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Kashmir Favorolla: कश्मीर फेवरोला एक देशी मुर्गी, जानें इसकी खासियत

ये कश्मीर की पाई जाने वाली मुर्गी की नस्ल है.
कश्मीर फेवरोला.

नई दिल्ली. आज पूरे देश में मुर्गी पालन का बिजनेस लगातार बढ़ रहा है. देश में दो तरह से मुर्गी पाली जाती हैं. एक तो बैकयार्ड और दूसरी पोल्ट्री फार्म में. पोल्ट्री फार्म में बड़े पैमाने पर मुर्गी पालन किया जाता है. वहीं बैकयार्ड पोल्ट्री पर छोटे स्तर पर मुर्गियां पाली जाती हैं. देश में मुर्गियों की कई नस्लें हैं. हर राज्य में मुर्गियों का पालन किया जाता है. चाहे पोल्ट्री के रूप में हो या फिर बैकयार्ड के रूप में. आज हम बात कर रहे हैं जम्मू कश्मीर में पाई जाने वाली मुर्गियों की एक ऐसी ही नस्ल की. जिनको बैकयार्ड पोल्ट्री में भी पाला जाता है. ये मुर्गी है कश्मीर फेवरोला. इसकी खासियत होती है कि ये मुर्गी कड़ाके की ठंड में भी अपने आप को ढाल लेती है.

देश में अंडे और मीट के लिए पोल्ट्री का बिजनेस बड़े पैमाने पर किया जा रहा है. मुर्गियों की वैसे तो कई नस्लें हैं, उन्हीं में देशी मुर्गियों की नस्ल में नाम शामिल है कश्मीर फेवरोला का. आइये जानते है, इसके बारे में.

कश्मीर फेवरोला: जैसा कि इसके नाम में शामिल है कश्मीर. जी हां, ये कश्मीर की पाई जाने वाली मुर्गी की नस्ल है. कश्मीर की देशी मुर्गी समुद्र तल से 1,500 से 2,000 मीटर की ऊंचाई पर पाई जाती है.

कश्मीर फेवरोला की विशेषताएं: कश्मीर फेवरोला छोटे आकार का पक्षी है, जिनके छोटे एकल कंघे और वॉटल होते हैं. उनके पंखदार कंघे इस नस्ल की खासियत हैं. एक औसल व्यस्क मुर्गा करीब पौने दो किलोग्राम का होता है. वहीं मुर्गी का वजन सवा किलो ग्राम तक होता है. इनके अंडे का वजन करीब चालीस ग्राम तक होता है. अंडे के छिलके का रंग हल्का भूरा होता है.

आर्थिक महत्व के लिए पालन: कश्मीर फेवरोला का पालन आर्थिक महत्व के लिए किया जाता है. कश्मीर फेवरोला की नस्ल ठंडी जलवायु और पहाड़ी इलाकों के लिए सबसे उपयुक्त है. ये मुर्गी श्रीनगर, बारामूला, अनंतनाग, बड़गाम, कुपवाड़ा, पुलवामा (जम्मू और कश्मीर) में पाई जाती है. इस नस्ल का मुख्य उपयोग भोजन-अंडा और मांस के लिए किया जाता है. ठंड सहने के लिए ये बेहद अच्छी मानी जाती है. इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहद अच्छी होती है.

असील का अंडा होता है महंगा: देसी मुर्गी की एक नस्ल असील भी है. इस नस्ल की मुर्गी को सिर्फ बैकयार्ड पोल्ट्री में ही पाला जाता है. असील का अंडे की मांग बहुत रहती है.खासकर सर्दियों में इसकी मांग और भी बढ़ जाती है. दवाई के तौर पर भी असील का अंडा खाया जाता है. यही वजह है कि सर्दियों में इसका अंडा 100 रुपये तक का बिक जाता है.हैचरी के लिए सरकारी केन्द्रों से ही असील मुर्गी का अंडा 50 रुपये तक का मिलता है. असील मुर्गी पूरे साल में सिर्फ 60 से 70 अंडे देती है.

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