नई दिल्ली. बकरियों को बीमारियों से बचाने के लिए डीवार्मिंग करना बेहद ही जरूरी होता है. हालांकि इसके लिए डीवर्मिंग करने का सही समय भी पता होना बेहद ही जरूरी है. केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (CIRG) के एक्सपर्ट का कहना है कि बकरियों की डीवार्मिंग मौसम बदलने से ठीक पहले जरूर करना चाहिए. वहीं मौसम बदलने के बाद भी करना उचित होता है. ऐसा करने से बकरियों को कई तरह की बीमारियों से बचाया जा सकता है और उनसे बेहतर उत्पादन भी लिया जा सकता है, नहीं तो उनकी सेहत खराब हो जाती है और उत्पादन पर भी असर पड़ता है.
एक्सपर्ट का कहना है कि जुलाई और सर्दियों से पहले साल में 3 से 4 बार बकरियों की डीवार्मिंग करना चाहिए. यदि बाड़े में बकरियों के छोटे बच्चे हैं तो हर महीने एक बार डीवार्मिंग की जरूरत पड़ती है. खासकर पहले 3 महीना के दौरान ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होती है. वहीं बड़ी बकरियों की साल में दो बार डीवार्मिंग काफी है. इससे उन्हें फायदा होगा.
डीवार्मिंग का सही समय क्या है
बकरी जब बच्चे को जन्म दे दे तो उसके बाद भी डीवर्मिंग करना चाहिए. बहुत से लोग इस दुविधा में रहते हैं कि डीवार्मिंग करना सही होगा या नहीं.
जबकि इसी दुविधा की वजह से वह डीवार्मिंग नहीं करते हैं, और इससे बकरी का दूध उत्पादन कम हो जाता है. उसकी सेहत भी खराब हो जाती है. वहीं इसका असर उसके बच्चे पड़ता है.
एक्सपर्ट का कहना है कि बकरी जब बच्चे को जन्म दे दे तो उसके 15 से 20 दिन के बाद डीवार्मिंग का समय सही होता है.
यदि इस समय आप डीवार्मिंग कर देते हैं यानी बकरी को कीड़े मारने की दवा पिला देते हैं तो इससे उनकी सेहत पर अच्छा असर पड़ेगा.
इससे बकरियों का दूध उत्पादन बेहतर हो जाएगा. जबकि उसके बच्चे की सेहत भी अच्छी रहेगी.
निष्कर्ष
डीवार्मिंग करना बेहद ही जरूरी है. क्योंकि आप डीवार्मिंग नहीं करते हैं तो बकरी पालन में होने वाला फायदा इससे प्रभावित हो सकता है. इसलिए बेहद ही जरूरी है कि समय से डीवार्मिंग करें.












