Home पशुपालन Cow Farming: यूपी में 14 लाख से ज्यादा गायों को मिल रही नई जिंदगी, ये तीन स्कीम बनी वजह
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Cow Farming: यूपी में 14 लाख से ज्यादा गायों को मिल रही नई जिंदगी, ये तीन स्कीम बनी वजह

सीता नगर के पास 515 एकड़ जमीन में यह बड़ी गौशाला बनाई जा रही है. यहां बीस हजार गायों को रखने की व्यवस्था होगी. निराश्रित गोवंश की समस्या सभी जिलों में है इसको दूर करने के प्रयास किया जा रहे हैं.
प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश सरकार गायों की देखभाल के लिए लगातार काम कर रही है. खासतौर पर तीन योजनाओं के जरिए उत्तर प्रदेश में 14 लाख से ज्यादा गायों को नहीं जिंदगी देने का काम यूपी सरकार की तरफ से की गई है. सरकार ने ऐसे कई प्रयास किए हैं, जिसकी बदौलत गायों को आसरा मिला है और उनकी संख्या रोड पर कम होने की वजह से कई फायदा भी हुआ है. इस संबंध में सीएम योगी आदित्यनाथ कहते हैं कि साल 2017 में हम लोगों के सामने बहुत चुनौती थी. समय की मांग के मुताबिक पशुधन की नस्लों में सुधार नहीं हुए, जिसके परिणाम स्वरूप बड़े पैमाने पर पशुधन सड़कों, खेतों, कसाईखानों में जाते थे.

उन्होंने कहा कि यूपी में आस्था से खिलवाड़, किसानों के खेत में परेशानी और सड़कों पर दुर्घटनाएं भी होती थीं. 2017 में निराश्रित गोआश्रय स्थल की कार्ययोजना बनाई और 2018 में उसे लागू किया. जिसका नतीजा अच्छा सामने आया है.

तीनों स्कीमें क्या हैं
सीएम योगी ने कहा कि आज 14 लाख से अधिक गोवंशों की देखभाल सरकार की गोशालाओं या सरकार द्वारा सहायता प्राप्त पशुपालकों द्वारा की जा रही है. सीएम ने तीन स्कीम का जिक्र करते हुए बताया कि सरकार 12 लाख गोवंशों की देखभाल अपने निराश्रित गोआश्रय स्थल के माध्यम से करती है. दूसरी स्कीम-सहभागिता योजना के माध्यम से चालू की गई है. हम किसी भी पशुपालक को चार गोवंश तक देते हैं. उसकी देखभाल के लिए हर महीने 1500 रुपये प्रति गोवंश देते हैं. इसमें लगभग दो लाख से अधिक पशुधन 1.25 लाख किसानों के पास है. तीसरी स्कीम-कुपोषित परिवारों को निराश्रित गोआश्रय स्थल से बियाई हुई गाय देते हैं. 10 हजार से अधिक परिवारों को एक-एक गाय दे रखी है. 1500 रुपये हर महीने रुपये गाय की सेवा के लिए उपलब्ध कराते हैं. इससे गोवंश के संरक्षण व संवर्धन को बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है.

यूपी में कार्यरत हैं पांच मिल्क प्रोड्यूसर
सीएम योगी ने भारत सरकार का धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्होंने यूपी में मिल्क प्रोड्यूसर को प्रोत्साहित किया है. झांसी के बलिनी, गोरखपुर, आगरा, काशी समेत यूपी में पांच मिल्क प्रोड्यूसर कार्यरत हैं. इससे लाखों महिलाएं जुड़ी हैं, जो समितियों के माध्यम से दुग्ध कलेक्शन, आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्राप्त करती हैं और पशुपालन की अच्छी नस्ल की भी चिंता करती हैं. दूध कलेक्शन के माध्यम से वैल्यू एडिशन से किसानों व पशुपालकों के जीवन में खुशहाली लाने में योगदान दे सकते हैं. सीएम ने कहा कि गोरखपुर और काशी से जुड़े किसानों ने अपनी सफलता की कहानी सुनाई, जो सफलता की नई ऊंचाई की तरफ हम सभी को प्रेरित करती हैं.

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