नई दिल्ली. बकरी पालन करने वाले एक्सपर्ट का कहना है कि वैज्ञानिक तरीके से बकरी पालन करने में कुछ चीज ऐसी हैं, जिनका फार्म पर होना बेहद जरूरी है. उसमें एक सबसे अहम चीज यह है कि बकरियों के लिए बेसिक दवाएं फार्म पर उपलब्ध हों ताकि किसी भी तरह की इमरजेंसी हो तो उसका इस्तेमाल किया जा सके. हालांकि इसमें एक बात का ध्यान रखना जरूरी है कि बिना पशु चिकित्सक की सलाह पर किसी भी दवा का इस्तेमाल न किया जाए. नहीं तो इलाज की जगह बकरियां और बीमार पड़ सकती हैं.
एक्सपर्ट का कहना है कि मान लीजिए किसी बकरी पालक का गोट फॉर्म शहर से दूर है और रात में बकरी की तबीयत खराब हो गई तो ऐसे में यह दवाएं बकरी का इलाज करने में मददगार साबित होंगी. जिसका बकरी पालन में फायदा होगा. क्योंकि बीमारियों को बढ़ने से आप रोक पाएंगे और बीमारी गंभीर अवस्था तक नहीं पहुंचेगी.
क्या आती है दिक्कत
केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (CIRG) के एक्सपर्ट का कहना है कि बकरियों के बच्चों के मैनेजमेंट में निमोनिया और डायरिया जैसी बीमारी से बचाव के लिए सबसे ज्यादा काम करने की जरूरत होती है.
क्योंकि ये बीमारियां बकरी के बच्चों को बहुत परेशान करती हैं और इससे उनकी ग्रोथ रुक जाती है.
एक्सपर्ट के मुताबिक बकरी के बच्चे को निमोनिया हो जाए तो उसे नेबुलाइज करना चाहिए. यानी भाप देनी चाहिए. इससे बकरियों के बच्चों को सांस लेने में आसानी भी होती है.
इससे बकरी का बच्चा जल्दी बीमारी से रिकवर हो जाता है और उसे कोई गंभीर समस्या नहीं होती है. इसलिए नेबुलाइजर मशीन फॉर्म पर उपलब्ध होनी चाहिए.
एक्सपर्ट का कहना है कि बकरी पालकों के पास कम से कम 4 से 5 इंजेक्शन और कुछ दवाएं होनी चाहिए.
जिसमें कीड़े मारने की दवा होनी चाहिए. इसमें इस बात का ख्याल रखें कि पेट के कीड़े इम्यूनिटी न बना सकें. इसके लिए दवाओं को बदल—बदलकर दें.
दावों को टैबलेट और इंजेक्शन की दोनों तरह से रखना चाहिए, इससे जैसी जरूरत पड़ेगी आप दवा से बकरियों का इलाज कर सकते हैं.
निष्कर्ष
यदि आप बकरी पालन में ये काम करते हैं तो इससे बकरियों को बीमारियों से बचाया जा सकता है, जिसका फायदा बकरी पालन में आपको मिलेगा.












