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Fish Farming: मछली पालन में ऐसे बढ़ेगी किसानों की इनकम, यहां काम करने की है जरूरत

Deep Sea fishing vessels, Ice Plants, Livelihood & Nutritional Support have been implemented in Kakinada District.
प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली. मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के तहत चलने वाले मत्स्य पालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने पिछले दिनों पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिले का दौरा किया और मछली पालकों और मत्स्य पालन उद्यमियों से बातचीत की. इस बातचीत के दौरान उनकी समस्याओं और चुनौतियों, विशेष रूप से आरएएस और झींगा पालन से संबंधित समस्याओं को उन्होंने समझा. फतेहगढ़ साहिब जिले के बस्सी पठाना के दलुतपुर गांव में आधुनिक आरएएस सुविधाओं के दौरे के दौरान, डॉ. लिखी ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) सहित विभिन्न केंद्रीय योजनाओं के तहत चल रही मत्स्य पालन परियोजनाओं और गतिविधियों की समीक्षा की.

उन्हें स्थानीय किसानों द्वारा अपनाए गए नए तरीकों के बारे में जानकारी दी गई. जिन्होंने बंजर भूमि को कामयाबी के साथ उत्पादक जलीय कृषि में बदल दिया है और इस क्षेत्र में रोजगार और आजीविका के अवसर पैदा किए हैं. लगभग 35 प्रगतिशील मछली पालकों ने इस बातचीत में भाग लिया और अपने अनुभव को साझा किया.

इन बातों पर दिया जोर
इस यात्रा के दौरान डॉ. लिखी ने तकनीक-आधारित मछली पालन, किसानों की क्षमता निर्माण और प्रजातियों के विविधीकरण के महत्व पर जोर दिया, जिससे आय बनाने में सुधार होगा और ग्रामीण आजीविका मजबूत होगी.

उन्होंने प्रमुख मछली पालन कार्यक्रमों के तहत बुनियादी ढांचे के विकास, इनोवेशन और क्षमता वृद्धि के माध्यम से आधुनिक जलीय कृषि पद्धतियों को समर्थन देने के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई.

इस यात्रा ने पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में खारे पानी में जलीय कृषि को सरकार की प्राथमिकता पर भी जोर दिया.

ये क्षेत्र, जो अक्सर कृषि क्षेत्रों से खारे पानी के प्रवेश से प्रभावित होते हैं, जलीय कृषि के माध्यम से भूमि-उपयोग अनुकूलन के अनूठे अवसर प्रस्तुत करते हैं.

केंद्रीय मत्स्य सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने पंजाब में परियोजनाओं की समीक्षा की; तकनीक-आधारित जलीय कृषि, कौशल विकास और विविध मत्स्य पालन का आग्रह किया.

वहीं दूसरी ओर नीति आयोग के सीईओ, बीवी आर सुब्रह्मण्यम ने “भारत की नीली अर्थव्यवस्था गहरे समुद्र और अपतटीय मत्स्य पालन के दोहन की रणनीति” शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की.

नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, सुब्रह्मण्यम ने कहा कि भारत, जिसका लगभग 12 समुद्री मील का संप्रभु जल क्षेत्र और 200 मील का आर्थिक क्षेत्र है, ने अपने गहरे समुद्री संसाधनों का बमुश्किल ही दोहन किया है.

उन्होंने आगे कहा कि देश के गहरे समुद्री और अपतटीय मत्स्य पालन के संचालन को मज़बूत करने के लिए तीन चरणों वाला रोडमैप प्रस्तावित किया गया है.

पहला चरण नींव रखने से शुरू होता है, उसके बाद परिचालन का विस्तार किया जाता है, और इसलिए स्थायी गहरे समुद्री मत्स्य पालन में वैश्विक नेतृत्व हासिल किया जाता है.

Written by
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