारत में मार्च अप्रैल से अक्टूबर नवंबर मछली पालन...

तालाब में खाद का अच्छे उपयोग के लिए लगभग एक सप्ताह के पहले 250 से 300 ग्राम प्रति हेक्टेयर बिना बुझा चूना डालने की सलाह एक्सपर्ट देते हैं.
मछली पालन

Fisheries: फिशरीज में एक्सपोर्ट को बढ़ाने के लिए 34 मछली उत्पादन और प्रोसेसिंग कलस्टर घोषित किए

नई दिल्ली. मत्स्य एवं विकास मंत्रालय के मत्स्य पालन विभाग के सचिव...